Wednesday , August 23 2017
Home / AP/Telangana / मुस्लमान, अपनी ज़िंदगी को इस्लामी तालीमात का आईने दार बनाएँ:ज़ाहिद अली ख़ान

मुस्लमान, अपनी ज़िंदगी को इस्लामी तालीमात का आईने दार बनाएँ:ज़ाहिद अली ख़ान

हैदराबाद 21 मार्च: ज़ाहिद अली ख़ान एडिटर सियासत ने मुस्लिम नौजवानों से अपील की के वो अल्लाह को हाज़िर-ओ-नाज़िर जान कर इस बात का अह्द करें कि अपनी शादी में जहेज़ लेन-देन और बेजा रसूमात से गुरेज़ करेंगे। उन्होंने कहा कि मुस्लिम शादीयों में बेजा फुज़ूलखर्ची और धूम धाम के बाइस वालिदैन की मईशत तबाही तक पहुंच गई है। ज़ाहिद अली ख़ान मिलाप गार्डन फंक्शन हाल (मह्दी पटनम) रिंग रोड में इदारा सियासत और माइनॉरिटी डेवलपमेंट फ़ोरम के ज़ेरे एहतेमाम मुनाक़िदा 57 वीं दू बा दू मुलाक़ात प्रोग्राम को मुख़ातिब कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मुल्क के मौजूदा हालात के पेशे नज़र मुसलमानों का फ़रीज़ा है कि वो अपनी ज़िंदगी के मुआमलात को इस्लामी तालीमात का आइना-दार बनाएँ।

मुसलमानों में पहले ही से तालीमी पसमांदगी ने उन के रोज़गार के इमकानात को मादूम कर दिया है। दूसरी तरफ़ मुसलमानों की अक्सरीयत मआशी बदहाली से दो-चार है और समाज-ओ-मुआशरे में उनका कोई रुत्बा भी नहीं रहा इन सारी महरूमियों के बावजूद अगर मुस्लमान अपनी शादीयों में फुज़ूलखर्ची से बाज़ नहीं आए तो फिर किस तरह उन की ज़िंदगी में ख़ुशहाली मुम्किन है।

ज़ाहिद अली ख़ान ने दौलतमंद मुस्लिम घरानों की शादीयों का ज़िक्र करते हुए कहा कि बड़े बड़े शादी ख़ानों में 20 ता 25 किस्म के लवाज़मात दरअसल अपनी दौलत के मुज़ाहिरे के सिवा कुछ और नहीं है।

दौलतमंद लोगें को चाहीए कि वो अपने लड़के और लड़कीयों की शादी के साथ कम अज़ कम 10 ग़रीब लड़कीयों की शादीयों का एहतेमाम करें। एडिटर सियासत ने इस बात पर तशवीश का इज़हार किया कि ग़रीब-ओ-मुतवस्सित तबक़ात को अपने लड़कीयों की शादीयों के लिए सुदी क़र्ज़ लेना पड़ रहा है जब कि इस्लाम ने सूद के लेने और देने को हराम क़रार दिया है।

उन्होंने कहा कि मुस्लिम शादीयों में नज़म-ओ-ज़बत की कमी महसूस की जाती है। वक़्त की पाबंदी का कोई ख़्याल नहीं किया जाता शादी की तक़रीब और वलीमे में बियान्ड बाजा आतशबाज़ी के बाइस दूसरी क़ौमों में मुसलमानों का विक़ार मुतास्सिर होने लगा है। हम कब तक अपने अंदर फ़िक्र और तर्ज़-ए-अमल में तबदीली नहीं लाएँगे।

ज़ाहिद अली ख़ान ने लड़कों की माओं की ख़ुसूसी तौर पर मश्वरह दिया कि वो लड़की के इंतेख़ाब में हुस्न-ओ-जमाल और ख़ूबसूरती से ज़्यादा सीरत-ओ-किरदार दिनदारी तालीम को अपनी पसंद का मयार बनाएँ। ज़हीरुद्दीन अली ख़ान मैनेजिंग एडिटर सियासत ने दु बा ददु प्रोग्राम की निगरानी की और वालिदैन से तबादला-ए-ख़्याल किया।

आबिद सिद्दीक़ी सदर एम डी एफ़ ने कहा कि अस्र-ए-हाज़िर में मुस्लिम वालिदैन दौलत की लालच का शिकार हैं जिसकी वजह से हमारे मुआमलाते ज़िंदगी में ख़राबियां पैदा होती जार ही हैं।

TOPPOPULARRECENT