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मीर आलम मंडी में मुश्तबा नौजवान गिरफ़्तार

हैदराबाद 30 अगस्त: सिटी पुलिस की कारकर्दगी और इक़दामात क़ौल और फे़ल में काफ़ी फ़र्क़ पाया जाता है ?। अवाम से क़रीब होने और दोस्ताना ताल्लुक़ात को पैदा करने के आला ओहदेदारों के दावे महिज़ अधूरे नज़र आरहे हैं। एक सारिक़ को सरेआम मसरूफ़ तरीन मार्किट में रंगे हाथों गिरफ़्तार करने के बावजूद पुलिस उस की गिरफ़्तारी की तौसीक़ नहीं करती बल्के साफ़ तौर पर इस नामालूम शख़्स की गिरफ़्तारी से इनकार कर दिया है जिसको अवाम के सामने एक मोटर साइकिल का सरक़ा करने की कोशिश का इल्ज़ाम में गिरफ़्तार कर लिया गया। हमने एसी ही आँखों देखी और लाईव तसावीर को हासिल किया है ये वाक़िया दिन-दहाड़े पुराना शहर के मसरूफ़ तरीन और मशहूर बाज़ार मीर आलम मंडी के क़रीब पेश आया। जहां पुलिस की वर्दी में शामिल मुलाज़िमीन ने इस सारिक़ को रंगे हाथों पकड़ लिया और उसे घसीटते हुए अपनी तहवील में ले लिया।

मुक़ामी ज़राए के मुताबिक़ नामालूम शख़्स जो मीर आलम मंडी के क़रीब मुश्तबा हालत में घूम रहा था उसने एक मोटर साइकिल के सरक़ा की कोशिश की पुलिस ने उसे नाकाम बना दिया। इस सिलसिले में जब मीर चौक पुलिस स्टेशन से राबिता क़ायम करने पर इस की तौसीक़ नहीं होपाई है। जब इस ख़सूस में मीर चौक के स्टेशन हाउज़ ऑफीसर से राबिता किया गया तो उन्होंने लाइलमी का इज़हार किया जब उन्हें तमाम वाक़िये से वाक़िफ़ करवाने की ज़रूरत पड़ी तब ओहदेदार से साफ़ तौर पर कह दिया कि उन्हें इस बात का इलम नहीं जिससे ओहदे के ताल्लुक़ से उनकी ज़िम्मेदारी और ख़िदमात से उनकी संजीदगी का इज़हार होता है जिसके बाद क्राईम के इंस्पेक्टर से राबिता क़ायम करने पर उन्होंने बताया कि वो असेंबली बंद-ओ-बस्त की ख़िदमात पर तायिनात हैं। लिहाज़ा उन्हें इस बात का इलम नहीं जबकि सब इंस्पेक्टर क्राईम से तौसीक़ करने के लिए राबिता क़ायम किया ग्या तो इस ओहदेदार ने भी लाइलमी का इज़हार किया और हैरत से ख़ुद दरयाफ़त करने लगा कि एसा ये कब हुआ। अगर कोई सबूत हो तो उन्हं फ़राहम किया जाये।

साउथ ज़ोन जैसे इलाके में अब जबकि दोनों तहवार एक साथ आरहे हैं। एसे हस्सास समझे जानेवाले ज़ोन में ओहदेदारों का अपनी ख़िदमात के ताल्लुक़ से एसा रवैय्या तशवीश का बाइस बना हुआ है जो ना सिर्फ आला ओहदेदारों के दावओं को नाकाम बनाने बल्के अवाम में इन वादों को रुस्वा करने का सबब भी रहा है।

सिटी पुलिस कमिशनर बरवक़्त चौकसी और बेहतर अवामी ताल्लुक़ात पर-ज़ोर देते आरहे हैं मातहत ओहदेदारों की लापरवाही का सिलसिला ख़त्म ही नहीं होता। सवाल ये पैदा होता है कि आया फिर सर-ए-आम पकड़ा गया ये शख़्स कौन था क्या वाक़ई उसे पुलिस मुलाज़िमीन ही ने गिरफ़्तार किया था या फिर पुलिस की वर्दी में किसी और ने उसे दबोच लिया अवाम में इस वाक़िये के बाद शदीद तशवीश पाई जाती है।

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