Tuesday , October 17 2017
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मुस्लमानों के लिए बजट के ख़िलाफ़ मुहिम वक़्त का तक़ाज़ा

उल्मा , अइम्मा -ओ-ख़तीब हज़रात क़ौम में शउर बेदार करें

अक़ल्लीयतों के बजट में अज़ाफ़ा के लिए सैकूलर सयासी जमाअतों को आगे आने की ज़रूरत

12 फीसद आबादी वाली अक़ल्लीयतों को बजट में 2 फीसद हिस्सा भी नहीं

उल्मा , अइम्मा -ओ-ख़तीब हज़रात क़ौम में शउर बेदार करें

अक़ल्लीयतों के बजट में अज़ाफ़ा के लिए सैकूलर सयासी जमाअतों को आगे आने की ज़रूरत

12 फीसद आबादी वाली अक़ल्लीयतों को बजट में 2 फीसद हिस्सा भी नहीं

सच्चर कमेटी की जानिब से दलितों से बदतर क़रार दीए जाने वाली क़ौम बजट में भी दलितों से काफ़ी पीछे

मुस्लमानों केलिए मुख़तस करदा बजट के मुताअल्लिक़ पेश करदा हक़ायक़ पूरी क़ौम को झिनजोड़ने के लिए काफ़ी हैं। सेयासी जमाअतों की जानिब से इक़तिदार हासिल करने से क़बल मुस्लमानों से उन की तरक़्क़ी-ओ-फ़लाह-ओ-बहबूद के बेशुमार वाअदे ज़रूर किए जाते हैं लेकिन जब इक़तिदार हासिल होजाता है और वादों पर अमल आवरी का वक़्त आता है तो एसी सूरत में हुकूमत किया इक़दाम करती है, इस का अंदाज़ा दर्ज फ़हरिस्त तबक़ात , दर्ज फ़हरिस्त क़बाइल और अक़ल्लीयतों केलिए मुख़तस करदा बजट में मौजूद तफ़ावुत(फरक) से बा आसानी लगाया जा सकता है ।

जनाब सय्यद तारिक़ कादरी ऐडवोकेट , जनाब अला उद्दीन अंसारी ऐडवोकेट ने उर्दू अख़बारात के ऐडीटर जनाब ख़ान लतीफ मुहम्मद ख़ान , जनाब ज़ाहिद अली ख़ां और जनाब सय्यद वेक़ार उद्दीन कादरी को मुबारकबाद पेश करते हुए अख़बारात की जानिब से बजट के मुताअल्लिक़ शुरू करदा मुहिम का ख़ैरमक़दम करते हुए इन ख़्यालात का इज़हार किया। जनाब सय्यद तारिक़ कादरी ने बताया कि हुकूमत की नज़र में मुस्लिम तबक़ा की अहमियत का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि 12 फीसद आबादी वाली इस क़ौम के लिए बजट सिर्फ 300 करोड़ रुपय का है जबकि 16.19% आबादी वाली दर्ज फ़हरिस्त अक़्वाम केलिए हुकूमत 2357 करोड़ रुपय मुख़तस किए हैं।

इलावा अज़ीं 6.59 फीसद आबादी वाली क़ौम दर्ज फ़हरिस्त क़बाइल 1230 करोड़ रुपय का बजट हासिल कर रही हैं । उन्हों ने बताया कि सच्चर कमेटी और रंगनाथ मिश्रा कमीशन रिपोर्टस के मंज़रे आम पर आने के बावजूद हुकूमत की जानिब से बजट की तख़सीस के दौरान रवा सुलूक से एसा महसूस होता है कि हुकूमत मुस्लमानों को रुसवा करने केलिए सच्चर कमेटी की दहाई देती है। जनाब सय्यद तारिक़ कादरी ने उल्मा, अइम्मा -ओ-ख़तीब हज़रात से अपील की कि वो मुस्लमानों को बजट के मुताअल्लिक़ हक़ायक़ से वाक़िफ़ करवाएं ताकि आम मुस्लमान अपने हक़ के लिए हुकूमत से मुतालिबा करने का अहल बन सके।

उन्हों ने बताया कि अक़ल्लीयतों केलिए मुख़तस किए जाने वाले बजट के ख़र्च के मुताअल्लिक़ भी गुज़श्ता कई बरसों से इस बात की शिकायत आम है कि जितना बजट मुख़तस किया जाता है , इस में तकरीबन 20 फीसद से ज़ाइद बजट वापिस हुकूमत के खज़ाने में चला जाता है। जनाब मुहम्मद इला-ए-अलुद्दीन अंसारी ऐडवोकेट ने बताया कि जब तक हम अपने आईनी हुक़ूक़को मनवाने केलिए जमहूरी हक़ का इस्तिमाल नहीं करते , उस वक़्त तक हमारी तरक़्क़ी, फ़लाह-ओ-बहबूद को यक़ीनी नहीं बनाया जा सकता।

उन्हों ने भी रियासत भर के उल्मा , अइम्मा -ओ-ख़तीब हज़रात से अपील की कि वो जुमा के दिन अपने ख़ुत्बों के दौरान मुस्लमानों के हालात की अक्कासी करते हुए उन्हें बाशऊर बनाएं ताकि मुस्लमान हुकूमत से अपना हक़ हासिल करते हुए सूद की लानत से महफ़ूज़ रहने की सिम्त क़दम उठा सकें। वाज़ेह रहे कि गुज़श्ता यौम उर्दू अख़बारात में पसमांदा तबक़ात , दर्ज फ़हरिस्त अक़्वाम , दर्ज फ़हरिस्त क़बाइल और अक़ल्लीयतों के बजट के दरमियान तफ़रीक़ से मुताअल्लिक़ इश्तिहार शाय करते हुए एक मुहिम का आग़ाज़ किया है।

ताकि क़ौम की तरक़्क़ी , फ़लाह-ओ-बहबूद को यक़ीनी बनाने के लिए इक़दामात किए जा सकते हैं । जनाब सय्यद तारिक़ कादरी और जनाब मुहम्मद अला उद्दीन अंसारी ने तमाम सैकूलर सयासी जमाअतों के अरकान असेंबली से ख़ाहिश की कि वो इस मसला को इवान असेंबली में मौज़ू बेहस बनाते हुए अक़ल्लीयतों के साथ इंसाफ़ को यक़ीनी बनाएं।

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