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मुस्लिम मतों के विभाजन के बाद धूमिल हुई छवि को सुधारने में जुटी पार्टी

हैदराबाद। तेलंगाना के मतदाताओं के बीच उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के चुनाव में धूमिल हुई छवि को मिटाने के लिए स्थानीय राजनीतिक पार्टी ने अपने प्रयास शुरू कर दिए हैं। दोनों राज्यों के चुनाव परिणामों के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि यदि इन राज्यों के चुनावों में वे भाग नहीं लेते तो मुस्लिम वोटों का विभाजन नहीं होता।

 

 

 

पार्टी के फ्लोर नेता ने तीन हफ्ते तक महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों के लिए अभियान चलाया, जबकि यूपी में विधानसभा चुनाव में पार्टी अध्यक्ष ने हेलीकॉप्टर के माध्यम से प्रचार किया था लेकिन चुनाव परिणाम उनके लिए निराशाजनक रहे। महाराष्ट्र और यूपी के मुस्लिम चिढ़ गए कि चुनाव में स्थानीय राजनीतिक दल की भागीदारी से विधानसभा में मुस्लिम प्रतिनिधित्व कम हुआ है। सोशल मीडिया और विश्लेषणात्मक समीक्षा भी मुसलमानों की टिप्पणी प्रकाशित कर रही है।

 

 

 

उत्तर प्रदेश के कई धर्मनिरपेक्ष दलों ने मुस्लिम मतों के विभाजन से बचने के लिए इनसे दूरी बनाए रखने का फैसला किया। सत्तारूढ़ टीआरएस पार्टी को भी यह सोचने के लिए मजबूर किया गया है कि क्या उसके सहयोगी की दोस्ती अगले चुनाव में इसके लिए फायदेमंद होगी या नहीं। मुसलमानों के वोटों का विभाजन बड़ा मसला बन गया है इसलिए इस दल के नेतृत्व ने अपने कैडर को मतदाताओं से संपर्क करने और इस छवि को हटाने की कोशिश करने का निर्देश दिया है।

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