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मुस्लमानों की मस्जिद पर क़ादयानयों का क़बज़ा

नुमाइंदा ख़ुसूसी-हम ने 15 सितंबर से गैर आबाद मसाजिद को मंज़रे आम पर लाने का एक तवील सिलसिला शुरू किया था । गैर आबाद मस्जिद की तस्वीर मुकम्मल वक़्फ़ रेकॉर्ड के साथ रोज़नामा सियासत में रोज़ाना शाय हुई थी । हमारा ये तारीख़ी इक़दाम बा

नुमाइंदा ख़ुसूसी-हम ने 15 सितंबर से गैर आबाद मसाजिद को मंज़रे आम पर लाने का एक तवील सिलसिला शुरू किया था । गैर आबाद मस्जिद की तस्वीर मुकम्मल वक़्फ़ रेकॉर्ड के साथ रोज़नामा सियासत में रोज़ाना शाय हुई थी । हमारा ये तारीख़ी इक़दाम बाटा सिंगा राम की क़ुतुब शाही मस्जिद पर इख़तताम पज़ीर होगया ।जिस के बाद 11 दिसंबर को एक मुफ़स्सिल इख़ततामी रिपोर्ट आप की ख़िदमत में पेश की गई जिस में ये वाअदा किया गया था कि अगर कोई और गैर आबाद मस्जिद हमारे इलम में आएगी तो आप को सियासत के ज़रीया ज़रूर मतला किया जाएगा । उसी वाअदा के मुताबिक़ एक एसी मस्जिद की रिपोर्ट पेश की जा रही है जो ना सिर्फ गैर आबाद है बल्कि इस के तक़द्दुस को पामाल किया जा रहा है ।

इस मस्जिद के ताल्लुक़ से आप क्या राय रखते हैं जो उसे लोगों के क़बज़ा में हो जो ना सिर्फ काफ़िर बल्कि मुर्तद हैं और वो अपनी बातिल और गैर इस्लामी इबादत इस में करते हूँ और इस के मुक़द्दस घर को तकलीफ पहुंचाते हूँ । किया इसी मस्जिद सिर्फ गैर आबाद होगी या इस के साथ बे हुर्मती की भी शिकार होगी ? क़ुतुब शाही मस्जिद मुत्तसिल फ़लक नुमा रेलवे इस्टेशन जिसे 1614 मैं क़ुतुब शाही छुटे बादशाह अबदुल्लाह क़ुतुब शाही ने तामीर किराया था । जिस के बाद एक तवील अर्सा तक इस में नमाज़ का एहतिमाम होता रहा । ये मस्जिद मुस्लमानों के पास थी । लेकिन कुछ अर्सा से ये मस्जिद कादयानी मुर्तदों के क़बज़ा में है जो मुत्तफ़िक़ा फैसला के मुताबिक़ ख़ारिज अज़ इस्लाम हैं ।

जब कि ये मस्जिद दर्ज वक़्फ़ है इस के तमाम रेकॉर्ड वक़्फ़ की गज़्ट में मौजूद हैं और वो रेकॉर्ड इस तरह है : हैदराबाद / 1723 , फ़लक नुमा इस्टेशन के पीछे मस्जिद (s) , (13) इस का पता इस तरह है : फ़लक नुमा रेलवे इस्टेशन , वार्ड नंबर 18, जुमला अराज़ी 218.7मुरब्बा गज़ , गज़्ट नंबर 22-A और Sl.no.993 है । गज़्ट की तारीख 07-06-1984 , सफ़ानंबर 3 है । ये तफ़सीली वक़्फ़ रेकॉर्ड है जो वक़्फ़ की गज़्ट में आज तक मौजूद है । सूरत मसख़ करना और बदलना आसान है । मगर तारीख बदलना मुश्किल है । इस का तारीख़ी वक़्फ़ रेकॉर्ड बताता है कि ये मस्जिद मुस्लमानों की है और इस पर का दयानी मुर्तदें का क़बज़ा गैर कानूनी है । क़ादयानयों को चाहीए कि फ़ौरन ये मस्जिद मुस्लमानों के हवाले करदें क्यों कि कादयानी या अहमदी फ़िर्क़ा पर उलमाए इस्लाम की तरफ़ से कुफ्र का फ़तवा है ।

