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मुजफ्फरनगर दंगा: 602 आरोपियों के खिलाफ़ आरोप पत्र दाखिल करने के लिए राज्य सरकार से एसआईटी ने मांगी मंजूरी

मुजफ्फरनगर दंगे के दो साल बाद भाजपा, कांग्रेस और बसपा नेताओं समेत 602 लोगों के खिलाफ 57 मामलों में एसआईटी ने अरोप पत्र दायकर करने के लिए राज्य सरकार से मंजूरी मांगी है। एसआईटी ने बुधवार को गृह विभाग में आयोजित हुए चार सदस्यीय समिति के सामने आरोपियों के खिलाफ सबूत रखे।

संयुक्त सचिव छेदी लाल गुप्ता ने बताया कि हम अंतिम निर्णय लेने के लिए आईओएस की तरफ से दिए गए सबूतों की जांच कर रहे है। जिन आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल करने के लिए एसआईटी ने राज्य सरकार के मंजूरी मांगी है उनमें बिजनौर से भाजपा के सांसद कुंवर सिंह भरतेंद्र और भाजपा के विधायक सुरेश राणा और संगीत सिंह सोम के अलावा पूर्व बसपा सांसद कादिर राणा, बसपा विधायक सलीम राणा और मौलाना जमील और मुजफ्फरनगर के कांग्रेस नेता सईद-उज-जामा के नाम शामिल हैं।

यह आरोप पत्र भारतीय दंड संहिता की धारा 153ए (धर्म के आधार पर जानबूझकर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता पैदा करना) और 295-ए (जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य करना, धार्मिक विश्वासों का अपमान करना) के तहत दाखिल किया गया है। हांलाकि एसआईटी ने पहले से ही इन मामलों में भारतीय दंड संहिता की अन्य धाराओं के तहत आरोप पत्र दायर किया है। लेकिन 153-ए और 295-ए के लिए राज्य सरकार की मंजूरी आवश्यक है।

दूसरी तरफ कादिर राणा, नूर सलीम राणा, मौलाना जमील और सईद-उज-जामा जैसे नेताओं पर 30 अगस्त 2013 को शाहनवाज की हत्या के बाद मुजफ्फरनगर के शहीद चौक पर आयोजित एक पंचायत में भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगाया है। वहीं भाजपा विधायकों और सांसदों पर 31 अगस्त और 7 सितंबर को नगला मनदौर में दो महापंचायत आयोजित कर दंगा भड़काने का आरोप लगाया गया है। यह महापंचायत सचिन और गौरव की हत्या के बाद आयोजित की गई थी। इन दोनों की हत्या शहनवाज की मौत के तुरंत बाद हुई थी।

महापंचायत के आयोजित बैठकों के दौरान समूदाय के दो नेताओं ने हत्या आरोपियों को गिरफ्तार करने की मांग की थी। गौरतलब है कि शाहनवाज हत्या मामले में एसआईटी ने पहले ही क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर चुकी है। वहीं इस आरोप पत्र में शाहनवाज के चार रिश्तेदारों सहित पांच लोगों के खिलाफ सचिन और गौरव की हत्या करने को लेकर नामजद किया गया है।

बता दें कि दूसरी महापंचायत 7 सितंबर को नगला मनदौर में आयोजित हुई थी और उसी के बाद दंगे की शुरूआत हुई थी। इस दंगे में 64 लोग मारे गए थे और करीब 40,000 लोग विस्थापित हुए थे। इस मामले में 510 लोगों पर आपराधिक मामलें दर्ज हुए थे। वहीं एसआईटी अभी 24 लोगों की हत्या से संबंधित 8 मामलों की जांच कर रही है।

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