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मुस्लिम तहफ़्फुज़ात के लिए अख़बार सियासत की तहरीक क़ौमी सतह पर भी मक़बूल

हैदराबाद 02 दिसंबर: 12 फ़ीसद मुस्लिम तहफ़्फुज़ात के लिए शुरू करदा अख़बार सियासत की तहरीक क़ौमी सतह पर पहुंच गई और अब दुसरे रियासतों से ताल्लुक़ रखने वाले मुस्लिम अरकान पार्लीमान चीफ़ मिनिस्टर के चंद्रशेखर राव‌ को उनका चुनाव वादा याद दिलवाने लगे हैं।

इंडियन यूनीयन मुस्लिम लीग की तरफ से रुकने पार्लियामेंट ई अहमद साबिक़ मर्कज़ी वज़ीर ने चीफ़ मिनिस्टर तेलंगाना के चंद्रशेखर राव‌ को मकतूब रवाना करते हुए फ़ौरी बी सी कमीशन की तशकील करते हुए मुसलमानों की समाजी-ओ-मआशी हालत का सर्वे शुरू करवाने का मुतालिबा किया और कहा कि बी सी कमीशन की सिफ़ारिशात की बुनियाद पर 12 फ़ीसद तहफ़्फुज़ात की फ़राहमी को यक़ीनी बनाए जाने की ज़रूरत है चूँकि तहरीक तेलंगाना के दौरान ना सिर्फ मुस्लिम तलबा बल्कि मुख़्तलिफ़ शोबा-ए-हयात से ताल्लुक़ रखने वाले मुसलमानों ने तेलंगाना राष़्ट्रा समीती की तरफ से किए गए वादों और बेहतर मुस्तक़बिल की तवक़्क़ो करते हुए अलाहिदा रियासत तेलंगाना की ताईद की थी। ई अहमद ने चीफ़ मिनिस्टर से मुतालिबा किया के हुकूमत की तरफ से एक लाख 7 हज़ार 744 मख़लवा जायदादों पर तक़र्रुत से पहले 12 फ़ीसद तहफ़्फुज़ात को यक़ीनी बनाया जाये।

इंडियन मुस्लिम लीग ने भी तहरीक तेलंगाना के दौरान छोटी रियासतों की हिमायत करते हुए तशकील तेलंगाना की ताईद का एलान किया था। ई अहमद की तरफ से चीफ़ मिनिस्टर तेलंगाना को रवाना करदा मकतूब में पहले तालीमी साल के दौरान सिर्फ़ 4 फ़ीसद तहफ़्फुज़ात पर इकतिफ़ा किए जाने का भी तज़किरा किया गया और कहा गया हैके कांग्रेस हुकूमत ने मुसलमानों को जो 4 फ़ीसद तहफ़्फुज़ात फ़राहम किए थे जबकि तलबा को ये क़वी उम्मीद थी के हुकूमत तेलंगाना 12 फ़ीसद तहफ़्फुज़ात की फ़राहमी को यक़ीनी बनाएगी लेकिन एसा नहीं हुआ बल्कि फ़ासट स्कीम मुतआरिफ़ करवाते हुए ख़ामोशी इख़तियार करली गई।

ई अहमद ने मुतालिबा किया के शोबा तालीम में 12 फ़ीसद तहफ़्फुज़ात की फ़राहमी को यक़ीनी बनाया जाये ताके मुसलमानों की तालीमी पसमांदगी को दूर किया जा सके।

उन्होंने बी सी कमीशन के क़ियाम के मुतालिबे के साथ ये भी वाज़िह कर दिया कि अगर हुकूमत मुसलमानों को 12 फ़ीसद तहफ़्फुज़ात की फ़राहमी के ज़रीये हमा-जिहत तरक़्क़ी को यक़ीनी बनाने के इक़दामात नहीं करती है तो एसी सूरत में अलाहिदा रियासत तेलंगाना के क़ियाम का मक़सद हासिल नहीं होगा।

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