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मुसलमानों के वोट पर नजर जमाने वाली राजनीतिक पार्टियां ‘समान नागरिक संहिता’ पर चुप क्यों?

मुंबई: तीन तलाक का विरोध करने वाली महिलायें भी अब भाजपा के खिलाफ खुलकर सामने आ गई हैं। तीन तलाक के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप करने वाली भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन नामक संगठन ने भाजपा पर सख्त आलोचना करते हुए समान नागरिक संहिता के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया है। वहीं उलेमा और बुद्धिजीवियों ने भी समान नागरिक संहिता के विरोध में धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक दलों की चुप्पी पर सवालिया निशान लगाया है।

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न्यूज़ नेटवर्क समूह प्रदेश 18 के अनुसार बुद्धिजीवियों का कहना है कि चुनाव में मुसलमानों के वोट पर नजर रखने वाली राजनीतिक पार्टियां समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर चुप क्यों हैं?
भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन संगठन तीन तलाक के खात्मे के अभियान का हिस्सा बनी हुई है। इस संगठन ने सायरा बानो के साथ सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप भी किया है। भारतीय मुस्लिम आन्दोलन का कहना है कि तीन तलाक के नाम पर भाजपा सरकार की राजनीति से मुस्लिम महिलाओं का नुकसान हो रहा है। भारतीय मुस्लिम महिला आन्दोलन ने मोदी सरकार से समान नागरिक संहिता के नाम पर राजनीति न करने की अपील की है।
उधर तीन तलाक के मामले पर मुस्लिम समाज की ओर से दबाव बढ़ता जा रहा है। उलेमा मोदी सरकार से तीन तलाक के अंत के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए गए हलफनामे को वापस लेने की मांग करहे हैं।
उलेमा का कहना है कि तीन तलाक का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, फिर भी राजनीतिक दल इसे राजनीतिक रंग देने से नहीं चौंक रही है। अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर केंद्रित हैं।

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