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मुल्क में आज तक फ़िर्कावाराना फ़सादाद में मुलव्विस ख़ातियों को सज़ा नहीं हुई

नई दिल्ली, 07 दिसंबर: कम्यूनिस्ट पार्टी आफ़ इंडिया ने आज बाबरी मस्जिद की शहादत के 20 साल मुकम्मल होने पर जंतर मंतर पर एक एहितजाजी धरना मुनज़्ज़म करते हुए बाबरी मस्जिद शहादत और बादअज़ां मुल्क भर में फूट पड़ने वाले फ़िर्कावाराना फ़सादाद मे

नई दिल्ली, 07 दिसंबर: कम्यूनिस्ट पार्टी आफ़ इंडिया ने आज बाबरी मस्जिद की शहादत के 20 साल मुकम्मल होने पर जंतर मंतर पर एक एहितजाजी धरना मुनज़्ज़म करते हुए बाबरी मस्जिद शहादत और बादअज़ां मुल्क भर में फूट पड़ने वाले फ़िर्कावाराना फ़सादाद में मुलव्वस मुल्ज़िमीन को गिरफ़्तार करने हुकूमत से मुतालिबा किया।

मज़कूरा धरने में मुख़्तलिफ़ तबक़ात से ताल्लुक़ रखने वाले सैंकड़ों अफ़राद ने शिरकत की। इस मौक़ा पर सी पी आई की मर्कज़ी कमेटी की रुकन कविता कृष्णन ने ख़िताब करते हुए कहा कि जिस वक़्त बाबरी मस्जिद को शहीद किया गया, उस वक़्त जुनूनीयों की भीड़ में बी जे पी के कई क़ाइदीन मौजूद थे, जो भीड़ को उकसा रहे थे।

मुल्क के अवाम आज भी ये जानना चाहते हैं कि मस्जिद की शहादत के वक़्त वहां मौजूद लाल कृष्ण अडवानी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती पर कब मुक़द्दमा चलेगा। इसी तरह मुंबई फ़सादाद में रास्त ( सीधे) तौर पर मुलव्वस और मुसलमानों का क़त्ल-ए-आम करने वाले बाल ठाकरे का बाल तक बाका नहीं हुआ बल्कि हैरतअंगेज़ और अफ़सोसनाक तौर पर जब गुज़श्ता माह उन की मौत वाकेय् हुई तो मुकम्मल सरकारी एज़ाज़ के साथ उनकी आख़िरी रसूमात अंजाम दी गई और अब मुंबई में उनकी यादगार तामीर करने पर भी ग़ौर किया जा रहा है।

दूसरी तरफ़ मज़ीद अफ़सोसनाक बात ये है कि मीडीया ने भी उनकी मौत पर फ़सादाद में उन के रोल पर पर्दा डाला और‌ दिन भर चैनलों से सिर्फ़ उनकी मद्हसराई होती रही। इसी माह गुजरात में इंतिख़ाबात ( चुनाव) हो रहे हैं जहां 2002 में मुसलमानों का क़त्ल-ए-आम करवाने वाले नरेंद्र मोदी एक बार फिर वज़ीर-ए-आला की दौड़ में शामिल हैं। यही नहीं बल्कि वो मुल्क के आइन्दा वज़ीर-ए-आज़म बनने का ख़ाब भी देख रहे हैं।

1984 में मुख़ालिफ़ सिख फ़सादाद में मुलव्वस क़ाइदीन भी आज तक सज़ा से बचते रहे। एक और क़ाइद गिरीजा पाठक ने कहा कि हिंदूस्तान जैसे सेक्यूलर मुल्क में फ़िर्कावाराना फ़सादाद करवाने वालों को आज़ाद घूमने का हक़ क्यों मिल जाता है? यही नहीं बल्कि उन गुनाहागारों को भी इस बात का पूरा यक़ीन होता है कि उन्हें कोई गिरफ़्तार नहीं कर सकता।

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