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माहौलियात के तहफ़्फ़ुज़ के लिए नितीश कुमार ने दरख़्तों को राखी बांधी

रक्षा बंधन का तेहवार पूरे जोश-ओ-ख़ुरोश से मुल्क भर में मनाया गया और अक्सर ऐसा देखने में आता है कि सियासी क़ाइदीन को राखी बांधने के लिए ख़वातीन की क़तार लग जाती है लेकिन वज़ीर-ए-आला बिहार ने इस मौके पर माहौलियात की गंदगी से मुताल्लिक़ एक खास‌ पैग़ाम भेजते हुए दरख़्तों को राखी बांधने की रस्म अदा की।

दरख़्तों को अपना भाई या बहन मान‌ते हुए उन्होंने इस तरह ये उम्मीद‌ ज़ाहिर की कि रियासत के अलावा मुल्क गीर पैमाना पर भी माहौलियात को गंदा होने से बचाया जाय। इको पार्क में एक तक़रीब में उन्होंने दरख़्तों को राखी बांधते हुए वहां मौजूद अवाम से अपील की कि वो भी ये रस्म अदा करें क्योंकि माहौलियात के तहफ़्फ़ुज़ में दरख़्तों का बहुत ज़्यादा अहम रोल है।

इस मौके पर अख़बारी नुमाइंदों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह बहन के हिफाजत‌ की ज़िम्मेदारी भाई पर आइद होती है उसी तरह हमें दरख़्तों और पौदों के तहफ़्फ़ुज़ की ज़िम्मेदारी भी सँभालनी चाहिए, यहां इस बात का तज़किरा दिलचस्पी से ख़ाली ना होगा कि नितीश कुमार ने 2011 से माहौलियात के तहफ़्फ़ुज़ के लिए एक अलग तरह‌ का आग़ाज़ किया और इस में उनका तआवुन उस वक़्त के नायब वज़ीर-ए-आला और वज़ीर माहौलियात-ओ-जंगलात सुशील कुमार मोदी ने किया।

2011 से ही रक्षा बंधन के तेहवार के मौके पर दोनों क़ाइदीन इको पार्क में मुख़्तलिफ़ दरख़्तों को राखी बांधा करते थे जिस का सिलसिला नितीश कुमार ने जारी रखा है जिस का मक़सद यही है कि इंसान और फ़ित्रत के दरमयान हम आहंगी बरक़रार रहे। दूसरी तरफ़ इको पार्क में मौजूद ख़वातीन और स्कूली तालिबात की ज्यादा तादाद ने नितीश कुमार को राखी बांधी।

इस मौके पर दीगर वज़रा भी वहां मौजूद थे जो काफ़ी ख़ुश-ओ-ख़ुर्रम नज़र आरहे थे। नितीश कुमार का कहना है कि राखी का तेहवार हमें अपनी बहनों के तहफ़्फ़ुज़ का पैग़ाम देता है और उसी को मद्द-ए-नज़र रखते हुए उन्होंने दो साल पहले माहौलियात के तहफ़्फ़ुज़ का जो सिलसिला शुरू किया था, वो आगे भी जारी रहेगा।

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