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मुसलमानों को रिज़र्वेशन (आरक्षण) और उर्दू मीडियम स्कूल खोले जाएं : शाही इमाम

शाही इमाम मस्जिद फ़तह पूरी दिल्ली मुफ़्ती मुहम्मद मुकर्रम अहमद साहब ने हकूमत-ए-हिन्द से पुरजोर मुतालिबा किया कि आईनी (वैध/कानूनी) तक़ाज़ों को पूरा करते हुए मुसलमानों को जल्द अज़ ( से) जल्द रिज़र्वेशन ( आरक्षण) दे और क़ानूनी पेचीदगीयों को

शाही इमाम मस्जिद फ़तह पूरी दिल्ली मुफ़्ती मुहम्मद मुकर्रम अहमद साहब ने हकूमत-ए-हिन्द से पुरजोर मुतालिबा किया कि आईनी (वैध/कानूनी) तक़ाज़ों को पूरा करते हुए मुसलमानों को जल्द अज़ ( से) जल्द रिज़र्वेशन ( आरक्षण) दे और क़ानूनी पेचीदगीयों को दूर करने शाही इमाम साहब ने फ़रमाया कि हुकूमत के पास क़ानून के माहिरीन की कोई कमी नहीं है फिर इतनी बोग्स कार्रवाई की गई कि सुप्रीम कोर्ट इससे मुतमईन नहीं हो सका ।

इससे मुस्लिम मसाइल ( समस्यायें) में हुकूमत की ग़ैर संजीदगी का अंदाज़ा होता है । जस्टिस सचर कमेटी और जस्टिस रंगा नाथ मिश्रा की रिपोर्टों और सिफ़ारिशात पर सिर्फ और सिर्फ मुसलमानों को रिज़र्वेशन(आरक्षण) दिलाया जाए या दफ़ा 391 में मुसलमानों को शामिल कर लिया जाए ।

3 सालों से चल रही नाइंसाफ़ी को हुकूमत जल्द दूर करे । शाही इमाम साहब ने हुकूमत की तरफ़ से चल रही उर्दू ज़बान के साथ नाइंसाफ़ी का ज़िक्र करते हुए हकूमत-ए-हिन्द और वज़ारत फ़रोग़ इंसानी वसाइल (HRDM) से पुरज़ोर मुतालिबा किया कि 1951से चल रही इस नाइंसाफ़ी को भी जल्द दूर कराया जाए ।

सुभाष चन्द्र बोस का नारा इंक़लाब ज़िंदाबाद उर्दू ज़बान का था । आज़ादी उर्दू ज़बान में लड़ी गई मुंशी प्रेम चंद जैसे ही कितने अदीब और शायर ग़ैर मुस्लिम थे और हैं लेकिन सरकारी ज़बानों का एक्ट (Act/ अधिनियम) बनाकर उर्दू को किनारे लगा दिया गया । तालीमी रूल्स के मुताबिक़ किसी भी क़ौम के बच्चों को मादरी ज़बान में तालीम दी जाती है ।

आज उर्दू दां तबक़ा के लिए उर्दू मीडियम स्कूल नहीं खोले जा रहे हैं । उर्दू मज़ामीन ( समूह) के असातिज़ा ( शिक्षकगण) का तक़र्रुर नहीं किया जा रहा है । दिल्ली और दूसरी रियास्तों ( राज्यों) का यही हाल है हुकूमत (सरकार) इस लिसानी (भाषा से संबंधित) नाइंसाफ़ी को दूर करे ।

उन्होंने कहा कि एतवार 17 जून को शब ए मेराज है मुसलमानों से गुज़ारिश है कि वो फ़ुज़ूल वक़्त बर्बाद करने के बजाय इबादतों में मशग़ूल रहें । ख़ुसूसी तौर पर नौजवान तबक़ा जो सड़कों और गलीयों में शोर-ओ-गुल करते है उन्हें ऐसी हरकतों से बाज़ रहना चाहीए ताकि किसी को शिकायत का मौक़ा ना मिले।

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