Friday , October 20 2017
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मुश्किल हालात के बावजूद पैदावार में इज़ाफ़ा वज़ीर-ए-आज़म ने किसानों की सताइश की

वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह ने आज मुल्क में अनाज की ज़ाइद पैदावार को एक चैलेंज क़रार देते हुए उन तमाम रियास्तों को भरपूर मदद‌ का यकीन‌ दिया जो ज़राअती शोबा को फ़रोग़ देना चाहती हैं।

वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह ने आज मुल्क में अनाज की ज़ाइद पैदावार को एक चैलेंज क़रार देते हुए उन तमाम रियास्तों को भरपूर मदद‌ का यकीन‌ दिया जो ज़राअती शोबा को फ़रोग़ देना चाहती हैं।

गुजरात के बॉस कानठा से किसानों का एक जत्था मुल्क गीर दौरे के तहत नई दिल्ली पहुंचा है और उन्ही के एक जलसा से ख़िताब करते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि मुल्क की बढ़ती हुई आबादी के मुताबिक़ अनाज की पैदावार करना किसानों केलिए बेशक एक चैलेंज है क्योंकि आज भी मुल्क के बेशतर हिस्सों में ज़राअत केलिए बारिश को ही ज़रूरी समझा जाता है।

वज़ीर-ए-आज़म के इस ख़िताब को इस लिए भी एहमियत का हामिल समझा जा रहा है क्योंकि उन्होंने ग़िज़ाई तहफ़्फ़ुज़ बिल पेश किए जाने और सदर जमहूरिया की जानिब से उसे मंज़ूर किए जाने के सिर्फ़ एक रोज़ बाद ही ये बयान दिया है जिसके ज़रिया मुल्क की 67 फ़ीसद आबादी को सब्सीडी वाले अनाज के हुसूल को क़ानूनी मौक़िफ़ हासिल होजाएगा।

अपनी बात जारी रखते हुए उन्होंने कहा कि किसानों को आराजियात पानी लेबर और दीगर शोबों में इंतिहाई मुश्किलात का सामना है क्योंकि इन अशिया या अफ़राद की तलब दीगर शोबों में भी बढ़ गई है। किसानों की हालत को बेहतर बनाने मर्कज़ी हुकूमत के इक़दामात का तज़किरा करते हुए उन्होंने कहा कि यू पी ए हुकूमत की अनथक कोशिशों की वजह से ही गुजिश्ता पाँच सालों के दौरान मुल्क में अनाज फल और तरकारी की पैदावार में ख़ातिरख़वाह इज़ाफ़ा हुआ है।

मुश्किल हालात के बावजूद किसानों की अनथक मेहनत ज़ाइद पैदावार और अनाज को बरामद किए जाने का मौक़िफ़ हासिल करने पर उन्होंने किसानों की ज़बरदस्त सताइश की। किसानों की मेहनत को ही मद्द-ए-नज़र रखते हुए हमारी पार्लीमेंट ग़िज़ाई तहफ़्फ़ुज़ बिल को मंज़ूरी दी है।

हुकूमत हमेशा इस बात केलिए कोशां रहती है कि किसानों को बिज्ली सरबराही क़र्ज़ा जात पानी और खाद आसानी से दस्तयाब रहे जबकि गुजिश्ता पाँच सालों के दौरान मुख़्तलिफ़ मसनूआत की क़ीमतें दोगुना होचुकी हैं। किसान भाईयों और बहनों को हर मुम्किना सहूलयात फ़राहम की जाएंगी और ज़राअत के शोबा में हम इतनी ज़्यादा तरक़्क़ी करलींगे कि किसी भी तरक़्क़ी याफ़ता मुल्क से हमारा तक़ाबुल किया जा सकता है।

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