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मुवासलाती सैटेलाइट GSAT-16 का कामयाब तजुर्बा

बैंगलोर इसरो के साईंसदानों का कारनामा वज़ीर-ए-आज़म की जानिब से मुबारकबाद

बैंगलोर

इसरो के साईंसदानों का कारनामा वज़ीर-ए-आज़म की जानिब से मुबारकबाद

मुवासलाती ख़िदमात को मज़बूत और वसीअतर बनाने केलिए हिन्दुस्तान की ख़लाई गुंजाइश को बढ़ाने केलिए आज किए गए कामयाब तजुर्बे में सैटेलाइट GSAT-16 को दाग़ा गया । सुबह की अव्वलीन साअतों में फ़्रैंच गयोना में कौरव के ख़लाई बंदरगाह से ये सैटेलाइट दाग़ा गया।

ख़राब मौसम की वजह से दो दिन की ताख़ीर के बाद आज का ये तजुर्बा कामयाब रहा। इस सैटेलाइट को 3,181 किलोग्राम वज़न के साथ मदार में दाख़िल किया गया। इस के लिए 32मिनट दरकार हुए। इस दोहरे रेकेट मिशन GSAT-16 मआ 48 ट्रांसपोंडस‌ हैं। अब तक दागे़ गए सैटेलाइट में ये सब से बड़ा मुवासलाती सैटेलाइट है।

इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाईज़ेशन ( इसरो) के साईंसदानों ने उसे मदार में दाख़िल किया इस से अमरीका भर में डायरेक्ट टू होम टेलीविज़न ब्रॉडकास्टस की सहूलत हासिल होगी। सैटेलाइट के कामयाब दागे़ जाने के बाद बैंगलोर हेडक्वार्टर बीस पर इसरो के साईंसदानों ने कहा कि इस सैटेलाइट की कारकर्दगी इतमीनान बख़श है।

वज़ीर-ए-आज़म नरेंद्र मोदी ने इसरो के साईंसदानों की कोशिशों की सताइश की और उन्हें मुबारकबाद पेश की। उन्होंने कहा कि इस सैटेलाइट से मुल्क के ख़लाई प्रोग्राम में अहम कामयाबी मिलेगी और ये हमारे ख़लाई प्रोग्राम का बड़ा असासा है। वज़ीर-ए-आज़म ने ट्वीटर पर लिखा कि जी एसएटी 16 को कामयाबी से दागे़ जाने के बाद हमारे ख़लाई प्रोग्राम को तरक़्क़ी मिलेगी।

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