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मालेगांव बम बलास्ट: मुस्लिम नौजवानों के खिलाफ सुबूत पेश करने में नाकाम रही NIA

नई दिल्ली: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने माना कि मालेगांव बम विस्फोट मामले में उन 9 मुस्लिम युवकों के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं, यह गौर तलब है कि NIA के इन्वेस्टिगेशन से पहले ही ATS और CBI ने चार्जशीट फाईल की थी, किसी भी नतीजे पर पहुँचने से पहले NIA की कन्फेशन वाली स्टेटमेंट को ध्यान में रखना होगा. NIA के अधिवक्ता ने कहा कि उन 9 मुस्लिम जवानों को जिसे मालेगांव बलास्ट केस में गिरफ्ताकर किया गया था उन्हें जल्द ही राहत मिल सकती है, वह पहले ही लगभग 5 साल से ज़्यादा सलाखों के पीछे गुज़ार चुके हैं, फ़िलहाल वह जमानत पर हैं. मालेगांव बम विस्फोट मामले की आखरी सुनवाई 28 मार्च को होगी।

यह उल्लेखनीय है कि शुक्रवार 8 सितंबर 2006, 1:55 बजे चार सीरयल बम ब्लास्ट मस्जिद के पास,हमिद्या कब्रिस्तान और मुशावरत चौक पर हुआ था, मस्जिद मुसलमानों से भरी हुई थी वे नमाज़ पढने के लिए आए थे, जैसे ही उन्होंने दुआ के लिए हाथ उठाया बम ब्लास्ट हो गया जिस में 32 निर्दोष लोग मारे गए थे, 350 से ज्यादा लोग ज़ख़्मी हो गये थे, शक की बुन्याद पर मुस्लिम जवानों को गिरफ्तार किया गया था भले ही स्थानीय लोगों ने उनकी मासूमियत का सुबूत दिया था, स्थानीय पुलिस और एटीएस ने उनके अनुरोध पर ध्यान नहीं दिया।इस अनूठी बम विस्फोट, जिसमें स्थानीय पुलिस, एटीएस और सीबीआई द्वारा दो बार जांच की गई थी। बाद में, मामला एनआईए को सौंपा गया था। एटीएस और सीबीआई कुछ फोन कॉल्स और कुछ बयानों के आधार पर अदालत में आरोप पत्र प्रस्तुत किया।

जब एनआईए ने जांच शुरू किया तो एक बाद एक  रहस्य सामने आने लगे। 2008 में, एक बम भीखू चौक पर ब्लास्ट हुआ, जिसमें साध्वी और उसके गुरु कर्नल पुरोहित के साथ- उन्हें पुलिस हिरासत में ले लिया गया था। जब स्वामी असीमानंद का बयान दर्ज किया गया तो जांच एजेंसियों को आगे की जांच के लिए एक अवसर मिला। एनआईए ने उस समय भी        9 मुस्लिम युवकों की जमानत याचिकाओं का विरोध नहीं किया था ।

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