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मुस्लमानों के लिए हुकूमतों के इक़दामात तकमील-ए-फ़र्ज़, कोई एहसान नहीं

हैदराबाद। 6 जनवरी (सियासत न्यूज़) मर्कज़ी वज़ीर सेहत, जेनरल सैक्रेटरी इंडियन नेशनल कांग्रेस-ओ-मुबस्सिर बराए आंधरा प्रदेश मिस्टर ग़ुलाम नबी आज़ाद ने आज एतराफ़ किया कि मुल़्क की जद्द-ओ-जहद आज़ादी में मुस्लमानों ने दीगर अब्ना-ए-वत

हैदराबाद। 6 जनवरी (सियासत न्यूज़) मर्कज़ी वज़ीर सेहत, जेनरल सैक्रेटरी इंडियन नेशनल कांग्रेस-ओ-मुबस्सिर बराए आंधरा प्रदेश मिस्टर ग़ुलाम नबी आज़ाद ने आज एतराफ़ किया कि मुल़्क की जद्द-ओ-जहद आज़ादी में मुस्लमानों ने दीगर अब्ना-ए-वतन से किसी तरह कम नहीं बल्कि ज़्यादा ही हिस्सा अदा किया ताहम माबाद आज़ादी उन्हें जो हक़ मिलना चाहीए था नहीं मिला।

हुकूमतें आज जो कुछ भी कररही हैं वो इन का फ़र्ज़ है और हक़ तो ये है कि इस फ़र्ज़ को अदा नहीं किया जा सका। बलॉक सतह पर सरकार की जानिब से किए जाने वाले नामज़द ओहदों पर भी अक़ल्लीयतों को मुतनासिब मौक़ा फ़राहम किया जाना चाहीए और समाज के दीगर तबक़ात की फ़लाह-ओ-तरक़्क़ी के लिए शुरू करदा प्रोग्रामों में अक़ल्लीयतों को इन का मसतहक़ा हिस्सा मिलना चाहीए ।

मिस्टर ग़ुलाम नबी आज़ाद आज यहां निज़ाम कॉलिज ग्रांऊड पर जमीतुल उल्मा आंधरा प्रदेश के दूसरे इजलास आम से ख़िताब कररहे थे। इजलास की सदारत मौलाना हाफ़िज़ पीर शब्बीर अहमद रियासती सदर-ओ-रुकन क़ानूनसाज़ कौंसल ने की । मिस्टर ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कहा कि जमीतुल उल्मा की तारीख तीन सदियों पर मुहीत है। सब से पहले तबक़ा उल्मा ने ही अंग्रेज़ों को मुलक से बाहर करने की मुहिम शुरू की थी जिस का आग़ाज़ मौलाना शाह वली उललाह से होता है।

उलमाए किराम ने 1808 से 1915 -तक मुत्तहिद होकर अलहदा अलहदा तरीकों से अंग्रेज़ों को भगाने के जतिन करते रहे जिस में तशद्दुद का तरीका भी इख़तियार किया गया था। ग़दर 1857 में भी हिंद के उलमाए किराम ने अहम किरदार अदा किया। अंग्रेज़ों के हाथों शहीद किए गए दो लाख हिंदुस्तानियों में 51,200 तो सिर्फ उलमाए किराम थे।

उन्हों ने कहा कि फिर उलमाए किराम ने जब ये महसूस किया कि तशद्दुद के ज़रीया अंग्रेज़ों को बेदख़ल नहीं किया जा सकता तो अदम तशद्दुद का रास्ता इख़तियार किया और दीगरअब्ना-ए-वतन को अपने साथ किया। उन्हों ने कहा कि इन से कट्टर कोई और कांग्रेसी नहीं होसकता इस के बावजूद वो वसूक़ के कह सकते हैं कि ये उलमाए किराम की फ़िरासत ही थी कि कांग्रेस से क़बल उन्हों ने तहरीक शुरू की।

कांग्रेस के ऐलान से बहुत क़बल ही यानी /31 अगस्त 1920 को जमीतुल उल्मा हिंद ने तहरीक अदम तआवुन का ऐलान कर दिया था। आज़ादी का भी नारा कांग्रेस ने 1940 में दिया था मगर मौलाना सय्यद हुसैन मदनी ने जुलाई 1924 -में ही ये नारा दे दिया था। इसी तरह साइमन कमीशन के बाईकॉट का ऐलान भी कांग्रेस ने जामीतुल उल्मा के बाद किया।

ये एक तारीख है मगर निसाबी कुतुब में इस हिस्सा को फ़रामोश कर दिया गया जिस की वजह से हमारी नई नसल को ये नहीं मालूम होसका कि मुल़्क की आज़ादी में मुस्लमानों का क्या रोल था इस का ये नतीजा निकला कि मुल्क में फ़िर्क़ा विराना हम आहंगी पैदा नहीं होसकी। उन्हों ने कहा कि मलिक के हिन्दू आज़ाद हिंद के मुस्तक़बिल के बारे में दो हिस्सों में तक़सीम थे।

कांग्रेस सैकूलर ममलकत की हामी थी तो हिन्दू महासभा मलिक को हिन्दू राष्ट्र बनाने की वकालत कररही थी। इसी तरह मुसलमानान हिंद भी दो हिस्सों में तक़सीम थे। मुस्लिम लीग मुस्लमानों केलिए अलहदा ममलकत की मुहिम चला रही थी तो जमीतुल उल्मा दो क़ौमी नज़रिया की मुख़ालिफ़ थी। आज अफ़सोस के साथ कहना पड़ता है कि आज मुस्लमानों को अपने लिए तहफ़्फुज़ात का मुतालिबा करना पड़ रहा है। ये नौबत ही क्यों आई है? इसी लिए कि हम ने उन के साथ इंसाफ़ नहीं किया। उन्हों ने कहा कि जिस तरह ज़ुलम करना गुनाह है इसी तरह ज़ुलम सहना भी गुनाह है। मुस्लमान आज जो कुछ भी मुतालिबा कररहे हैं वो इन का हक़ है जिस का पूरा करना हुकूमतों का फ़र्ज़ है मगर हक़ तो ये है कि ये फ़र्ज़ अदा नहीं होसका।

