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मुसलमानी दाढ़ी को देख इंडिगो फ्लाइट में बद्सलूक़ी, अंग्रेज़ी अख़बार के सहाफ़ी से हुआ भेदभाव

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लखनऊ से दिल्ली जाने वाली इंडिगो फ्लाइट पर सफ़र कर रहे मिल्ली गज़ट के एडिटर डॉ. ज़फ़रुल इस्लाम को बीती रात मज़हबी प्रोफ़ाइलिंग का सामना करना पडा. फ्लाइट नंबर 6E-633 में सफ़र करने जा रहे एडिटर को लखनऊ एअरपोर्ट पर बद्सलूक़ी का सामना करना पडा. उन्होंने बताया कि इंडिगो फ्लाइट के ग्राउंड स्टाफ़ ने उनके साथ भेदभाव वाला बर्ताव किया. उन्होंने बताया कि सिर्फ़ उन्हीं से अपना हाथ वज़नी पैमाने पे रखने के लिए कहा गया जिसमें उनके हाथ का वज़न 10 किलो से थोड़ा ही ज़्यादा था. वो आदतन कम सामान ले कर चलने के आदि हैं इसलिए उनके पास और कोई सामान नहीं था. उनसे बताया गया कि हैण्ड बैगेज का वज़न 7 किलो से ऊपर नहीं हो सकता. उन्होंने कहा कि कुछ सामान जैसे लैपटॉप वो अपने हाथ में ले सकते हैं लेकिन इस पर भी स्टाफ़ राज़ी नहीं हुआ. स्टाफ़ ने उनके सामने सिर्फ़ एक ही आप्शन रखा और वो था हैण्ड-बैगेज का “चेक-इन“, जिसके लिए डॉ. ज़फ़ारुल इस्लाम राज़ी नहीं थे और उन्होंने एहतिजाज जताया. इसके बाद एक सीनियर स्टाफ़ से उन्हें बात करने के लिए कहा गया और एक सिख सज्जन उनसे बात करने आये लेकिन उन्होंने भी वही बातें कीं जो उनका जूनियर स्टाफ़ कर रहा था. एडिटर ने ऐतराज़ जताया कि कई लोग उनसे भारी बैग लिए हैं और यहाँ तक कि बहुत से एक हैण्ड-बैगेज से ज़्यादा लिए हैं, यहाँ तक कि बहुत से लोग तीन तीन बैगेज लिए हैं लेकिन इंडिगो स्टाफ़ इस पर भी मानने को राज़ी न हुआ और उन्हें कुछ सामान एक ग़ैर-महफ़ूज़ जगह पे रखना पडा.दिल्ली पहुँचने के बाद उन्होंने इंडिगो के ग्राउंड स्टाफ़ से अपनी शिकायत दर्ज करायी.उन्होंने अपनी शिकायत में कहा कि उनके साथ दाढ़ी की वजह से भेदभाव किया गया जबकि कई दुसरे मुसाफ़िर उनसे भारी हैण्ड-बैगेज लिए थे, कई तो एक से ज़्यादा हैण्ड-बैगेज लिए थे. उन्होंने कहा कि ई-टिकट पे ऐसा कहीं नहीं लिखा कि सिर्फ़ सात किलो का ही हैण्ड बैगेज ले जाया जा सकता है.

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