ये फ़िर्क़ा इंतिहाई अय्यारी , चालबाज़ी और धोका दही के साथ आंधरा प्रदेश के मुतअद्दिद इलाक़ों में मुनज़्ज़म तौर पर अपनी इर्तिदा दी सरगर्मी जारी रखते हुए हैं । ये अपने आप को मुस्लमान ज़ाहिर करते हैं , क़ादियानियत का ज़िक्र भी ज़बान पर नहीं लाते और मुख़्तलिफ़ तरीकों से अवाम का एतिमाद हासिल करने की कोशिश करते हैं फिर आहिस्ता आहिस्ता क़ादियानियत का ज़हर छोड़ते हैं । फ़लक नुमा रेलवे इस्टेशन के पास मावदे चंद घराने क़ादयानयों के हैं और एक बड़ी आबादी मुस्लमानों की है । जिनकी अक्सरियत गरीब है । ये मुस्लमानों के बच्चों में स्कूली बयाग , किताबें , कॉपियां और स्टेशनरी के सामान तक़सीम कर के मुस्लमानों उन की हमदर्दी और उन का एतिमाद हासिल करते हैं ।

नीज़ मौक़ा बह मौक़ा मुख़्तलिफ़ एशिया-ए-गरीब मुस्लमानों को देते हैं और जब ये गरीब मुस्लमान उन को अपना ख़ैर ख़्वाह समझने लगते हैं तो फिर आहिस्ता आहिस्ता इन में क़ादियानियत की तब्लीग़ करते हैं । नीज़ हर इतवार को मज़कूरा मस्जिद में इन की एक ख़ुसूसी मीटिंग होती है । जिस में ये लोग जमा हो कर अपनी इर्तिदादी सरगर्मियों का जायज़ा लेते हैं और आइन्दा के लिए मंसूबे तै किए जाते हैं और हिदायात जारी की जाती हैं । ताज्जुब और अफ़सोस है वक़्फ़ बोर्ड के अमला पर और उन की ग़फ़लत और लापरवाही पर कि वक़्फ़ बोर्ड की मस्जिद क़ादयानयों के क़बज़ा में है और हनूज़ वक़्फ़ बोर्ड की तरफ़ से कोई नोटिस और किसी तरह का कोई इक़दाम नहीं हो पाया ।

अगर इस तरह से लापरवाही बरती गई तो ये लोग शेर हो जाएंगे और एक दिन वो आएगा कि मुस्लमानों को अपनी वक़्फ़ इमलाक से हाथ धोना पड़ेगा । ज़रूरी है कि वक़्फ़ बोर्ड मुताल्लिक़ा मस्जिद के हवाले से हरकत में आए और मुर तदैयुन के क़बज़ा और पंजे से मस्जिद को छुड़ा कर मुस्लमानों के हवाले करे , ताकि जो अनजुमनें , सोसाइटियां और तनज़ीमें इस हवाले से मुतफ़क्किर और मुतहर्रिक हैं उन्हें इस नाज़ुक मसला के पुरअमन हल की तलाश में सहूलत हो । इस के लिए पहले वक़्फ़ बोर्ड आगे बढ़ कर दख़ल अंदाज़ी करे । क़ारईन हम अब तक इन गैर आबाद मसाजिद को शाय करते रहे जोया तो ख़स्ता हालत में होने की वजह से गैर आबाद थी या बिरादरान वतन के क़बज़ा में थीं । लेकिन इस भीड़ में हमें ये भी मालूम हुआ कि एक मस्जिद एसी भी है जो मुर तदिन क़ादयानयों के क़बज़ा में है । क़ारईन ये कादयानी कितनी अय्यारी के साथ और खु़फ़ीया अंदाज़ में बातिल क़ादियानियत की तब्लीग़ कररहे हैं ।।

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