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मिस्री वज़ारत-ए-दिफ़ा के रू – बरू झड़पें , 20 हलाक

मिस्र की वज़ारत-ए-दिफ़ा के रू बरू फ़ौज के ख़िलाफ़ एहतिजाजी मुज़ाहरा करने वालों पर ठग्गों ने हमला किया, जिस से कम अज़ कम 20 अफ़राद हलाक और 150 से ज़्यादा ज़ख्मी हो गए। एहतिजाजियों पर संगबारी की गई, लाठियों से हमला किया गया। आतिशी बम फेंके गए और

मिस्र की वज़ारत-ए-दिफ़ा के रू बरू फ़ौज के ख़िलाफ़ एहतिजाजी मुज़ाहरा करने वालों पर ठग्गों ने हमला किया, जिस से कम अज़ कम 20 अफ़राद हलाक और 150 से ज़्यादा ज़ख्मी हो गए। एहतिजाजियों पर संगबारी की गई, लाठियों से हमला किया गया। आतिशी बम फेंके गए और शॉटगन से भी फायरिंग की गई।

मुबारक (hosni mubarak)के दौर‍ ए‍ इक़्तेदार के बाद पहले सदारती इंतेख़ाबात के दौरान पैदा होने वाली कशीदगी के बाद ये बड़े पैमाने का परतशद्दुद वाक़्या था। वज़ारत-ए-सेहत ने परज़ोर अंदाज़ में कहा कि सिर्फ 6 हलाकतें वाक़्य हुई हैं। फ़ौज और पुलिस ने झड़पों को रोक दिया था, लेकिन ये मुदाख़िलत झड़पों के आग़ाज़ से तक़रीबन 6 घंटे बाद की गई।

वज़ारत-ए-सेहत ने कहा कि 150 आदमी ज़ख्मी हैं और क़रीबी दवाखाने में ज़ेर-ए-इलाज हैं। बाअज़ (कुछ्) को शॉटगन की फायरिंग से ज़ख्मी आए हैं जबकि दीगर चाकूज़नी से ज़ख्मी हुए। बाअज़ इत्तेलाआत ( खबर) के बमूजब हमलावर नामालूम थे।

उन्होंने धरना देने वाले एहतिजाजियों पर हमला किया था। एहतिजाजी सलफ़ी मबलग़ हिज़ाम अबू इस्माईल के हामी थे, जिन्हें सदारती इंतेख़ाबात में मुक़ाबला से रोक दिया गया है। एहतिजाजी सदारती इंतेख़ाबी कमीशन की बर्ख़ास्तगी का भी मुतालिबा कर रहे थे।

एहतिजाजियों ने दावा किया कि हमलावर ठग्गों को फ़ौज की ताईद हासिल की थी ।

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