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मुफ्ती का बयान कुबूल के काबिल नहीं: मज़हबी रहनुमा

हिंदू मज़हब के भगवान शंकर को इस्लाम का पहला पैगम्बर बताने वाले जमीयत उलमा के मुफ्ती मुहम्मद इलियास के बयान को मज़हबी रहनुमाओं ने बेबुनियाद बताते हुए इसके पीछे साजिश की तरफ इशारा किया है.

हिंदू मज़हब के भगवान शंकर को इस्लाम का पहला पैगम्बर बताने वाले जमीयत उलमा के मुफ्ती मुहम्मद इलियास के बयान को मज़हबी रहनुमाओं ने बेबुनियाद बताते हुए इसके पीछे साजिश की तरफ इशारा किया है.

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के रुकन और लखनऊ के शहर काजी मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि जमीयत के मुफ्ती का बयान बेबुनियाद है और इसमें साजिश की बू भी आती है.

फरंगी महली ने कहा कि किसी भी मजहबी किताब में या किसी भी तारीखी हवाले से यह बात साबित नहीं होती कि भगवान शंकर इस्लाम के पहले पैगम्बर थे. हिन्दू मजहब में तो किसी भी पैगम्बर का कोई सूल ( Theory) ही नहीं है. यह एक पुख्ता हकीकत है कि इस्लाम के पहले पैगम्बर हजरत आदम अलैहिस्सलाम थे और आखिरी पैगम्बर मुहम्मद मुसतहफा सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम थे .

उन्होंने कहा कि हम दूसरे मजहबों के पेशवा की भी इज्जत करते हैं, मगर चूंकि मज़हबी किताबों के हवाले से यह साबित है कि हजरत आदम ही पहले पैगम्बर थे, लिहाजा मुफ्ती का बयान काबिले कुबूल नहीं है.

गौरतलब है कि जमीयत उलमा-ए-हिन्द के मुफ्ती मुहम्मद इलियास ने गुजश्ता 18 फरवरी को अयोध्या में दिये एक बयान में कहा था कि भगवान शंकर इस्लाम के पहले पैगम्बर हैं और हिंदुस्तान में रहने वाला हर शख्स सनातनधर्मी यानी हिन्दू है. उन्होंने यह भी कहा था कि हिंदुस्तान को हिन्दू राष्ट्र ऐलान करने की वह मुखालिफत और एहतिजाज नहीं करते.

हालांकि जमीयत ने उनके इस बयान से असहमति जताते हुए उसे उनकी ज़ाती राय बताया था. इस बीच, शिया पर्सनल ला बोर्ड के तरजुमान मौलाना यासूब अब्बास ने भी मुफ्ती इलियास के बयान को बेबुनियाद और सस्ती मकबूलियत पाने की कोशिश करार देते हुए इसे किन्हीं नुकसान पहुंचाने वाली ताकतों के इशारे पर दिया गया बयान बताया है.

शिया मज़हब के रहनुमा ने कहा कि इस वक्त मुल्क को तरक्की पर ले जाने की जरूरत है. आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के जनरल सेक्रेटरी मौलाना निजामुद्दीन ने इस बारे में पूछे जाने पर जमीयत लीडर के बयान पर कोई तब्सिरा करना मुनासिब नहीं समझा और इससे इनकार कर दिया.

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