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मुसलमानों का मसला वजूद का नहीं बल्कि हुकुक का है : अबुल कलाम कासमी

पटना : मौलाना अबुल कलाम कासमी शमसी चेयरमैन सोशल एसोसिएशन फॉर एजुकेशनल एंड देवलोपमेंट ने प्रेस रिलीज़ में में कहा है की बिहार में इंतिख़ाब करीब है। ऐसे मौके पर मुसलमानों को बहौसला बनाने की ज़रूरत है। जबकि कुछ मुस्लिम काएदीन बिहार में खौफ की सियासत कर रहे हैं।

ऐसा लगता है की फिरका परस्त ताकतों का खौफ उनके जेहन पर सवार हो गया है। और वो हद दर्जा मरऊब हैं। जबकि मुस्लिम कियादत को खुद मजबूत होने और मुसलमानों को मजबूत करने की ज़रूरत है। मजबूत होने के लिए मुस्लिम मुफादात को मुकदम रखना ज़रूरी है। मुस्लिम कायदीन मुखतलिफ़ पार्टियों में हैं। सभी अपनी अपनी पार्टियों की कियादत करते हैं। मुसलमानों की कियादत से दूर हैं, इस लिए मुसलमानों में मजबूत कियादत की कमी महसूस की जाती है।

इंतिख़ाब के वक़्त सभी अपनी अपनी पार्टियों की बात करते हैं। जिसकी वजह से मुस्लिम इत्तिहाद को नुकसान पहुंचता है और मुसलमानों की सफों में इंतिशार पैदा हो जाता है। और वो बेहद कीमती होने के बावजूद बे कीमत हो जाते हैं। मौलाना सैयद अर्शद मदनी ने अपनी तक़रीर में मुसलमानों का मसला वजूद का नहीं है, बल्कि हुकुक का है। वजूद की लड़ाई हम लड़कर कामयाब हो चुके हैं। हमारे अकबीर ने वजूद की लड़ाई लड़कर इस मुल्क में हमारे वजूद को मुस्तहकिम बना दिया है। कोई ताक़त हमारे वजूद को चेंज नहीं कर सकती है। अलबत्ता इस मुल्क में हमें वो हुकुक नहीं मिले जो हमें मिलना चाहिए। मौलना मदनी की तक़रीर मुस्लिम कायदीन के लिए मुशाईल राह है। इस सूबे में हमें अपने हुकुक और मसायल को हल कराने के लिए खौफ की सियासत से बाहर आगर बाहौसला बनने की ज़रूरत है। इसके लिए अपनी सफों में इत्तिहाद पैदा करने के ज़रूरत है।

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