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मुस्लमानों के लिए लम्ह-ए- फ़िक्र

शमसाबाद । महिकमा आर ऐंड बी के डाक बंगला में मस्जिद ग़ैर आबाद शमसाबाद महिकमा आर ऐंड बी के डाक बंगला में 4 साल क़बल ये मस्जिद तामीर की गई थी । तब से ही ग़ैर आबाद है । इफ़्तिताह तक नहीं किया गया । शमसाबाद सब्ज़ी मार्किट से मुत्तसिल महिकमा

शमसाबाद । महिकमा आर ऐंड बी के डाक बंगला में मस्जिद ग़ैर आबाद शमसाबाद महिकमा आर ऐंड बी के डाक बंगला में 4 साल क़बल ये मस्जिद तामीर की गई थी । तब से ही ग़ैर आबाद है । इफ़्तिताह तक नहीं किया गया । शमसाबाद सब्ज़ी मार्किट से मुत्तसिल महिकमा इमारात-ओ-शवारा के डाक बंगला में इस मस्जिद को तामीर किया गया था ।

मुक़ामी हज़रात का कहना है कि मुस्लमानों के किसी मुतालिबा ख़ाहिश और दरख़ास्त के बगै़र 120 गज़ सरकारी अराज़ी पर 4 साल क़बल मस्जिद की तामीर की गई । इस मस्जिद की तामीर के पीछे एक राज़ और साज़िश थी । क़िस्सा ये है शमसाबाद मेन रोड पर एक क़दीम क़ुतुब शाही मस्जिद है । जिस में बाज़ाबता पंच व़क़्ता नमाज़ें अदा की जाती हैं ।

इस मस्जिद को महिकमा इमारत-ओ-शवारा के ओहदेदार मास्टर प्लान या सड़क की तौसीअ में एक रुकावट तसव्वुर करते हैं और चाहते हैं कि इस क़दीम मस्जिद को शहीद करते हुए सड़क कुशादा करें । इस लिए उन्हों ने एक मंसूबा के तहत ये सोचते हुए नई मस्जिद तामीर करदी कि मुस्लमान इस से ख़ुश होजाएंगे । और मौजूदा क़ुतुब शाही मस्जिद ख़ुशी से महिकमा इमारात-ओ-शवारा के हवाले करदेंगे ।

लेकिन उन्हें ये नहीं मालूम कि एक मर्तबा मस्जिद बन जाय तो वो हमेशा मस्जिद ही रहती है । शमसाबाद के मुस्लमानों ने महिकमा आर ऐंड बी की इस नापाक पेशकश को मुस्तर्द करदिया । हालाँकि कई इजलास तलब करते हुए सरकारी ओहदेदारों ने मुस्लमानों पर ज़ोर दिया कि वो नई तामीर करदा मस्जिद के बदले क़दीम मस्जिद से दस्तबरदार होजाए लेकिन दौलत ईमानी से सरशार मुक़ामी मुस्लमानों ने इस हक़ीर पेशकश को हक़ारत से मुस्तर्द करदिया । नई मस्जिद में दाख़िल होने नहीं दिया जाता हमेशा गेट पर ताला लगा हुआ होता है ।।

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