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मिस्री सदर (राष्ट्रपती ) मुर्सी की अलामती (सांकेतिक) हलफ़ बर्दारी (शपथ ग्रहण )

क़ाहिरा के अलतहरीर स्क्वाएर में मिस्र के नवमुंतख़ब सदर (राष्ट्रपती ) मुहम्मद मुर्सी ने लाखों के इजतिमा के सामने जुमा को अलामती (सांकेतिक) तौर पर हलफ़ उठाया जब कि सरकारी तौर पर हफ़्ते को दस्तूरी अदालत के रूबरू हलफ़ अठाएंगे जिस के

क़ाहिरा के अलतहरीर स्क्वाएर में मिस्र के नवमुंतख़ब सदर (राष्ट्रपती ) मुहम्मद मुर्सी ने लाखों के इजतिमा के सामने जुमा को अलामती (सांकेतिक) तौर पर हलफ़ उठाया जब कि सरकारी तौर पर हफ़्ते को दस्तूरी अदालत के रूबरू हलफ़ अठाएंगे जिस के बाद वो क़ाहिरा यूनीवर्सिटी की तक़रीब में शिरकत करेंगे और वहां क़ौम से ख़िताब करेंगे।

जुमा को अलामती (सांकेतिक) हलफ़ उठाते वक़्त अलतहरीर स्क्वाएर अवाम से खचाखच भरा हुआ था। मुहम्मद मुर्सी ने अलामती (सांकेतिक) हलफ़ में कहा कि मैं अल्लाह को हाज़िरो नाज़िर जान कर ये हलफ़ उठाता हूँ कि मैं जमहूरी निज़ाम (सिस्टम) का तहफ़्फ़ुज़ करूंगा और या कि मैं दस्तूर और क़ानून की हुक्मरानी का एहतिराम करूंगा।

इस मौक़ा पर लाखों लोग ख़ुशी से सरशार थे और उन में से बहुत से अफ़राद (लोग) के हाथों में फूल मौजूद थे । सदर (राष्ट्रपती ) मुर्सी ने कहा कि मैं अवाम के मुफ़ादात की देख भाल करूंगा और मैं क़ौम की आज़ादी और मुल्की सरहदों की हिफ़ाज़त के लिए कमर बस्ता (तैयार) रहूँगा। उधर इक़तिदार की मुंतक़ली पर इख़तिलाफ़ात के बाद मिस्र के नवमुंतख़ब सदर (राष्ट्रपती ) मुहम्मद मुर्सी हफ़्ते को सरकारी तौर पर दस्तूरी अदालत के रूबरू हलफ़ उठाएंगे । इस बात का ऐलान प्रैज़ीडैंसी ने किया।

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