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मुसलमानों को सेना में दाढ़ी रखने की इजाजत नहीं !!

नई दिल्ली:  दाढ़ी बढाने के धार्मिक आधार पर भारतीय सेना से हटा दिए गए पूर्व मुस्लिम सैनिक मकतुम हुसैन में इस सन्दर्भ में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। लेकिन मकतुम की इस याचिका को स्वीकार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है। जिसकी वजह उन्होंने यह बताई है कि भरतीय सेना में कार्यरत सैनिक सर्विस के दौरान दाढ़ी नहीं बढ़ा सकते। आपको बता दें कि मकतुम को भारतीय सेना से निकाल देने की वजह यही थी की उन्होंने ड्यूटी के दौरान दाढ़ी बढ़ाई थी। सुप्रीम कोर्ट में नयचिका डालने से पगले मकतुम ने कर्नाटक हाई कोर्ट में अपील की थी जहाँ से उन्हें निराशा ही हाथ आई थी।

आपको बता दें की ये मामला है साल 2001 का जब मकतुम हुसैन ने अपने कमांडिंग अफसर से सर्विस के दौरान दाढ़ी बढाने की इजाजत मांगी थी और शुरुआत में उनकी ये मांग स्वीकार कर भी ली गई थी लेकिन बाद कमांडिंग अफसर ने उन्हें कहा की नियमों के मुताबिक सिर्फ सिख सैनिकों को ही दाढ़ी बढ़ाने की इजाजत है और दी गई अनुमति वापिस ले ली। जब मकतुम ने इस भेदभाव के खिलाफ कर्नाटक हाइकोर्ट में याचिका डाली तो  तो वहां से उनका ट्रांसफर कर पुणे कमांड अस्पताल में भेज दिया गया और जब वहां पर भी उनके कमांडिंग अफसर ने उन्हें दाढ़ी काटने के लिए कहा तो मकतुम पर दाढ़ी न काटने की जिद्द पर अड़ गए।  जिसके चलते उन्हें सेना से निकाल दिया गया।

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