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मुस्लिम जमातें हमदरद या वोट कटवा?

हैदराबाद 28 मई: जमहूरीयत में तादाद को बड़ी एहमीयत हासिल होती है और इस तादाद के हुसूल के लिए सियासी जमातें अपनी कारकर्दगी का मुज़ाहरा करती हैं और फिर अपने चुनाव वादों-ओ-तरक़्क़ी के मन्सूबों को पेश करते हुए राय दहिंदों को राग़िब करने की कोशिश करती थीं लेकिन2014 के आम चुनाव ने ये नज़रिया तबदील कर दिया और मुल्क का जमहूरी निज़ाम सियासी साज़िशों के महवर पर गर्दिश करने लगा है जहां राय दहिंदों को तरक़्क़ीयाती मन्सूबों करप्शन से पाक हुक्मरानी मसावात और हर तबक़ा की यकसाँ तरक़्क़ी के वादे तो किए जा रहे हैं लेकिन इन वादों पर अवामी एतेमाद ख़त्म होने के नतीजे में अब वोट के हुसूल से ज़्यादा वोट की तक़सीम पर तवज्जा मबज़ूल की जा रही है।

सियासतदां चुनाव में अवाम से वादों के बजाये उनमें रख़्ना डालने को तर्जीह देने लगे हैं और इस रख़्ना अंदाज़ी के ज़रीये चुनाव में कामयाबी हासिल की जा रही है। ये कोई नई बात नहीं है बल्कि मैदान सियासत में ये अमल बरसहा बरस से किया जा रहा है लेकिन वोटों की तक़सीम के ज़रीये कामयाबी का हुसूल साबिक़ में हैदराबाद लखनऊ मुंबई और उतर प्रदेश-ओ-बिहार के बाज़ पारलीमानी हलक़ों तक महदूद हुआ करता था लेकिन अब ये चलन सियासत में आम हो चुका है।

नागपुर में तैयार करदा ये साज़िश अगर उतर प्रदेश में कामयाब हो जाती है तो एसी सूरत में 2019 आम चुनाव में भी इसी साज़िश को अमली जामा पहनाए जाने का मन्सूबा तैयार किया जा रहा है।

2019 आम चुनाव में वोट कटवा सियासी जमातों को 5 हज़ार करोड़ तक की रक़ूमात फ़राहम करते हुए उन्हें 50 से ज़ाइद पारलीमानी नशिस्तों पर उम्मीदवार मैदान में उतारने के लिए कहा जा रहा है ताकि बड़े पैमाने पर मुस्लिम वोट की तक़सीम के ज़रीये सेक्युलर ताक़तों को इक़तिदार से दूर रखा जा सके। भारतीय जनता पार्टी इस बात को महसूस करने लगी है कि नरेंद्र मोदी करिश्मा मज़ीद नहीं चलेगा और ना ही भारतीय जनता पार्टी कारकर्दगी की बुनियाद पर अवाम से कामयाबी की तवक़्क़ो कर सकती है।

इसी लिए 2017 मैं उत्तरप्रदेश को आख़िरी तजुर्बा गाह के तौर पर इस्तेमाल किए जाने की तवक़्क़ो ज़ाहिर की जा रही है ताकि 2019आम चुनाव की हिक्मत-ए-अमली को क़तईयत दी जा सके। उतर प्रदेश असेंबली चुनाव जो 2017 मैं मुनाक़िद होने जा रहे हैं उनमें भी यही हिक्मत-ए-अमली इख़तियार किए जाने का अंदेशा है।

403नशिस्तों पर मुश्तमिल उतर प्रदेश असेंबली में भारतीय जनता पार्टी ने 20 फ़ीसद मुस्लिम वोटों की तक़सीम के लिए वोट कटवा मुस्लिम सियासी जमातों का सहारा लेने की मंसूबा बंदी करली है। अब तक उतर प्रदेश के जो रुजहानात दिखाए जा रहे हैं वो भी मुश्तबा हैं लेकिन ये बात दरुस्त है कि मुज़फ़्फ़रनगर फ़साद ने अखिलेश यादव से मुसलमानों को दूर कर दिया है। समाजवादी पार्टी अज़म ख़ान को मुस्लिम काज़ का चैंपियन बना कर पेश कर रही है लेकिन इस का कोई असर होता नज़र नहीं आरहा है और उतर प्रदेश के मुस्लमान महोजन समाज पार्टी के साथ जाते नज़र आरहे हैं।

