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मुस्लिम दानिश्वरमंद कर रहे हैं बिहार में ओवैसी का मुखालिफत

पटना : एक्टिविस्ट मोहम्मद मूसा के मुताबिक, आज चार दिहाई के बाद, ओवैसी बीजेपी के लिए “प्यारे दुश्मन” साबित हो रहे हैं। मूसा कहते हैं की ओवैसी बिहार के मुस्लिम वोटर्स को कन्फिउज कर रहे हैं, उन्हें तक़सीम कर रहे हैं। मूसा की माने तो ओवैसी वह हिन्दू वोटों का सेंटरलाइज कर रहे हैं। गुजिशता पार्लियामनी इंतिख़ाब में जो अख्तरुल इमान की तरफ से किशनगंज में किया गया थे, वही अब बड़े पैमाने पर बिहार इंतिख़ाब में किया जा रहा हैं। अखतरुल इमान ने बीजेपी की इंतिख़ाब जीतने में बड़ी किरदार निभाई थी। अखतरुल इमान ने साल 2014 में किशनगंज इंतिख़ाब से अपना नाम वापस ले लिया था, वह जेडीयू से उम्मीदवार थे।

अखतरुल इमान ने पहले छोड़ा और फिर आखरी पलों में जेडीयू की तरफ से उम्मीदवार वापस ले ली। इसका फायदा साफ तौर से बीजेपी को हुआ। मूसा ने अखतरुल पर सियासी धोकाधड़ी का इल्ज़ाम लगाया। इससे पहले भी ओवैसी ने महाराष्ट्र में फिरकापरस्त पार्टियों को जीतने में मदद कर चुके हैं। इंग्लिश के प्रोफेसर तबिश कहते हैं ” शेक्सपियर के नाटकों के कैरेक्टर की तरफ इंडियन मुस्लिम सियासत भी दोस्ताना दुश्मनों से भरी पड़ी है। अभी बीजेपी को ओवैसी जैसे दोस्ताना दुश्मनों की जरूरत ही है”।

बिहार के मुस्लिम दानिश्वरमंद बिहार की सियासत में ओवैसी की एंट्री का मुखालिफत कर रहे हैं। रियासत के उर्दू एडवाइजरी कमेटी के चेयरमैन शफी मशद्दी न कहा की मुल्क को सेकुलर सियासत की जरूरत है और न ही ओवैसी जैसे लोगों की। शफी ने कहा ” मै ओवैसी का मुखालिफत सिर्फ सेकुलर के मद्देनज़र कर रहा हूँ। अक़लियत फिरकापरस्ती बहत खतरनाक है। अक़लियत फिरकापरस्ती से अकसरियत फिरकापरस्ती बढ़ती है और फिर हर तरह की फिरकापरस्ती ताकतों का बढ़ावा मिलता है।

रियासत की हज कमेटी के साबिक़ चेयरमैन रहमान काजमी ने कहा की ओवैसी ने बिहार इंतिख़ाब को लेकर कोई रस्मी ऐलान नहीं किया है। इसलिए वह क़यास अराई की बुनियाद पर कोई तब्सिरह नहीं करेंगे।

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