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मुतालिबात और इसराफ़ वाली शादीयों का बाईकॉट वक़्त का तक़ाज़ा

हैदराबाद 17 अगस्त:ज़ाहिद अली ख़ां एडीटर रोज़नामा सियासत ने कहा कि शादीयों में बेजा मुतालिबात और ग़ैर इस्लामी रस्म-ओ-रिवाज के बाइस मुसलमानों की मईशत कमज़ोर और ग़ैर-मुस्तहकम हो रही है, जबकि इस का एहसास मिल्लत के मुतमव्विल तबक़ा को नहीं है। अगर शादीयों में पैसे की बचत की जाये तो ग़रीब लड़कीयों की शादियां अंजाम दी जा सकती हैं।

इन्होंने कहा कि सियासत और एम डी एफ़ ने इस मसले को हल करने के लिए जो तहरीक शुरू की है, वो आलमगीर सतह पर मक़बूल हो रही है। अमरीका, कनाडा, आस्ट्रेलिया और दुसरे कई बैरूनी ममालिक से वालिदैन सियासत की वेबसाइट पर मौज़ूं रिश्ते तलाश करने लगे हैं और अब तक 20 लाख से ज़ाइद लोगों ने इस वेबसाइट से इस्तेफ़ादा किया है।

इन्होंने कहा कि दौलत-ओ-सर्वत होने के बावजूद बच्चों की बढ़ती उमरें उनके लिए संगीन मसला बन चुकी हैं। इन्होंने कहा कि एक खाना, एक मीठा तहरीक के मुसबित असरात रौनुमा होने लगे हैं, चुनांचे उन्हें इत्तेला मिली हैके सिर्फ गोलकेंडा फंक्शन हाल (रिंग रोड पर) एक खाना एक मीठा के तहत चार वलीमे अंजाम दिए गए और करोड़ पत्ती मुस्लिम शख़्स ने अपनी बेटी की शादी पर मेहमानों की चाय से तवाज़ो की।

ये सूरत-ए-हाल निहायत ख़ुश आइंद है और उन्हें यक़ीन हैके मुसलमानों की सोच और फ़िक्र में इन्क़िलाबी तबदीली आएगी। ज़ाहिद अली ख़ां ने कहा कि मुसलमानों के लिए मुल्क में हालात इंतेहाई नासाज़गार होते जा रहे हैं और एसे एसे वाक़ियात सामने आरहे हैं कि कि जिससे रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

चुनांचे कुछ दिन पहले पुराने शहर में एक ग्यारह साला लड़की की इस्मत रेज़ि करके उसे क़त्ल कर दिया गया और इस मुजरिमाना हरकत में मुस्लिम नौजवान शामिल थे। इस दिल-सोज़ वाक़िये से हमारा सर श्रम से झुक गया। दरअसल इस तरह के वाक़ियात हमारी क़ौम की अख़लाक़ी गिरावट की मिसाल हैं।

इदारा सियासत ने जो तहरीक शुरू की है, इस का मक़सद मुस्लिम मुआशरे को ग़ैर इस्लामी तर्ज़-ए-ज़िदंगी से बचाना है। मौजूदा शादीयों का ज़िक्र करते हुए इन्होंने कहा कि शादीयों में ताख़ीर एक आम बात हो गई है, ना दूल्हा वक़्त पर आता है और ना ही दावती। इस के साथ साथ बाजे की बेहूदा लानत भी हमारी तक़ारीब का हिस्सा बन चुकी है।

फ़ज्र की नमाज़ तक बारात घर पहुँचती है, जिससे ना सिर्फ मुहल्ला के लोग बल्कि शिरकत करने वाले भी मुश्किलात का शिकार होते हैं। इन्होंने नौजवानों से दर मंदाना अपील की के वो मुतालिबात और ग़ैर इस्लामी रसूमात के ख़िलाफ़ जारी इस तहरीक में शामिल हो जाएं। जब तक हमारे मुस्लिम नौजवान नहीं होंगे, उस वक़्त तक इस तहरीक को तक़वियत नहीं हासिल होगी।

इन्होंने कहा कि एसी मुस्लिम शादीयों का बाईकॉट किया जाना चाहीए, जिनमें इसराफ़ से काम लिया जाता है। इन्होंने एक खाना एक मीठा तहरीक को मौजूदा हालात में नागुज़ीर क़रार दिया और उम्मीद ज़ाहिर की के मुस्लमान इस तरीका-ए-कार को अपनाते हुए बराह-ए-रास्त मुसलमानों की ख़िदमत करेंगे।

मुहम्मद मुश्ताक़ सदर तहरीक मुस्लिम शबान ने कहा कि दु‍ बा दु मुलाक़ात प्रोग्राम जिस आब-ओ-ताब के साथ मुनाक़िद होता है, इस की मिसाल पूरे मुल्क में नज़र नहीं आती। इस तहरीक के ज़रीये लड़के और लड़कीयों के सैकड़ों रिश्ते तै पा चुके हैं, उसके लिए ज़ाहिद अली ख़ां और उनके रफ़क़ा क़ाबिल मुबारकबाद हैं।

इन्होंने कहा कि रिश्तों को जोड़ना बहुत मुक़द्दस काम है। रिश्तों की बड़ी इज़्ज़त होती है, जो लोग रिश्तों के जोड़ने का काम अंजाम देते हैं, वो अल्लाह-तआला के बेशुमार इनामात-ओ-अकरामात के मुस्तहिक़ हैं। इन्होंने कहा कि आज के दौर में रिश्तों में दराड़ें पड़ रही हैं, जिसकी सबसे बड़ी वजह इस्लाम से दूरी है।

इन्होंने मुस्लिम शादीयों में पैसा और नाक़ाबिल माफ़ी बुराईयों का ज़िक्र करते हुए कहा कि शादी के लिए लड़के वालों की तरफ से माँगना हराम है, लड़की के ख़ुद्दार वालिदैन को चाहीए कि वो फ़क़ीरों के घरों में अपनी बेटी ना दें, क्युंकि भिकारीयों को बेटी देना अपनी इज़्ज़त नफ़स के ख़िलाफ़ है।

इन्होंने कहा कि मयारी शादी के नाम पर जो फुज़ूलखर्ची की जाती है, वो मुस्लिम मुआशरे के लिए बाइस-ए-शर्म है। इन्होंने कहा कि शादीयों में ढोल बाजा, नाच गाना, मेहंदी, सानचक़ और इस तरह की बेहूदा रसूमात से हम दुसरें के सामने बेइज़्ज़त हो रहे हैं। इंतेहाई अफ़सोस की बात हैले मुल्क में हमारी मईशत और मुआशरत को बर्बाद करने की साज़िशें हो रही हैं और दूसरी तरफ़ हम ख़ुद अपनी बर्बादी का सामान कर रहे हैं।

इन्होंने मुसलमानों से अपील की के वो शादीयों में एक खाना एक मीठा को राइज करते हुए हक़ीक़ी ख़ुशीयां फ़राहम करें। इन्होंने कहा कि इसी शादी ख़ाने (गोलकेंडा फंक्शन हाल) के मैनेजर सय्यद इफ़्तिख़ार ने बताया कि हैदराबाद की एक मुतमव्विल शख़्सियत ने अपने लड़के का वलीमा एक खाना और एक मीठा पर किया और चार शादियां एसी हुई हैं, जिनमें मेहमानों की तवाज़ो चाय और हलीम से की गई

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