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मुस्लिम धर्मगुरूओं ने किया सपा और कांग्रेस के गठबंधन का विरोध

सियासत ब्यूरो लखनऊ 30 जनवरी : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर आज सुन्नी और शिया एकता फ्रंट के बेनर तले इमामबारा सिब्तैनाबाद हजरतगंज लखनऊ में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के गठबंधन के खिलाफ शिया व सुन्नी धर्मगुरूओं की एक संयुक्त प्रेस वार्ता आयोजित हुई ।

प्रेस वार्ता में सहमति के साथ शिया व सुन्नी धर्मगुरूओं ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन का विरोध किया और कहा कि इन दोनों पार्टियों ने आज तक मुसलमानों का केवल राजनीतिक शोषण किया है, अब समय आ गया है कि मुसलमान एकजुट होकर अपनी शक्ति का प्रदर्शन करें।

सन्नी और शिया उलमा ने संयुक्त रूप से बयान दिया कि समाजवादी सरकार में पूरे उत्तर प्रदेश में लगभग 400 सांप्रदायिक दंगे हुए जिसमें बड़े दंगे भी शामिल हैं। इन दंगों में मुसलमानों का भारी जानी व आर्थिक नुकसान भी हुआ ।

मुजफ्फरनगर दंगों में मुसलमानों के नुकसान का अनुमान 2002 मंे गुजरात में हुए दंगों से भी कहीं अधिक हे। ओलमा ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भारत में आजादी के समय सांप्रदायिक दंगे हुए मगर मुजफ्फरनगर में उस समय भी शांति और भाईचारा कायम रहा मगर पूरी योजना के साथ समाजवादी सरकार ने मुसलमानों और जाटों के बीच जो नफरत का बीज बोया है वह निंदनीय है ।

अफसोस नाक यह है कि जिस समय मुजफ्फरनगर सांप्रदायिक दंगों की आग में सुलग रहा था उस समय मुख्यमंत्री सैफई में अर्धनग्न नृत्य व संगीत कार्यक्रम में व्यस्त थे और जब दंगों के बाद पीड़ित शिविरों में जीवन बिताने के लिए मजबूर थे तब शरणार्थी शिविरों पर बुलडोजर चलवाये गए, जब शिविरो पर बुलडोजर चल रहे थे तब तथाकथित मुस्लिम नेता आजम खान करोड़ों रुपये खर्च करके समाजवादी प्रमुख मुलायम सिंह यादव का जन्म दिन मना रहे थे ।

निंदनीय है कि जिस राशि को शरणार्थियों और दंगा पीड़ितों पर खर्च करना चाहिए था उस राशि को जन्म दिन मनाने पर खर्च करके दंगा पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़का गया । उत्तरपरदेश में जितने भी दंगे हुए इस तथाकथित मुस्लिम नेता ने कभी एक निंदनीय बयान तक नहीं जारी किया,चाहे वे मथुरा के कोसी कलां दंगा हो या प्रताप गढ़ के अस्थाना गांव में हुआ दंगा हो या बरेली में हुआ फसाद हो।

हद यह है कि जियाउल हक्क डिप्टी एसपी की हत्या के बाद उनके कातिल मंत्रि को मंत्रिमंडल से हटाने के बाद पुनाह मंत्री बनने से पहले वह उस कातिल मंत्रि के घर हाजरी लगाने गये,आखिर ऐसे लोग कैसे मुसलमानों का नेतृत्व कर सकते हैं? ओलमा ने कहा कि यह कैसी धर्मनिरपेक्ष और मुसिलम हितेशी सरकार है जो सब काम मुसलमानों के खिलाफ करती है।

ओलमा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में जितने भी दंगे हुए है जैसे मथुरा के कोसी कलां, प्रताप गढ़ के अस्थाना गांव, गोंडा , सीतापुर, बरेली, बहराइच, इटावा, कन्नौज आदि इन सभी में समाजवादी सरकार के करीबी और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नजदीकी लोग ही शामिल पाए गए है। ओलमा ने कहा कि कब्रिस्तान पर सबसे अधिक अवैध कब्जे समाजवादी सरकार में ही होते हैं ,वक्फ के विनाश के लिए यही समाजवादी सरकार जिम्मेदार है। इस सरकार ने मुसलमानों से किए गए वादों को पूरा नहीं किया यह दुखद है ।

