Sunday , October 22 2017
Home / Khaas Khabar / मिस्त्र के साबिक सदर मोर्सी व दिगर 100 को सजा-ए-मौत

मिस्त्र के साबिक सदर मोर्सी व दिगर 100 को सजा-ए-मौत

काहिरा: मिस्त्र की एक अदालत ने इक्तेदार से बेदखल किए गए साबिक सदर मोहम्मद मोरसी और दिगर 100 लोगों को मौत की सजा सुनाई है। उन्हें साल 2011 में जेल तोडने के एक मामले में यह सजा सुनाई गई है। जब जज ने फैसला सुनाया तो सलाखों के पीछे बैठे मोरसी

काहिरा: मिस्त्र की एक अदालत ने इक्तेदार से बेदखल किए गए साबिक सदर मोहम्मद मोरसी और दिगर 100 लोगों को मौत की सजा सुनाई है। उन्हें साल 2011 में जेल तोडने के एक मामले में यह सजा सुनाई गई है। जब जज ने फैसला सुनाया तो सलाखों के पीछे बैठे मोरसी ने गुस्से में हवा में मुटी लहराई। जिन लोगों को सजा सुनाई गई है उनमें से बहुत से लोग गिरफ्त में नहीं हैं।

इनमें आलिम यूसुफ अल करादवी भी है जो कतर में रह रहे है। मिस्त्र के कानून के मुताबिक किसी को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद इस फैसले को मुफ्ती को भेज दिया जाता है। मुफ्ती हुकूमत का एक सलाहकार होता है जो इस्लामी कानून के मुताबिक फैसलों की तशरीह करता है।

मुफ्ती के फैसले के बाद ही अदालत 2 जून को आखिरी फैसला सुनाएगी। मोरसी जासूसी के इल्ज़ामात में इससे पहले दो बार हुई सुनवाई में मौत की सजा से बच गए थे जिसमें दिगर 16 लोगों को अदालत ने जासूसी व मिस्त्र को मुस्तहकम करने के लिए फिलीस्तीनी हमास व इरान से सांठगांठ के इल्ज़ामात में मौत की सजा सुनाई थी।

जानिए क्या है पूरा केस…

साल 2011 में जब मिस्त्र के साबिक सदर होसनी मुबारक के खिलाफ मुज़ाहिरा हो रहा था और बडी तादाद में लोग जेल से भागे थे। मोर्सी पर इसमें मिले होने का इल्ज़ाम था। अप्रैल में मोर्सी को 20 साल की सजा सुनाने के बाद उनके हामियों ने एहतिजाजी मुज़ाहिरा किए थे। मोर्सी को पहले ही अपने इक्तेदार के दौरान मुज़ाहिरा कर रहे लोगों की गिरफ्तारी और उन्हें परेशान करने के हुक्म के इल्ज़ाम में 20 साल की सजा दी गई थी। जुलाई 2013 में फौज ने मोर्सी का तख़्तापलट कर दिया था। इसके बाद से ओहदेदारो ने मोर्सी के मुस्लिम ब्रदरहुड मूवमेंट पर पाबंदी लगा दिया था और उनके हजारों हामियों को गिरफ्तार कर लिया था। मौत की सजा के इन सभी मामलों को मिस्त्र के “ग्रैंड मुफ्ती” को उनकी सलाह के लिए भेजा जाएगा। अगर मज़हबि इलीडर मौत की सजा पर मुहर लगा भी देते हैं तो उसके बाद भी मोर्सी इस फैसले के खिलाफ अपील कर सकते हैं।

उधर, मोर्सी के हामियो का इल्ज़ाम है कि उन पर जितने भी मुकदमे चलाए जा रहे हैं, सभी सियासत से मुतास्सिर हैं। उनके मुताबिक तख़्तापलट को कानूनी तौर पर सही ठहराने के लिए यह सब किया जा रहा है। वहीं मोर्सी ने अदालत के सभी फैसलों को नकार दिया है। मोर्सी मिस्त्र के पहले चुने गए सदर थे। हालांकि एक साल में ही उनके खिलाफ एहतिजाजी मुज़ाहिरा शुरू हो गया था |

TOPPOPULARRECENT