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मुस्लमानों के ख़िलाफ़ फ़िर्क़ा परस्तों और दहशतगर्दों का गठजोड़

इस बात में कोई शक नहीं कि फ़िर्कापरस्त अनासिर मुस्लमानों के ख़िलाफ़ अपनी मुनज़्ज़म साज़िशों को अंजाम दे रहे हैं क्यों के उन्हें ना तो पुलिस का ख़ौफ़ है और ना क़ानून का डर जिसकी सब से बड़ी मिसाल मुज़फ़्फ़र नगर का फ़साद है।

इस बात में कोई शक नहीं कि फ़िर्कापरस्त अनासिर मुस्लमानों के ख़िलाफ़ अपनी मुनज़्ज़म साज़िशों को अंजाम दे रहे हैं क्यों के उन्हें ना तो पुलिस का ख़ौफ़ है और ना क़ानून का डर जिसकी सब से बड़ी मिसाल मुज़फ़्फ़र नगर का फ़साद है।

फ़िर्कापरस्त पहले से तयशुदा हिक्मत-ए-अमली के तहत मुस्लमानों का क़तल-ए-आम करते रहे ,उनकी रिहायशी-ओ-तिजारती इमारात को तहस नहस करते रहे और ख़ौफ़ हिरास का एक ऐसा माहौल क़ायम किया कि 50 से 60० हज़ार अफ़राद अपना घर बार ,माल मवेशी उन ज़ालिमों के रहम-ओ-करम पर छोड़कर आरिज़ी कैम्पों में कस्मपुर्सी की ज़िंदगी गुज़ारने पर मजबूर हैं।

इस बात में भी कोई शुबा नहीं के मुस्लमानों पर हुए इन तमाम मुज़ालिम में उत्तरप्रदेश की हुकूमत वहां की पुलिस-ओ-इंतिज़ामिया बराबर की शरीक है। जबकि शुमाल मशरिक़ी रियास्तों में मुस्लमानों को जानी-ओ-माली नुक़्सान पहुचाने में फ़िर्कापरस्त अनासिर दहशतगर्दों की मदद ले रहे हैं जिसकी सब से बड़ी मिसाल गुजिश्ता दिनों मनी पूर में हुआ बम धमाका है जिस में हलाक हुए अफ़राद में से 9 मुस्लमान थे और ये पहली मर्तबा नहीं हुआ है।

इससे पहले भी मनी पूर समेत शुमाल मशरिक़ी रियास्तों में मुस्लमानों को निशाना बनाया गया है और पहले से कमज़ोर इन मुस्लमानों को मआशी-ओ-माली तौर पर मज़ीद तबाह करने के लिए यौमिया मज़दूरी तक करने से रोका जाता है ख़ासकर बंगला भाषी मुस्लमानों का ज़िंदगी इंतिहाई तंग कर दिया गया है।

हक़ीक़त ये है कि यहां के मुस्लमान सिंघी दहशतगर्दी के साये में अपनी सुबह-ओ-शाम बसर करते हैं जबकि सितम ज़रीफ़ी ये भी है कि डी वोटर के नाम पर उनकी कोई सुनवाई भी नहीं है यह‌ ख़्यालात का इज़हार मौलाना सय्यद अतहर हुसैन देहलवी , चेयरमेन अंजुमन मिनहाज रसूल ने गोहाटी (आसाम) में एक प्रेस कान्फ़्रेंस में फ़र्माया मौलाना देहलवी ने इससे पहले मनी पूर ब्लास्ट में हलाक हुए मुस्लमानों के अज़ीज़ अका़रिब से इज़हार ताज़ियत किया।

वज़ीर ऑइली मनी पूर से टेलीफ़ोन पर जबकि वज़ीर ए अली आसाम तरूण गोगई से मुलाक़ात करके उन हलाकतों पर अपना एहतिजाज दर्ज कराया और और रियास्ती हुकूमतों से मुस्लमानों की जान-ओ-माल की हिफ़ाज़त के लिए मुनासिब इक़दाम की यक़ीन दहानी चाही जबकि मौलाना देहलवी ने मर्कज़ी हुकूमत से भी ये मांग‌ किया के वो शुमाल मशरिक़ी मुस्लमानों की सियासी, मआशी-ओ-समाजी-ओ-तालीमी तरक़्क़ी के लिए दस्तूर हिंद में मौजूद अक़ल्लियती हुक़ूक़ और अपने मंशूर के मुताबिक़ फ़ौरी इक़दामात उठाए।

डी वोटर की लानत से आसाम के लाखों मुस्लमानों को आज़ाद करने के लिए आम इंतिख़ाबात से पहले एक मज़बूत और दूररस पालिसी के तहत क़ानूनी कारा वे अंजाम दे। कांग्रेस सदर सोनिया गांधी से अपील की के वो इंसिदाद फ़िर्कापरस्ती बिल को भी फ़ूड सेक्योरिटी बिल की तरह फ़ौरी तौर पर पास कराने के लिए मरकज़ी हुकूमत को हिदायात दें ताकि किसी हद तक फ़िर्कापरस्ती और सिंघी दहशतगर्दी पर क़ाबू पाया जा सके। इस मौके पर मौलाना देहलवी के साथ आसाम अंजुमन के सदर मौलाना हिलाल उद्दीन क़ासिमी , रुक्न शौरी रजब अहमद भी मौजूद थे।

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