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मुसल्मान , मुहम्मद अबदुल्क़दीर को किसी सूपर स्पेशयालीटी हॉस्पिटल में ईलाज करवाने तैयार

* रोज़नामा सियासत में दर्दनाक ख़बर की इशाअत पर मिल्लत के दिल तड़प उठे * ख़ानगी दवाख़ाना मुंतक़िल करने की इजाज़त देने हुकूमत से जनाब ज़ाहिद अली ख़ान का मुतालिबा

* रोज़नामा सियासत में दर्दनाक ख़बर की इशाअत पर मिल्लत के दिल तड़प उठे
* ख़ानगी दवाख़ाना मुंतक़िल करने की इजाज़त देने हुकूमत से जनाब ज़ाहिद अली ख़ान का मुतालिबा
हैदराबाद ( सियासत न्यूज़ ) पूर्व‌ कांस्टेबल मुहम्मद अबदुल्क़दीर को उन के हाल पर मरने के लिए नहीं छोड़ा जा सक्ता । मुसल्मान अपनी क़ौम के एक शख़्स की हालत पर आंखें बंद करके ख़ामोश तमाशाई नहीं रह सकते और वो इन का ख़ुद ईलाज करवाने को तैयार हैं इस के लिए हुकूमत की सहायता की ज़रूरत नहीं है ।

रियास्ती हुकूमत और जेल का महकमा उन के पैर के ज़ख्म का जिस तरह से सरकारी दवाख़ाना में ईलाज करवा रहा है इस के
नतीजा में या तो इस का पैर काट्ने की नौबत आ जाएगी या फिर वो इस ज़ख्म की वजह से घल घल कर मौत के मुंह में चले जाएंगे । ज़रूरत इस बात की है कि इन के पैर का किसी ख़ानगी सुपर या मल्टी स्पेश्यालीटी हॉस्पिटल में ईलाज करवाया जाए ।

एडीटर सियासत जनाब ज़ाहिद अली ख़ां ने मुसल्मानों की जानिब से अबदुल्क़दीर के पैर के ज़ख्म का किसी स्पेश्यालीटी हॉस्पिटल में ईलाज करवाने की पेशकश करते हुए रियासती हुकूमत से मुतालिबा किया है कि मुहम्मद अबदुल्क़दीर को ख़ानगी हॉस्पिटल मुंतक़िल करने की इजाज़त दी जाए या फिर उन्हें फ़ौरी रिहा किया जाए ताकि उन का ईलाज मुम्किन होसके ।

आज जब रोज़नामा सियासत में अबदुल्क़दीर की इंतिहाई तशवीशनाक सेहत और उन की मायूसी से मुताल्लिक़ ख़बर की इशाअत हुई और रोज़नामा सियासत की वेब साईट पर जब उन से मुलाक़ात और उन के ज़ख़मों से मुताल्लिक़ वीडियो अपलोड किया गया हज़ारों की तादाद में क़ारीईन और अवाम ने अपने ख़्यालात का इज़हार किया । सैंकड़ों अफ़राद ने दफ़्तर सियासत को फ़ोन करते हुए अबदुल्क़दीर की हालत पर तशवीश ज़ाहिर करते हुए उन के ईलाज में हर तरह के तआवुन की पेशकश कि ।

एडीटर सियासत जनाब ज़ाहिद अली ख़ां ने अपने एक ब्यान में रियासती हुकूमत से मुतालिबा किया है कि वो क़दीर की हालत के पेश नज़र उन्हें किसी ख़ानगी मल्टी स्पेश्यालिटी हॉस्पिटल मुंतक़िल करने और वहां ईलाज करवाने की इजाज़त दे । अगर क़दीर को मौजूदा हाल पर छोड़ दिया जाता है तो वो अपने एक पैर से महरूम हो सक्ते हैं या फिर ईलाज के बगैर घल घल कर मौत के मुंह में जा सकते हैं। ये इंतिहाई तकलीफ दह अमल है । अबदुलक़दीर के पैर के ज़ख़मों की ये हालत है कि अगर इन ज़ख़मों की सफ़ाई की कोशिश की जाए तो हाथ ख़ुद ज़ख़म के अंदर चला जाता है । इस तरह पैर में काफ़ी बड़े सूराख़ होगए हैं और सरकारी दवाख़ाना में इन का ख़ातिरख़वाह ईलाज मुम्किन नहीं है । अबदुलक़दीर की बज़ात-ए-ख़ुद एसी हालत नहीं है कि वो अपने ईलाज-ओ-मुआलिजा पर होने वाले भारी इख्राजात बर्दाश्त कर सकें । उन्हें भारी अदवियात और इंजेक्शन वगैरह की ज़रूरत है जिसे वो ख़ुद पूरा करने से क़ासिर हैं ।

जनाब ज़ाहिद अली ख़ां ने बताया कि अबदुल्क़दीर के ईलाज के लिए कई दर्द मंदान ए मिल्लत ने तआवुन करने की पेशकश की है और वो ख़ानगी दवाख़ाना में उन के ईलाज के इख्राजात बर्दाश्त करेंगे । जनाब ज़ाहिद अली ख़ां ने कहा कि हुकूमत को चाहीए कि वो फ़ौरी क़दीर को किसी ख़ानगी दवाख़ाना को मुंतक़िल करने की इजाज़त दे ताकि उन का बेहतर ईलाज मुम्किन होसके या फिर उन्हें फ़ौरी रिहा कर दिया जाए । कई अफ़राद ने इंटरनेट पर वीडियो फूटेज देखने के बाद तब्सरे किए हैं कि इन के ज़ख़म की जो हालत है उसे देखना भी मुम्किन नहीं है । इंतिहाई सख़्त और पत्थर दिल अफ़राद के दिल भी उसे देख कर पसीज जाते हैं लेकिन अफ़सोस की बात है कि हुकूमत और जेल का महकमा इस ताल्लुक़ से लापरवाही का मुज़ाहरा कर रहा है ।

आज रोज़नामा सियासत में क़दीर से मुताल्लिक़ ख़बर की इशाअत पर सारे शहर और बैरून मुल्क भी मुक़ीम हैदराबादियों ने अपने शदीद जज्बात का इज़हार करते हुए हुकूमत से मुतालिबा किया है कि सज़ा की तकमील होचुकी है लिहाज़ा अबदुलक़दीर को रिहा किया जाए । आज सारे शहर में अबदुल्क़दीर की हालत-ए-ज़ार का ही तज़किरा रहा । अवाम एक दूसरे को इस ताल्लुक़ से आगाह करते देखे गए और सैंकड़ों अफ़राद ने दफ़्तर सियासत को फ़ोन करते हुए मज़ीद मालूमात हासिल करने की कोशिश की और क़दीर की हालत पर बे चीनी का इज़हार किया है ।

जनाब ज़ाहिद अली ख़ां ने कहा कि हुकूमत अगर क़दीर को किसी ख़ानगी हॉस्पिटल मुंतक़िल करने की इजाज़त देती है तो मुसल्मान इन का बेहतर से बेहतर ईलाज करवाने को तैयार हैं और इस के लिए ख़र्च की कोई फ़िक्र नहीं होगी । क़दीर के ईलाज के लिए मुसल्मान हुकूमत से मदद नहीं चाहेंगे बल्कि ख़ुद अपने बल्बूते पर इन का ईलाज करवाने को तैयार हैं । अब हुकूमत का ये फ़र्ज़ है कि वो क़दीर को किसी ख़ानगी दवाख़ाना मुंतक़िल करते हुए ईलाज करवाने की इजाज़त दे या उन्हें फ़ौरी रिहा करदे ।

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