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मालदीप के दाख़िली मुआमलात में मुदाख़िलत पर ऐतराज़

नई दिल्ली, 15 फरवरी: (पी टी आई) मालदीप ने हिंदूस्तान के ख़िलाफ़ सख़्त मौक़िफ़ इख्तेयार करते हुए मुल्क के जम्हूरी इदारों की एहमीयत को कम करने का इल्ज़ाम आइद किया और कहा कि साबिक़ सदर मुहम्मद नशीद के गिरफ़्तारी वारंट पर बाहमी मुज़ाकरात के ब

नई दिल्ली, 15 फरवरी: (पी टी आई) मालदीप ने हिंदूस्तान के ख़िलाफ़ सख़्त मौक़िफ़ इख्तेयार करते हुए मुल्क के जम्हूरी इदारों की एहमीयत को कम करने का इल्ज़ाम आइद किया और कहा कि साबिक़ सदर मुहम्मद नशीद के गिरफ़्तारी वारंट पर बाहमी मुज़ाकरात के बजाय हुकूमत-ए-हिंद ने बरसर-ए-आम तब्सिरा किया जो बिलकुल नामुनासिब है।

मालदीप की वज़ारत‍ ए‍ ख़ारेजा ने रात देर गए एक बयान जारी करते हुए कहा कि हुकूमत-ए-हिंद ने मुल्क में पेश आ रहे ताज़ा वाक़ियात पर दोनों हुकूमतों के माबैन मुज़ाकरात की बजाय बरसर-ए-आम तब्सिरा का फ़ैसला किया है। हुकूमत-ए-मालदीप ने कहा कि हुकूमत-ए-हिंद का ये तर्ज़ अमल बिलकुल नामुनासिब है।

यही नहीं बल्कि हिंदूस्तान ने इस बारे में भी तब्सिरा किया है कि सितंबर 2013 में मुनाक़िद शुदणी सदारती इंतेख़ाबात में किस किस्म के उम्मीदवार हिस्सा ले सकते हैं। 45 साला मुहम्मद नशीद ने कल मुक़ामी अदालत की जानिब से जारी करदा गिरफ़्तारी वारंट से बचने के लिए हिंदूस्तानी हाई कमीशन में पनाह ली थी।

मुहम्मद नशीद की दूर-ए-सदारत में गुज़श्ता साल फ़ौजदारी अदालत के चीफ़ जज को महरूस रखने से मुताल्लिक़ एक मुक़द्दमा में कल अदालत ने उनके ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी वारंट जारी किया था। चूँकि मुहम्मद नशीद सितंबर में मुनाक़िद हो रहे इंतेख़ाबात में सदारती उम्मीदवार हैं, इस नुक्ता को पेशे नज़र रखते हुए हिंदूस्तान ने कल एक बयान जारी किया था जिसमें ये कहा गया कि मुस्लिमा सयासी जमातों के सदारती उम्मीदवारों को इंतेख़ाबात में किसी रुकावट के बगै़र आज़ादाना तौर पर हिस्सा लेना का मौक़ा फ़राहम करना ज़रूरी है।

वज़ारत ‍ए‍ ख़ारेजा मालदीप ने हकूमत-ए-हिन्द के इस बयान के जवाब में कहा कि मुल्क के आज़ादाना इलेक्शन कमीशन ने हनूज़ इंतेख़ाबी उम्मीदवारों का ऐलान नहीं किया है। इसके इलावा हुकूमत को ये यक़ीन है कि मालदीप का इलेक्शन कमीशन उम्मीदवारों की अहलीयत के बारे में फ़ैसला का मजाज़ है।

मुल्क के इंतेख़ाबी अमल को आगे बढ़ाने और उम्मीदवारों के नाम को क़तईयत देने का काम इलेक्शन कमीशन बख़ूबी अंजाम दे सकता है। इस मुआमले में महज़ क़ियास की बुनियाद पर राय ज़नी मुल्क के जम्हूरी इदारों की एहमीयत को कम करने के मुतरादिफ़ है।

यही नहीं बल्कि मालदीप ने जम्हूरी अमल के सिलसिले में जो पेशरफ्त की है , इस पर भी मनफ़ी तौर पर असरअंदाज़ होने की कोशिश क़रार दी जा सकती है। इस दौरान वज़ीर उमोर ख़ारेजा सलमान ख़ुरशीद मालदीप के हम मंसब से बात करने वाले हैं और तवक़्क़ो है कि वो साबिक़ सदर मुहम्मद नशीद के बारे में हिंदूस्तान के मौक़िफ़ को वाज़िह तौर पर पेश करेंगे।

सलमान ख़ुरशीद ने कहा कि इस मसला पर वज़ीर ‍ ए ‍ ख़ारेजा मालदीप अबदुस्समद अबदुल्लाह से बात करेंगे। ज़राए ने बताया कि सीनीयर हिंदूस्तानी ओहदेदार मुहम्मद नशीद से मुलाक़ात करके उन के मुस्तक़बिल के मंसूबों को समझने की कोशिश कर रहे हैं।

क़ब्लअज़ीं मालदीप ने हिंदूस्तान के इस दावे की तरदीद की कि नशीद के बारे में हिंदूस्तानी ओहदेदारों ने तबादला-ए-ख़्याल किया था और कहा कि हिंदूस्तान को मुल्क के आज़ादाना अदलिया में मुदाख़िलत नहीं करनी चाहीए। मुहम्मद नशीद 2008 में मुल्क के पहले जमहूरी तौर पर सदर मुंतख़ब हुए थे।

एक साल क़ब्ल उऩ्हें जज की गिरफ़्तारी के ख़िलाफ़ अवामी एहतिजाज की वजह से ओहदा छोड़ना पड़ा और उन के नायब मुहम्मद वहीद ने सदारत की बागडोर सँभाल ली थी। इसके बाद से हिंदूस्तान और मालदीप के माबैन ताल्लुक़ात किसी क़दर कशीदा हैं।

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