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मुस्लिम लड़कियों के मयार तालीम में बेहतरी तालीम-ए-याफ़ता (सभ्य‌)लड़की मुआशरा(नागरिकता)का असासा(सामान‌)

हैदराबाद१७अक्टूबर : अलहमदु लिल्लाह मुस्लिम लड़कीयां प्रोफ़ैशनल तालीम हासिल करके अपने ताबनाक(रौशन‌) मुस्तक़बिल(future) की जानिब रवां दवां हैं। गुज़शता चंद साल क़बल मुस्लमान लड़कीयों का तालीमी मयार पस्त था , शादां और डाक्टर वे आर के ग

हैदराबाद१७अक्टूबर : अलहमदु लिल्लाह मुस्लिम लड़कीयां प्रोफ़ैशनल तालीम हासिल करके अपने ताबनाक(रौशन‌) मुस्तक़बिल(future) की जानिब रवां दवां हैं। गुज़शता चंद साल क़बल मुस्लमान लड़कीयों का तालीमी मयार पस्त था , शादां और डाक्टर वे आर के ग्रुप आफ़ तालीमी इदारे जात ने मुस्लिम लड़कीयों को बासलाहीयत और काबुल बनाने का बीड़ा उठाया और आज ये लड़कीयां ख़ुदक़ाबिल बनने के बाद दूसरी लड़कीयों को तालीम देने के काबिल बन चुकी हैं।

इन ख़्यालात का इज़हार डाक्टर मुहम्मद वज़ारत रसूल ख़ान साबिक़(पूर्व‌) रुकन असैंबली, बानी-ओ-चेयरमैन शादां-ओ-डाक्टर वे आर के ग्रुप आफ़ तालीमी इदारे जात ने डाक्टर वे आर के वीमनस कॉलिज आफ़ इंजीनीयरिंग ऐंड टैक्नालोजी अज़ीज़ नगर, रंगा रेड्डी में बीटेक साल-ए-अव्वल(पहला साल‌) के ओरनटीशन डे प्रोग्राम से ख़िताब करते हुए किया।उन्हों ने कहा कि मुस्लमान मुल़्क की तामीर-ओ-तरक़्क़ी में नुमायां रोल अदा करें, दूसरी अक़्वाम के साथ कांधे से कांधा मिलाकर चलें।

शादां और डाक्टर वे आर के सोसाइटी ने इसी मंशा-ए-ओ- मक़सद के तहत मिल्लत-ए-इस्लामीया के तलबाव तालिबात केलिए तालीमी इदारों का क़ियाम अमल में लाया। डाक्टर वज़ारत रसूल ख़ान ने कहा कि काफ़ी जद्द-ओ-जहद के बाद हिंदूस्तान में पहली मर्तबा लड़कीयों की तालीम केलिए शादां वीमनस कॉलिज आफ़ इंजीनीयरिंग ऐंड टैक्नालोजी ख़ैरीयत आबाद और डाक्टर वे आर के वीमनस कॉलिज आफ़ इंजीनीयरिंग ऐंड टैक्नालोजी का क़ियाम अमल में लाया गया।

उन्हों ने कहा कि तालिबात पाबंदी से जमातों में हाज़िर रहें , ज़्यादा से ज़्यादा पढ़ाई पर तवज्जा दें । डाक्टर ख़ान ने कहा कि मुस्लमान अपनी लड़कीयों को इंजीनीयरिंग तालीम केलिए तवज्जा दिलाएं इन इदारों के क़ियाम के मक़सद को पूरा करने बच्चीयों को शरीक करवाईं। उन्हों ने कहा कि आज हमारी लड़कीयां असरी उलूम हासिल करने के काबिल हैं,उन्हें हुकूमत और मुस्लिम इंतिज़ामीया की जानिब से बेहतरीन तालीमी मवाक़े हासिल हो रहे हैं अगर वालदैन-ओ-सरपरस्त(guardian) इबतिदा से बच्चीयों की तालीम वित्र बीत पर तवज्जा दें तो लड़कीयां मुल़्क की ख़ुशहाली और तरक़्क़ी में अहम किरदार अदा कर सकती हैं।

जनाब सय्यद एज़ाज़ अलरहमन वाइस चेयरमैन शादां एजूकेशनल सोसाइटी ने तालिबात को इंजीनीयरिंग के चार साला दौर तालीम के मराहिल और कोर्सस के सिलसिला में तफ़सीलात बताएं और ने कहा कि लड़कीयां अपनी पसंद के मज़मून के इलावा दीगर मज़ामीन की तरफ़ ध्यान दें पढ़ाई में दिल लगाऐं। वक़्त ज़ाए करने की बजाय कॉलिज के औक़ात के इलावा घर में मेहनत करें।

अंग्रेज़ी ज़बान पर उबूर हासिल करने के लिए कम अज़ कम 15हज़ार अंग्रेज़ी अलफ़ाज़ का ज़ख़ीरा ज़हन नशीन हो। उन्हों ने कहा कि इंजीनीयरिंग साल-ए-अव्वल में तमाम 7मज़ामीन में दिलचस्पी से पढ़ाई करें। प्रोफ़ैसर अहमद उल्लाह ख़ान साबिक़(पूर्व‌) डीन कॉलिज आफ़ ला उस्मानिया यूनीवर्सिटी ने ग्रैजूएशन की एहमीयत को उजागर करते हुए कहा कि एंटर के बाद की तालीम तलबा केलिए एहमीयत रखती है तलबा में सोचने , समझने की सलाहीयत प्रवान चढ़ती है यही दूर उन तलबा-ओ-तालिबात केलिए एहमीयत का हामिल होता है।

बेहतर और रोशन मुस्तक़बिल(future) के साथ साथ अख़लाक़-ओ-किरदार के लिए वालदैन अपनी लड़कीयों पर ख़ुसूसी तवज्जा दें। प्रोफ़ैसर ख़्वाजा नासिर उद्दीन एडमिनिस्ट्रेटर डाक्टर वे आर के वीमनस मैडीकल कॉलिज-ओ-हॉस्पिटल ने कहा कि अख़लाक़-ओ-किरदार से ही इंसान की क़दर-ओ-मंजिलत होती है और बेहतरीन अख़लाक़-ओ-किरदार उसी वक़्त हासिल होते हैं जब इंसान में तालीम हो। तालीम के ज़रीया इंसान तरक़्क़ी के मराहिल हासिल कर सकता है।

उन्हों ने कहा कि हुसूल तालीम के लिए सख़्त मेहनत और जुस्तजू की ज़रूरत होती है लिहाज़ा तालिबात अपने आप को काबुल और बासलाहीयत बनाने पढ़ाई में ज़्यादा दिलचस्पी पैदा करें। मुआशरा की तरक़्क़ी-ओ-ख़ुशहाली के लिए ख़वातीन का अहम रोल होता है और अगर मुआशरा में तालीम-ए-याफ़ता ख़वातीन हूँ तो क़ौम की तरक़्क़ी ही नहीं बल्कि मुल्क में भी अमन वामान बरक़रार रहता है । मिसिज़ सुजाता ने कहा कि कॉलिज में तालीम हासिल करने ख़ुशगवार माहौल फ़राहम है।

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