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मालेगांव बलास्ट : हम पर कोई दबाव नहीं इल्ज़ाम बेबुनियाद

नई दिल्ली: 2008 के मालेगांव ब्लास्ट मामले में क़ौमी जांच एजेंसी (एनआईए) ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर दिया है। एनआईए ने कहा है कि एनडीए की इक्तेदार में आने के बाद से इस मामले में किसी भी मुल्ज़िम को जमानत नहीं मिली है। इससे पहले एनआईए ने अदालत में कहा था कि मामले के ट्रायल को सुस्त करने के इल्ज़ाम गलत हैं।

हलफनामे में कहा गया है कि इस मामले कि पैरवी कर रही एनआईए की साबिका वकील रोहिणी सालियान के इल्ज़ाम बेबुनियाद हैं कि उनके ऊपर दबाव डाला गया कि वह मुल्ज़िमों को लेकर नरम रवैया अपनाए या फिर केस को कमजोर करें। एनआईए ने अपने हलफनामे में यह भी कहा कि एनआईए की पूर्व वकील रोहिणी सालियान का यह इल्ज़ाम भी गलत है कि जब वह इस मामले में खुसूसी वकील थीं तो सभी हुक्म एनाईए की ताईद में थे।

जांच एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 14 मुल्ज़िमों में से 4 को 2011 और 2013 के बीच जमानत मिल गई थी। वह भी तब जब रोहिणी इस मामले को बॉम्बे हाईकोर्ट में लीड कर रही थीं। जांच एजेंसी ने यह हलफनामा उन दो दरखास्तगुजारों के जवाब में दिया है, जिसमें यह मांग की गई थी कि एनआईए की साबिका वकील रोहिणी सालियान के इल्ज़ामात की जांच सीबीआई या फिर एसआईटी से कराई जाए।

साथ ही इस मामले में एनआईए के लिए खुसूसी वकील तकर्रुर किया जाए, ताकि मामले की मुंसिफाना सुनवाई हो सके। सुप्रीम कोर्ट आइंदा हफ्ते मामले की सुनवाई कर सकता है

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