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मुर्गों की लड़ाई में सुप्रीम कोर्ट ‘बेबस’

सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश में मकर संक्रांति के त्योहार दौरान रिवायती मुर्गों की लड़ाई के खेल पर जमूद बनाए रखने की हिदायत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट से मामले की सुनवाई दोबारा करने और Animal Welfare Committee समेत सभी फरीक

सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश में मकर संक्रांति के त्योहार दौरान रिवायती मुर्गों की लड़ाई के खेल पर जमूद बनाए रखने की हिदायत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट से मामले की सुनवाई दोबारा करने और Animal Welfare Committee समेत सभी फरीको को सुनने को कहा है।

चीफ जस्टिस एच.एल.दत्तू और जस्टिस ए.के.सीकरी की बेंच ने फैसला देते हुए कहा कि हाई कोर्ट जबतक मामले को निपटा नहीं देती, जमूद बरकरार रहेगी। दरअसल, हाई कोर्ट मुर्गों की लड़ाई पर पाबंदी लगा चुकी है। हाई कोर्ट के हुक्म को चुनौती देने वाले बीजेपी लीडर रघुराम कृष्ण राजू और दिगर दो ने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट ने इस रिवायती खेल को जारी रखने का हुक्म दे दिया है।

वहीं, आंध्र प्रदेश पुलिस ने कहा कि रियासत में मौजूदा कानून लागू रहेगा, जिसके मुताबिक यह रिवायती खेल गैरकानूनी है। आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने 29 दिसंबर, 2014 को मुर्गों की लड़ाई का खेल कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का हुक्म दिया था, क्योंकि इस खेल की आड़ में न सिर्फ शराब की बिक्री और सट्टेबाजी की जाती है, बल्कि यह परिंदो के खिलाफ ज़ुल्म का भी मामला है।

बीजेपी लीडर और दिगर ने यह कहकर हाई कोर्ट के हुक्म को चुनौती दी थी कि यह खेल रिवायती और शफाक्त का हिस्सा है और इसके बिना संक्रांति त्योहार का अहमियत कम होगी।

गौरतलब है कि मकर संक्रांति के दौरान कृष्णा, पश्चिमी गोदावरी और मशरिकी गोदावरी जिलों में मुर्गे की लड़ाई के खेल का प्रोग्राम किया जाता है। हर साल इन मुर्गों की जीत-हार पर करोड़ों रुपयों का सट्टा लगाया जाता है।

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