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मुल्क की तरक़्क़ी और मुस्लिम रिज़र्वेशन पर जलसा

वाराणसी, २० नवंबर (फैक्स) आर्टीकल 341 का नफ़ाद बला तफ़रीक़ मज़हब-ओ-मिल्लत इसलिए भी ज़रूरी है कि इस का नफ़ाज़ हिंदूस्तान की दूसरी सबसे बड़ी अक़ल्लीयत के बेशतर मसाइल को हल कर देगा।

वाराणसी, २० नवंबर (फैक्स) आर्टीकल 341 का नफ़ाद बला तफ़रीक़ मज़हब-ओ-मिल्लत इसलिए भी ज़रूरी है कि इस का नफ़ाज़ हिंदूस्तान की दूसरी सबसे बड़ी अक़ल्लीयत के बेशतर मसाइल को हल कर देगा।

मज़कूरा ख़्यालात का इज़हार एतवार को सैयद मुहम्मद काज़मी साबिक़ एडवोकेट जनरल ने नैशनल इंटर कालेज में मुनाक़िदा जलसा में किया। एतवार को यूपी राबिता कमेटी बनारस और समाजी तंज़ीम जमईता अल नसार की जानिब से मुशतर्का तौर पर नैशनल इंटर कालेज पीली कोठी में एक जलसा मुनाक़िद किया गया जिस की सदारत मुफ़्ती बनारस मौलाना अब्दुल नामानी ने की।

इस जलसा में लखनऊ ईदगाह के इमाम मौलाना ख़ालिद रशीद फ़रंगी महली भी शामिल होने वाले थे मगर कुछ नागुज़ीर वजूहात की बिना पर वो ना आ सके। जलसा के मेहमान ख़ुसूसी अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी के प्रोफेसर शकील समदानी रहे और जलसा में सैयद मुहम्मद काज़मी ने साबिक़ एडवोकेट जनरल हुकूमत उत्तर प्रदेश ने कलीदी ख़ुतबा दिया।

लखनऊ के मुहम्मद ख़ालिद ने जलसा का इफ़्तिताह किया। अपने ख़िताब में प्रोफ़ेसर शकील समदानी ने कहा कि मुसलमानों की हालत को देखते हुए अब ये बहुत ज़रूरी हो गया है कि उन को सरकारी नौकरीयों और तालीमी इदारों में फ़ौरन रिज़र्वेशन दिया जाए।

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