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मुसलमानों की तालीमी तरक़्क़ी के लिए यू पी ए हुकूमत की मुतअद्दिद स्कीमात

नई दिल्ली, 26 जून: (सियासत न्यूज़) तालीम पर अगरचे इम्तेहानात से क़ब्ल तलबा अपनी तवज्जा मर्कूज़ करते हैं लेकिन मुल्क के बदलते हुए सियासी पस-ए-मंज़र में अब सियासी जमातें इंतेख़ाबात से क़ब्ल तालीम पर तवज्जा मर्कूज़ करने लगी हैं।

नई दिल्ली, 26 जून: (सियासत न्यूज़) तालीम पर अगरचे इम्तेहानात से क़ब्ल तलबा अपनी तवज्जा मर्कूज़ करते हैं लेकिन मुल्क के बदलते हुए सियासी पस-ए-मंज़र में अब सियासी जमातें इंतेख़ाबात से क़ब्ल तालीम पर तवज्जा मर्कूज़ करने लगी हैं।

ग़ालिबन यही वजह है कि कांग्रेस भी अब मुसलमानों की तालीम पर तवज्जा देने लगी है क्योंकि गुजरात के चीफ़ मिनिस्टर नरेंद्र मोदी को बी जे पी में बिलवास्ता तौर पर वज़ारत-ए-उज़मा के उम्मीदवार के तौर पर पेश किए जाने के बाद मुलक में नई सियासी शीराज़ा बंदी हो रही है, जिसमें क़ौमी सरकारी आदाद-ओ-शुमार के मुताबिक़ मुल्क की आबादी में शामिल 13.4 फ़ीसद मुसलमानों को इस लिए भी बादशाह गिर का मौक़िफ़ हासिल होगया है कि माज़ी के बरख़िलाफ़ अब कोई वाहिद सयासी जमात मर्कज़ में हुकूमत तशकील नहीं दे सकेगी और अक्सर रियास्तों में इलाक़ाई जमातों का मौक़िफ़ मुस्तहकम हो गया है।

इन हालात 29 ता 32 फ़ीसद वोट हासिल करने वाली कोई क़ौमी जमआत मर्कज़ में वाहिद सियासी जमआत बन कर उभर सकती है जो इक्तेदार पर दावा भी कर सकती है। चुनांचे कांग्रेस ना सिर्फ़ 2014 के आम इंतेख़ाबात बल्कि इस साल के अवाख़िर के दौरान मध्य प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में होने वाले असेम्बली इंतेख़ाबात पर नज़र रखते हुए मुस्लिम वोटरों को अपनी तरफ़ राग़िब करने की कोशिशों में मज़ीद शिद्दत पैदा कर दी है चूँकि मुसलमान ही कांग्रेस का कलीदी वोट बैंक हैं और वो चाहती है कि मुसलमानों को समाजी-ओ-मआशी शोबों में तरक़्क़ी देने के लिए बुनियादी तौर पर मुसलमानों की तालीम पर तवज्जा देने की ज़रूरत है।

इस तरह मुसलमानों की तरक़्क़ी के लिए सिलसिलावार इक्दामात तजवीज़ किए गए हैं, जिन में मुसलमानों की ग़ालिब आबादी वाले अज़ला में मुख़्तलिफ़ सरकारी स्कीमात के दायरा कार को तक मुम्किना वुसअत देना भी शामिल है। नीज़ कम मुराआत याफ़ता मुस्लिम तलबा को इंजीनीयरिंग कॉलेजों में दाख़िलों के लिए तर्बीयत देना और मुस्लिम ख़वातीन के लिए फ़रोग़ क़ियादत प्रोग्राम शामिल है।

कांग्रेस की ज़ेर-ए-क़ियादत मर्कज़ी यू पी ए हुकूमत मुसलमानों की हमागीर तरक़्क़ी के लिए 2006 में पेश करदा सचर कमेटी की सिफ़ारिशात की बुनियाद पर काम कर रही है, जिस के मुताबिक़ मरकज़ की दो अहम वज़ारतों, फ़रोग़ इंसानी वसाइल और अक्लीयती बहबूद को मुतहर्रिक कर दिया है।

ये दोनों वज़ारतें मुसलमानों की तालीमी तरक़्क़ी के लिए मुख़्तलिफ़ इक्देमात कर रही हैं। बिलख़सूस ज़हीन और होनहार ग़रीब मुस्लिम तलबा ओ- तालिबात को आई आई टी, आई आई एम इम्तेहानात के लिए तैयार करने के लिए बिहार के एक मुस्लिम आलम दीन की तरफ़ से शुरू करदा प्रोग्राम रहमानी 30 के ख़ुतूत पर इन दोनों वज़ारतों ने मुल्क भर में उसे 100 ग़रीब मुस्लिम लड़के , लड़कीयों का इंतेख़ाब करने का फ़ैसला किया है जो ज़हीन, होनहार हैं और आई आई टी इम्तेहानात में हिस्सा लेना चाहते हैं।

इन दो वज़ारत से वाबस्ता दो आला ओहदेदारों ने अपने नाम मख़फ़ी रखने की शर्त पर इस प्रोग्राम का इन्किशाफ़ किया। एक ओहदेदार ने कहा कि मुसलमानों की तालीमी तरक़्क़ी को हुकूमत की अव्वलीन तर्जीहात में शामिल है। चुनांचे इस मेकानिज़्म को जल्द रूबा अमल लाने के लिए दोनों वज़ारतें शब-ओ-रोज़ सरगर्म हैं।