मुस्लमानों के इन रुजहानात को भाँपते हुए भारतीय जनता पार्टी अज़ीम इत्तेहाद की तशकील को रोकने की कोशिश कर रही है साथ ही उतर प्रदेश में मुस्लिम क़ियादत के खिला को पुर करने के नाम पर एसी सियासी जमातों के लिए राहें हमवार की जा रही हैं जो फ़िर्कापरस्ती का बीज बोते हुए बीजेपी के कामयाबी को यक़ीनी बना सके। मार्च 2016के रुजहानात के मुताबिक़ बहुजन समाज पार्टी को 185 नशिस्तें हासिल होने का इमकान है जबकि दूसरे नंबर पर 120 नशिस्तों के साथ भारतीय जनता पार्टी को दिखाया जा रहा है।समाजवादी पार्टी जो कि 228 नशिस्तें हासिल करते हुए इक़तिदार पर है उसे सिर्फ80नशिस्तें दिखाई जा रही हैं।बिहार असेंबली चुनाव से पहले तशकील पाए अज़ीम इत्तेहाद में मुलाइम सिंह ने शमूलीयत इख़तियार करने के बाद दूरी इख़तियार करली थी जिसकी वजह सिपिआई बताई जाती है। इस एतबार से उतर प्रदेश में समाजवादी पार्टी कांग्रेस-ओ‍-दुसरे जमातों का अज़ीम इत्तेहाद तशकील पाना दुशवार है लेकिन अगर बहुजन समाज पार्टी 185 नशिस्तों की ख़ुश-फ़हमी में अज़ीम इत्तेहाद तशकील नहीं देती है और वोट कटवा उतर प्रदेश में दाख़िल होते हैं तो इस का रास्त फ़ायदा बीजेपी को होगा।

भारतीय जनता पार्टी 20 फ़ीसद मुस्लिम वोट की तक़सीम के लिए ना सिर्फ मुस्लिम सियासी जमात का इस्तेमाल करेगी बल्के अपनी हमनवा मुस्लिम तन्ज़ीमों के ज़रीये दूसरों के हक़ में मसलक की बुनियाद पर वोट के इस्तेमाल की अपील करवाते हुए मुस्लिम वोट तक़सीम करवाने में भी अहम किरदार अदा करेगी।

उत्तरप्रदेश की मौजूदा असेंबली में 15 आज़ाद-ओ-दुसरे जमातों के उम्मीदवार हैं जिनकी तादाद में गिरावट रिकार्ड जाने की पेश क़यासी की जा रही है। मौजूदा असेंबली में 42 नशिस्तें रखने वाली बीजेपी के मुताल्लिक़ ये दावे किया जा रहा है कि उसे 2017 चुनाव में 120 नशिस्तें हासिल होंगी वो कैसे ये तो हालात बता रहे हैं। उतर प्रदेश में मुस्लिम सियासी जमात का काम मुस्लिम वोट तक़सीम करना होगा जबकि मुस्लिम वोट को तक्सीम करने के अमल के दौरान जो तक़ारीर होंगी इन तक़ारीर का ज़बरदस्त फ़ायदा बीजेपी को होगा चूँकि इश्तिआल अंगेज़ी अक्सरीयती वोट को मुत्तहिद करने में बेहतर साबित होगी। शहरे हैदराबाद से ताल्लुक़ रखने वाले बाज़ एसे अनासिर को भी उतर प्रदेश में इस्तेमाल करने की कोशिश की जा रही है जो मसलकी इख़तेलाफ़ात को हवा देने में महारत रखते है और मज़हबी चोलों की आड़ में कैंसर सुल्तानी की गुंबद पर बसेरा करने वाले ये कबूतर हमेशा ही ताक़त के साथ रहते हुए गुमराह कुन प्रोपगंडे में मसरूफ़ होते।

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