ओलमा ने कहा कि समाजवादी पार्टी का दावा है कि उन्होंने सभी दागदार छवि के लोगों, माफियाओं को पार्टी से निकाल दिया है और दूसरे राजनीतिक दलों में सभी माफिया शामिल हैं जबकि समाजवादी पार्टी में आज भी माफिया और गुंडों की कमी नहीं है जो विधायक भी हैं और मंत्री की कुर्सी पर भी बैठे हुए हैं। ऐसे ही लोग कानून व्यवसथा के लिए समस्या पैदा करते हैं।

ओलमा ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि तथ्य यह है कि राजनीति का अपराधीकरण करने में समाजवादी सरकार की अहम भूमिका रही है। आज भी दर्जनों अपराधी समाजवादी पार्टी में विधायक और मंत्री पद पर हैं। विकास का ढिंढोरा पीट रही समाजवादी सरकार पर कटाक्ष करते हुए ओलमा ने कहा कि अब तक विकास का कोई काम पूरा नहीं हुआ मगर मुख्यमंत्री घूम घूमकर अधूरे कामों का उद्घाटन करके जनता को गुमराह कर रहे हैं।

ओलमा ने कांग्रेस पार्टी पर कड़ा रुख अपनाते हुए कि सांप्रदायिकता की जन्म दाता कांग्रेस ही है ओ आर समाजवादी सरकार उसके नक्शेकदम पर है । ओलमा ने कहा कि कांग्रेस और समाजवादी सरकार ने जितने घाव मुसलमानों को दिए हैं उन पर एक मोटी किताब तैयार हो सकती है। बाबरी मस्जिद में मूर्तियां रखवाने से लेकर मस्जिद विध्वंस तक की सभी जिम्मेदारी कांग्रेस पर ही लागू होती है, कांग्रेस द्वारा कराए गए सांप्रदायिक दंगों की एक लंबी सूची है।

दंगों के बाद कांग्रेस ने जांच के लिए आयोग तो बहुत बनाए मगर आज तक किसी आयोग की रिपोर्ट पर अमल नहीं हो सका और न मुसलमानों को मुआवजा दिया गया। .

मुजफरनगर दंगों के बाद आज तक मुसलमानों की घर वापसी नहीं हो सकी। ओलमा ने कहा कि कांग्रेस और समाजवादी सरकार ने हमेशा मुसलमानों को आतंकित करके या लालच देकर वोट जरूर लिए मगर कभी उन्हें कुछ नहीं दिया, दोनों दलों ने अपने गुनाहों पर पर्दा डालने के लिए गठबंधन किया है वरना गठबंधन से पहले कांग्रेस का नारा था कि 27 साल यूपी बेहाल ,अब ऐसा किया हुआ कि समाजवादी सरकार के साथ गठबंधन के बाद नारा बदल गया है यूपी को यह साथ पसंद है।

ओलमा ने कहा कि इस गठबंधन का विरोध करना चाहिए ताकि दोनों पार्टियों के चेहरों से दोहरी नकाब उतर सके, इस चुनाव में मुसलमान एकजुट होकर इस गठबंधन को विफल बनाएँ और ऐसी पार्टी को सत्ता की बागडोर सौंपें जो उनके विकास और कल्याण के लिए काम करने का वादा करे। मौलाना हबीब हैदर ने कहा कि समाजवादी पार्टी हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है।

इस सरकार ने मुसलमानों से किया गया कोई वादा पूरा नहीं किया ना उन्हें रोजगार दिया गया, न उनके लिये एजुकेशन पर काम किया और न उन्हें सुरक्षा प्रदान की गयी। मौलाना ने कहा कि अब तक पुराने वादे पूरे नहीं हुए और समाजवादी पार्टी ने नया मैनिफेस्टो जारी कर दिया है। मौलाना ने कहा कि कांग्रेस के पास भी मुसलमानों के लिए कोई मजबूत रणनीति नहीं है.

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