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मुल्क में दहश्तगर्द हमले करने हिन्दू क़ौम परस्त ग्रुपों का मंसूबा

हिन्दू दहश्तगर्दी सिल के 9 अरकान की गिरफ़्तारी से अहम इन्किशाफ़ात, इस्लामी दहश्तगर्दी का भी ख़तरा

हिन्दू दहश्तगर्दी सिल के 9 अरकान की गिरफ़्तारी से अहम इन्किशाफ़ात, इस्लामी दहश्तगर्दी का भी ख़तरा
वाशिंगटन 14 सितंबर (एजैंसीज़) हिंदूस्तान में हालिया होने वाली तबदीलीयों से पता चलता है कि इंतिहापसंद हिन्दू क़ौम परस्त ग्रुपों ने अंदरून-ए-मुल्क दहश्तगर्द हमले शुरू करने का मंसूबा बनाया है। अमरीकी कांग्रेस रिपोर्ट में मज़ीद बताया गया है कि हिंदूस्तान में रौनुमा होने वाले वाक़ियात इस बात की गवाही देते हैं कि दहश्तगर्द सरगर्मीयों में इज़ाफ़ा होगा। सितंबर 2008 -ए-में महाराष्ट्रा के मालिगांव में दो बम धमाके हुए थे जिस में 7 अफ़राद हलाक हुए थे। ये इलाक़ा हिन्दू मुस्लिम फ़िर्कावाराना तौर पर हस्सास समझा जाता है। 94 सफ़हात की सी आर ऐस रिपोर्ट में बताया गया है कि साल के इख़तताम तक पुलिस ने बम धमाकों के सिलसिला में हिन्दू टररसट सिल के 9 अरकान को गिरफ़्तार किया था, इन में एक सरगर्म फ़ौजी लीफ़टननट कर्नल और एक हिन्दू साध्वी भी शामिल हैं। गिरफ़्तार शूदा तमाम हिन्दू इंतिहापसंद अप्पोज़ीशन पार्टी बी जे पी से ताल्लुक़ रखते हैं। रिपोर्ट में मज़ीद बताया गया कि हिंदूस्तान के क़ौमी मुज़ाकरात में हिन्दू दहश्तगर्दी एक निहायत ही हस्सास और मुतनाज़ा मसला बनी हुई है। मलिक की तारीख़ में ये पहली मर्तबा है कि हिन्दू दहश्तगर्दी का भयानक चहरा उभरा है। इस से हिंदूस्तान की क़ौमी नफ़सियात पर मनफ़ी असरात मुरत्तिब होरहे हैं और तरक़्क़ी की राह में रुकावट पैदा हुई है। कई हिंदूस्तानियों का एहसास है कि अक्सरीयती तबक़ा में दहश्तगर्दी का फ़रोग़ ख़तरनाक है। हिन्दू क़ौम परस्त जमातें मलिक के सैकूलर किरदार के लिए ख़तरा बनी हुई हैं। 2010 ए- के अवाख़िर में हिंदूतवा के इंतिहापसंद स्वामी असीमानंद ने अपने इक़बाली ब्यान में मुस्लमानों को बदनाम करने के लिए बम धमाके करने का एतराफ़ किया था। साबिक़ में हिंदूस्तान में होने वाले बम धमाकों के लिए इस्लामी दहश्तगरदों को ज़िम्मेदार क़रार दिया गया था। मालिगांव बम धमाका में 37 अफ़राद हलाक हुए थे। समझौता ऐक्सप्रैस धमाका में 68 अफ़राद हलाक हुए थे। ये ट्रेन दिल्ली और लाहौर के दरमयान चलाई जा रही है। असीमानंद ने कहा था कि इस्लामी दहश्तगरदों ने हिन्दू मंदिरों पर हमले किए थे, उन का इंतिक़ाम लेने के लिए हिन्दू दहश्तगर्द हमले किए गए। स्वामी असीमानंद के इक़बाली ब्यान से क़ानून नाफ़िज़ करनेवाली अनफ़ोरसमनट एजैंसीयों को धक्का पहूँचा था क्योंकि इन एजैंसीयों ने शुबा की बुनियाद पर मुस्लमानों को गिरफ़्तार किया था। हिन्दू दहश्तगर्दी के मंज़रे आम पर आने के बाद हिंदूस्तान की दाख़िली सलामती को इंतिहापसंदी से ख़तरा होने की निशानदेही की गई। सी आर इसकी रिपोर्ट में हिंदूस्तान के अंदर पैदा होने वाली इस्लामी दहश्तगर्दी का भी ज़िक्र किया गया है और बताया गया है कि ये दहश्तगर्दी हिंदूस्तान की मआशी पैदावार के लिए ख़तरा है। नई दिल्ली की जानिब से इस हक़ीक़त को तस्लीम किया गया है कि मुल्क में इस्लाम पसंद दहश्तगर्द ग्रुप सरगर्म हैं और इंडियन मुजाहिदीन के नाम से उभर रही है। इंडियन मुजाहिदीन के नाम से एक ग्रुप उभरा है जो स्टूडैंटस इस्लामिक मोओमनट आफ़ इंडिया का हिस्सा समझा जाता है। इस तंज़ीम पर इमतिना आइद करदिया गया है। हकूमत-ए-हिन्द ने 2010 -ए-में इंडियन मुजाहिदीन को ममनू क़रार दिया जिस ने वार नासी में बम धमाके करने की ज़िम्मेदारी क़बूल की थी।

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