मिस्टर ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कहा कि जब तक हुकूमतें ये फ़र्ज़ पूरा नहीं करतीं हमें सरकार के सामने अपने मुतालिबात पेश करते रहना चाहीए। उन्हों ने बताया कि 2003-04 मैं जब वो आंधरा प्रदेश कांग्रेस पार्टी उमूर के निगरान थे तो उस वक़्त उन्हों ने अपने तौर पर मुस्लमानों को 5 फीसद तहफ़्फुज़ात की फ़राहमी क़ानूनसाज़ कौंसल का अहया और वज़ाइफ़ पीराना साली की रक़म को दुगुना करने के तीन वाअदे किए थे जो डाक्टर वाई एस राज शेखर रेड्डी ने पूरे किए। उन्हों ने आज भी वो एक इजलास में इस बात पर ज़ोर दिया कि निचली सतह पर सरकारी नामज़द ओहदों पर अक़ल्लीयतों को मुनासिब मौक़ा दिया जाना चाहीए।

उन्हों ने कहा कि चीफ मिनिस्टर मिस्टर एन किरण कुमार रेड्डी ने किसानों गरीबों ख़वातीन दलितों और नौजवानों केलिए बहुत से प्रोग्राम्स शुरू किए हैं जो ख़ुश आइंद हैं। उन्हों ने चीफ मिनिस्टर पर ज़ोर दिया कि वो इन प्रोग्रामों में भी अक़ल्लीयतों को इन का मुतनासिब हिस्सा फ़राहम करें। चीफ मिनिस्टर मिस्टर एन किरण कुमार रेड्डी ने कहा कि वज़ारत आला का ओहदा सँभालने के बाद पहले ही हफ़्ता मैं जायज़ा इजलास में अकलेती तलबा के मेस चार्जस को दीगर तबक़ात के तलबा के मसावी कर दिया जिन्हें बहुत ही कम शरह पर रक़म अदा की जाती थी। इस तरह 1.50 लाख अकलियती तलबा केलिए इज़ाफ़ी 20 करोड़ रुपय मंज़ूर किए गए।

उन्हों ने बताया कि 15 एकड़ पर तामीर किए जाने वाले नए हज हाओज़ केलिए 12.5 करोड़ रुपय की ग्रांट मंज़ूर की गई है। ये हज गैर हज सीज़न में अक़ल्लीयतों को सियोल सरवेसस की तरबियत के मुस्तक़िल मर्कज़ के तौर पर भी काम करेगा। मिस्टर किरण कुमार ने बताया कि हाल ही में सब इन्सपैक्टरस की जायदादों पर तक़र्रुरात हुए हैं जिन में 60 अकलियती उम्मीदवारों को मौक़ा मिला है। अगरचे मुस्लमानों केलिए 4 फीसद का कोटा है मगर 5 फीसद मुस्लमान मुंतख़ब हुए हैं। राजीव युवा करनालु के तहत नौजवानों को दी जाने वाली ट्रेनिंग केलिए अलहदा मिशन शुरू किया गया है।

चीफ मिनिस्टर ने कहा कि मक्का मस्जिद बम धमाका के बाद चंद मुस्लिम नौजवानों को हरासाँ किया गया और चंद ओहदेदारों की ग़लती की वजह से उन नौजवानों को जेलों की मसाइब भी बर्दाश्त करना पड़ा था। असम्बली में मुबाहिस के दौरान उन्हों ने कहा कि जो मुस्लिम नौजवान बिला क़सूर सऊबतें बर्दाश्त किए हैं इन से माज़रत ख़्वाही की जाएगी और अब क़ौमी अकलियती कमीशन की सिफ़ारिशात पर कल 20 नौजवानों में जिन्हों ने एक साल से ज़ाइद जेल की सज़ा-ए-काटे हैं फीकस 3 लाख रुपय के हिसाब से 70लाख रुपय मुआवज़ा अदा किया जाएगा यही नहीं बल्कि उन्हें हुकूमत की जानिब से अच्छे किरदार का सदाक़तनामा भी अता किया जाएगा। उन्हों ने कहा कि मुस्लमानों और अक़ल्लीयतों के लिए हुकूमत जो कुछ करसकती है करेगी।

उन्हों ने कहा कि वो 5 मयादों से असम्बली केलिए मुंतख़ब होते आरहे हैं और वो एतराफ़ करते हैं कि इन की कामयाबी में जमीतुल उल्मा का बड़ा रोल रहा है और आज वो चीफ मिनिस्टर हैं तो वो भी मुस्लमानों की ताईद के बाइस। अमीर उल-हिंद मौलाना सय्यद मुहम्मद उसमान सदर जमीतुल उल्मा हिंद ने कहा कि मुस्लमान मुल्क आज़ाद होजाने के बाद जमीतुल उल्मा हिंद ने इंतिख़ाबी सियासत से कनाराकशी करली। उन्हों ने कहा कि हमारी ये कोशिश है कि हर शहरी अपनी आज़ादी महसूस करे। उन्हों ने कहा कि दुनिया में मुस्लमान का हर अमल दीन है। रब कायनात और नबी आख़िरी उज्ज़मान सल्लाहो अलैहि वसल्लम की इताअत-ओ-इत्तिबा में किए जाने वाले हर अमल दीन का हिस्सा है।

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