वज़ारत फ़रोग़ इंसानी वसाइल और वज़ारत अक्लीयती बहबूद का आख़िरी अहम मुशतर्का इजलास 10 जून को मुनाक़िद हुआ था। बावसूक़ सरकारी ज़राए ने कहा है कि मुसलमानों की काबिल लिहाज़ आबादी वाली 9 रियासतों में वज़ारत अक्लीयती उमूर की जानिब से आइन्दा चंद माह के दौरान 9 इक़ामती तर्बीयती इदारे क़ायम किए जाएंगे, जिन की कामयाबी की सूरत में मुल्क की तमाम 35 रियासतों और मर्कज़ी ज़ेर‍ ए‍ इंतेज़ाम इलाक़ों में ऐसे इदारा जात क़ायम किए जाऐंगे, जहां हर इदारा के लिए मुंतख़ब 100 ज़हीन मुस्लिम लड़के लड़कीयों को मुफ़्त रिहायश, ग़िज़ा, तालीम-ओ-तर्बीयत की सहूलत हासिल रहेगी और आई आई टी, आई आई कट और सिविल सर्विस इम्तेहानात के लिए ख़ुसूसी तालीम-ओ-तर्बीयत दी जाएगी।

ये तजावीज़ अगरचे पुरकशिश और बावक़ार नज़र आती हैं जिन पर रूबा अमल लाना अगरचे नामुमकिन नहीं तो कम से कम इंतिहाई दुशवार ज़रूर होगा। इब्तिदाई मरहला में आसाम, बिहार, उत्तरप्रदेश और मग़रिबी बंगाल में इस प्रोग्राम पर अमल आवरी होगी। 2011 की मर्दुमशुमारी रिपोर्ट के मुताबिक़ हिंदुस्तान की 1.2 अरब आबादी में 13.4 फ़ीसद मुसलमान हैं।

जम्मू-ओ-कश्मीर हिंदुस्तान की वाहिद मुस्लिम अक्सरीयती रियासत है। सच्चर कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक़ मुल्क में 6 ऐसी रियासतें हैं जहां मुसलमानों की आबादी का फ़ीसद, मुल्क की फ़ौजी आबादी के फ़ीसद 13.4 से ज़्यादा है। मुसलमानों की आबादी आसाम में 30.9 फ़ीसद, मग़रिबी बंगाल में 25.2 फ़ीसद, केरला में 24.6 फ़ीसद, उत्तरप्रदेश में 18.55 फ़ीसद, बिहार में 16.5 फ़ीसद और झारखंड में 13.8 फ़ीसद है।

सरकारी आदाद के मुताबिक़ आला तालीम हासिल करने वाली आबादी में मुसलमानों का फ़ीसद 10 से भी कम है। सच्चर कमेटी के मुताबिक़ आला सरकारी ओहदों पर मुसलमान का तनासुब बराए नाम है। उत्तरप्रदेश एडमिनिट्रेटिव सर्विस (आई ए एस) में 3 फ़ीसद मुलसमान हैं।

इंडियन फ़ौरन सर्विस (आई एफ़ एस) में सिर्फ़ 1.8 फ़ीसद और इंडियन पुलिस सर्विस (आई पी एस) में सिर्फ़ 4 फ़ीसद मुसलमान हैं। मज़ीद बरआं अक्सर मुसलमान जो हकूमत-ए-हिन्द के आला सरकारी ओहदों तक रसाई हासिल कर चुके हैं बिलउमूम तरक़्क़ी याफ़ता उम्मीदवार की हैसियत से वहां तक पहूंच पाए हैं। माबक़ी इम्तेहानात के ज़रीया रास्त रसाई हासिल करने वालों में मुसलमानों का हिस्सा आई ए एस में सिर्फ़ 2.4 फ़ीसद, आई एफ़ एस में 1.9 फ़ीसद और आई पी एस में 2.3 फ़ीसद रहा है।

इस तरह आला तालीम में मुस्लिम तलबा का फ़ीसद नहीं के बराबर है, जिसकी मिसाल आई आई एम है जिस में सिर्फ़ 2 फ़ीसद मुस्लिम तलबा हैं। अगरचे इब्तिदाई-ओ-सानवी तालीम में मुस्लमानों की तालीमी हालत क़दरे बेहतर है। वज़ारत फ़रोग़ इंसानी वसाइल की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ इब्तिदाई तालीमी सतह पर मुस्लिम बच्चों के दाख़िले 2005 06 में 9.35 फ़ीसद थे जो 2011 12‍ में 13.31 फ़ीसद तक बढ़ गए।

जिस के बावजूद प्राइमरी स्कूलों में मुस्लिम बच्चों के दाख़िलों का ये फ़ीसद दरहक़ीक़त 90 फ़ीसद क़ौमी औसत से बहुत कम है। वज़ारत अक्लीयती उमूर मुस्लिम ख़वातीन में क़ाइदाना सलाहीयतों को उभरने और ज़िंदगी के गुज़र बसर के वसाइल पैदा करने नई रोशनी से मौसूम एक प्रोग्राम शुरू कर रही है।

इस मुहिम में वज़ारत अक्लीयती उमूर ख़ानगी इदारों से भी तजावीज़ तलब की है। मुसलमानों को लुभाने की इन कोशिशों पर बी जे पी भी खुले आम मुख़ालिफ़त ना करते हुए मुहतात मौक़िफ़ इख़तियार किया है। बी जे पी के एक सरकरदा लीडर ने कहा कि बाज़ाब्ता तौर पर सरकारी फ़ैसले के ऐलान के बाद ही कोई तब्सिरा किया जा सकता है लेकिन बी जे पी चाहती हैकि बिलाइम्तियाज़ मज़हब-ओ-ज़ात पात तमाम तबक़ात की तरक़्क़ी के लिए मुसबत इक्दामात करने की ज़रूरत है।

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