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मुल्क में हिंदुओं के बढ़ने की रफ्तार घटी

नई दिल्ली : नरेंद्र मोदी सरकार ने मज़हब की बुनियाद पर मरदमशुमारी रिपोर्ट जारी कर दी है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक साल 2001 -2011 के बीच गुजश्ता दस साल में कुल आबादी में मुसलमानों की तादाद 0.8 फीसदी बढ़ी है, जबकि हिंदुओं की तादाद 0.7 फीसदी घटी है.

रजिस्ट्रार जनरल एंड सेंसस कमिश्नर के आंकड़ों के मुताबिक मुसलमानो की आबादी 24 फीसदी की दर से बढ रही है तो क़ौमी औसत 18 फीसदी है.

इसी तरह सिखों की आबादी में 0.2 फीसदी, बौद्धों की आबादी में 0.1 फीसदी की गिरावट देखी गई है. हालांकि जैन और ईसाई की आबादी में कोई खास बदलाव नहीं आए हैं.

2011 के मरदमशुमारी के मुताबिक अब मुल्क में 96 करोड़ तिरसठ लाख हिंदू हैं जबकि मुसलमानों की तादाद सत्रह करोड़ बाइस लाख है. मुल्क में दो करोड़ अठहतर लाख ईसाई और दो करोड़ आठ लाख सिख हैं.

इस सरकारी आंकडे की सबसे अहम बात ये है कि 2001 से 2011 के बीच सभी मज़हबों की आबादी बढ़ने की रफ्तार घटी है. हालांकि, दस साल में सबसे ज्यादा आबादी में बढ़ोतरी का दर मुसलमान में देखा गया.

मुसलमानों की आबादी 24.6 फीसदी से बढ़ी है जोकि क़ौमी औसत से 6.9 फीसदी ज्यादा है. जबकि दूसरे सभी मज़हबी यूनिट्स की आबादी क़ौमी औसत से कम है. 2001 से 2011 के बीच हिंदुओं की आबादी के बढ़ने की दर 16.8 रही, ईसाई की आबादी बढ़ने की रफ्तार 15.5 रही.

इस तरह सिख की आबादी के बढ़ने की दर 8.4 फीसदी रही. बौद्ध मज़हब की आबादी के बढ़ने की दर 6.1 रही. जैन की आबादी बढ़ने की दर सबसे कम 5.4 रही.

आपको मालूम हो कि साल 1991 और 2001 के दौरान मुसलमानों की आबादी के बढ़ने की रफ्तार 29 फीसदी थी जो गिरकर 24.6 फीसदी हो गई है. हालांकि, ये दर अब भी क़ौमी औसत से काफी ज्यादा है.

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