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मुस्लिमों से जुडऩे की कोशिश…

आइंदा आम इंतेखाबात के लिए बीजेपी की तैयारियों के बीच एक पहलू काबिल ए जिक्र है कि इस बार पार्टी जज्बाती मुद्दों को नहीं छेड़ रही है। नरेंद्र मोदी से लेकर तमाम लीडरों की तकरीरों में राम मंदिर की तामीर , यक्सा सिविल कोड और दफा 370 के खात

आइंदा आम इंतेखाबात के लिए बीजेपी की तैयारियों के बीच एक पहलू काबिल ए जिक्र है कि इस बार पार्टी जज्बाती मुद्दों को नहीं छेड़ रही है। नरेंद्र मोदी से लेकर तमाम लीडरों की तकरीरों में राम मंदिर की तामीर , यक्सा सिविल कोड और दफा 370 के खात्मे जैसे मुद्दे गायब हैं।

ये वे सवाल हैं, जिनसे मुस्लिम फिर्के में खदशात पैदा होते हैं। इसके बर अक्स इस बार भाजपा मुसलमानों से तार जोडऩे की कोशिश में नजर आती है। कुछ दिनों पहले पार्टी के सदर राजनाथ सिंह ने कहा था कि अगर मुसलमानों के मुताल्लिक में उनकी पार्टी से कोई गलती हुई हो तो वे सिर झुकाकर माफी मांगने को तैयार हैं।

एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में राज्यसभा में पार्टी के लीडर अरुण जेटली ने कुबूल किया कि उनकी पार्टी और मुसलमानों के बीच खाई है, लेकिन उन्होंने कहा कि अब हालात में ज़्यादा सुधार हुआ है। पार्टी से जुड़े दानिश्वरों ने माना है कि अगर भाजपा आबादी के किसी हिस्से को मुतवज्जा नहीं कर पाती तो इसे उसकी नाकामी मानी जाएगी।

इस हवाले में यह याद कर लेना भी मुनासिब है कि नरेंद्र मोदी और राजनाथ सिंह यह कह चुके हैं कि अगर यह साबित हो जाए कि आर्टीकल / दफा 370 कश्मीरी लोगों के मुफाद में है तो भाजपा इस पर अपनी राय बदलने पर सोच सकती है।

ये तमाम बातें भाजपा और हिंदुस्तान की सियासत दोनों की तरक्की के लिहाज से इंतेहाई अहम हैं। हिंदुस्तान के लिए इससे अच्छी बात कोई नहीं हो सकती कि सियासी पार्टी ज़ात और फिर्कावाराना मुद्दों पर गोलबंदी की पालिसी से आगे निकलें और तरक्की व आवाम की बेहतरी के सवालों पर मुकाबला करें।

फिलहाल, ये अटकलें जारी हैं कि भाजपा के रुख में दिखता बदलाव हकीकी है या यह महज वोट पाने का इंतेखाबी दांव है। लेकिन यह काबिल-ए-जिक्र है कि जम्हूरी इंतेज़ामात में वोट का फायदा अक्सर पार्टियों की पालिसी में तब्दीली का सबब बनता है।

बीजेपी आरएसएस का हिस्सा है, इसलिए हिंदुत्व का नज़रिया उसकी ‍अंदरूनी ढ़ाचे में है। इस बारे में कुछ इशारे पार्टी के अगले इलेक्शन के म‍ंशूर से मिलेंगे।

——-बशुक्रिया: दैनिक भास्कर

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