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मुंबई हमलों के तीन साल, मुतास्सिरीन क़स्साब को फांसी के मुंतज़िर

मुंबई २६‍ नवंबर (पी टी आई) मुल्क् के मालीयाती दार-उल-हकूमत मुंबई में 26/11 दहश्तगर्द हमलों के ख़ातियों अजमल अमीर क़स्साब और इस के साथीयों को सज़ा-ए-देने में ताख़ीर पर 26/11 हमलों में बच जाने वालों ने क़स्साब को फांसी देने का परज़ोर मुतालिबा किय

मुंबई २६‍ नवंबर (पी टी आई) मुल्क् के मालीयाती दार-उल-हकूमत मुंबई में 26/11 दहश्तगर्द हमलों के ख़ातियों अजमल अमीर क़स्साब और इस के साथीयों को सज़ा-ए-देने में ताख़ीर पर 26/11 हमलों में बच जाने वालों ने क़स्साब को फांसी देने का परज़ोर मुतालिबा किया है।

मुंबई पर हमलों के तीन साल बाद भी ख़ातियों को सज़ा-ए-देने में ताख़ीर पर इज़हार-ए-अफ़सोस करते हुए मुतास्सिरीन ने कहा कि हम पाकिस्तान के वाहिद बच जाने वाले बंदूक़ बर्दार को फांसी पर लट्कता हुआ देखना चाहते हैं।

13 साला देव यक्का रोतोन ने कहा कि आख़िर क़स्साब को हनूज़ फांसी क्यों नहीं दी गई? हम किस के लिए इंतिज़ार कर रहे हैं? क्या हम एक और 26/11 वाक़िया के मुंतज़िर हैं? क़स्साब और इस के साथीयों ने दहश्त फैलाकर हम में से हर एक को सदमा से दो-चार कर दिया। आख़िर हुकूमत सज़ा-ए-की तामील के लिए पहल क्यों नहीं कररही है। जब कभी में क़स्साब के बारे में पढ़ती हूँ तो मेरा दिल भर आता है।

इस बदनसीब रात 26 नवंबर 2008 को देव यक्का के वालिद नटवरलाल छत्रपति शेवा जी टर्मिनल में अपनी दुख़तर और फ़र्ज़ंद आकाश के साथ ट्रेन का इंतिज़ार कर रहे थॆ, जब दो दहश्तगरदों ने रेलवे स्टेशन पर अंधा धुंद फायरिंग की। अपने दाएं पैर में गोली लगने के बाद देव यक्का जो अदालत में ब्यान देने वाली सब से कमउमर ऐनी शाहिद थी।

इस वाक़िया के सदमा से कई दिन तक बाहर नहीं निकल सकी थी। इस ने कहा कि मैं आज ठीक हूँ लेकिन मुझे चलने में अब भी मुश्किल आर ही है। 8 वीं जमात की तालिबा ने कहा कि मेरी तालीम अच्छी चल रही है।

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