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मुसलमानों के साथ हो रहे इम्तियाज़ी सुलूक को दूर करे मोदी सरकार: हामिद अंसारी

नई दिल्ली: नायब सदर जम्हूरिया हामिद अंसारी ने मोदी सरकार से मुस्लिम मआशरे से हो रहे मुबय्यना तौर पर इम्तियाजी सुलूक की गलती को सुधारने को कहा है। उन्होंने कहा है कि हिंदुस्तानी मुसलमानों को अपनी पहचान, सेक्युरिटी, तालीम और Empowerment बरकरार रखने और फैसला लेने के अमल में परेशानी आ रही है।

मुसलमानों को आ रही परेशानियों पर हुकूमत को संज़ीदा होना चाहिए और इसे दूर करने के लिए मुसबत कदम उठाने चाहिए।

हामिद अंसारी ने मोदी सरकार के सबका साथ सबका विकास की तर्ज पर मुसलमानों की पहचान और सेक्युरिटीको मजबूत करने की मांग की है।

नायब सदर जम्हूरिया ने मुल्क में मुसलमानों के सामने मौजूद पहचान और सेक्युरिटी के मसले को हल करने के लिए हिकमत अमली बनाने की जोरदार वकालत की और सबकी तरक्की की पालिसी पर चल रही हुकूमत से इस ताल्लुक में ठोस कार्रवाई करने के लिए कहा।

उन्होंने कहा कि सेक्युरिटी मुहैया कराने में नाकान समेत बायकाट व इम्तियाजी सुलूक के ताल्लुक में हुकूमत की तरफ से ज़ल्द से जल्द सुधार किया जाए और उसके लिए मुनासिन इंतेज़ाम किया जाए।

मुल्क में मुसलमानों का बडा तबका अब भी हाशिये पर है। मुसलमानों की तरक्की के कई मंसूबे बने, लेकिन अब उस पर अमल भी होना चाहिए। नायब सदर जम्हूरिया अंसारी ने मोदी सरकार के सरकारी मकसद “सबका साथ सबका विकास” की तर्ज पर मुसलमानों की पहचान और सेक्युरिटी से जुडी परेशनियों के हल के लिए मुसबत कदम उठाए जाने की मांग की।

अंसारी ने कहा कि जहां तक मरहूम रखने, बाहर करने और इम्तियाज़ी सुलूक (सेक्युरिटी मुहैया कराने में नाकाम समेत) का सवाल है, सरकार या उसके एजेंटों की चूक सरकार को ही जल्द से जल्द सुधारनी है और उसके लिए मुनासिब इंतेज़ाम फराहम की जाए।

हामिद ने कहा कि Empowerment, सरकारी प्रापर्टी में यकसां हिस्सेदारी और फैसला लेने के अमल में मुंसिफाना हिस्सेदारी जैसे मुद्दे, जो मुसलमानों के सामने हैं, हल करने के लिए हिकमत अमली फराहम करना चुनौती है।

उन्होंने कहा कि सामाज़ मे अमन के लिए सियासी सनक जरूरी है। सेक्युलर सियासत के तहत रह रहे ज़्यादातर मुस्लिम अक्लियतों का हिंदुस्तान का तजुर्बा दिगर के लिए अमल का मॉडल होना चाहिए।

मुल्क की 14% आबादी मुस्लिम हैं। मुस्लिम फिर्के के बहबूद के लिए सच्चार समिति की रिपोर्ट पर अमल का जायज़ा के लिए बनी कुंद्रू रिपोर्ट पिछले साल सितंबर में सौंपी गई थी। इसमें जोर देकर कहा गया है कि मुस्लिम अक्लियतों की तरक्की सेक्युरिटी के ज़ज़्बे की बुनियाद पर टिका होना चाहिए।

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