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मुस्लिम लड़कीयों की शादी का मसला संगीन:ज़ाहिद अली ख़ान

ज़ाहिद अली ख़ान एडीटर रोज़नामा सियासत ने कहा कि मुस्लिम लड़कों-ओ-लड़कीयों की शादीयों का मसला इंतिहाई संगीन नौईयत इख़तियार कर गया है, इस मसले से ना सिर्फ़ हिंदुस्तान बल्कि पाकिस्तान, अरब ममालिक अमरीका-ओ-बर्तानिया में मुक़ीम मुस्लिम वाल

ज़ाहिद अली ख़ान एडीटर रोज़नामा सियासत ने कहा कि मुस्लिम लड़कों-ओ-लड़कीयों की शादीयों का मसला इंतिहाई संगीन नौईयत इख़तियार कर गया है, इस मसले से ना सिर्फ़ हिंदुस्तान बल्कि पाकिस्तान, अरब ममालिक अमरीका-ओ-बर्तानिया में मुक़ीम मुस्लिम वालिदैन-ओ-सरपरस्त दो-चार हैं चुनांचे इन मुल्कों में रहने-ओ-अले मुस्लिम तंज़ीमों-ओ-इदारों की जतरफ से नुमाइंदगी की जा रही हैके वहां भी दू बा दू मुलाक़ात प्रोग्राम मुनाक़िद किए जाएं।

ज़ाहिद अली ख़ान ने एसए इम्पीरियल गार्डन (टोली चौकी) में इदारा सियासत-ओ-एम डी एफ़ की तरफ से 35 वीं दू बा दू मुलाक़ात प्रोग्राम को मुख़ातिब कररहे थे जिस में सैंकड़ों की तादाद में मुस्लिम वालिदैन और सरपरस्तों ने शिरकत की।

उन्होंने कहा कि मुस्लिम शादीयों में बेजा इसराफ़ के नतीजे में मुसलमानों की मईशत बर्बाद होरही है और कई तरह के समाजी मसाइल पैदा होरहे हैं। लड़कों और लड़कीयों के इंतिख़ाब में हमारा मयार बहुत ही सतही किस्म का होगया है ख़ानदान और ज़ाती शराफ़त के बजाये हम सिर्फ़ दौलत-ओ-ख़ूबसूरती को रिश्तों का मयार बनारहे हैं जिस की वजह से बेशुमार शादियां नाकाम साबित होरही हैं।

उन्होंने वालिदैन पर ज़ोर दिया कि वो इस्लामी मईआरत को रिश्तों के इंतिख़ाब की बुनियाद बनाईं। उन्होंने कहा कि शादी ख़ानों में जो दावतों का एहतेमाम किया जाता है इस में खाने के 10 ता 12 डशस बनाए जाते हैं और बड़ी मिक़दार में खाना ज़ाए किया जाता है, खाने की ये बेहुर्मती इंतिहाई अफ़सोसनाक है दूसरी तरफ़ दावत नामों में जो वक़्त दिया जाता है उसकी पाबंदी नहीं की जाती, दस्ता साढे़ दस बजे रात तक दुल्हा या दुल्हन शादी ख़ाना पहुंच नहीं पाते मेहमानों को घंटों इंतेज़ार करना पड़ता है निकाह होने के फ़ौरी बाद लोग खाने पर टूट पड़ते जो क़ौम के लिए ज़िल्लत की बात है।

उन्होंने कहा कि कुछ अर्सा से ये भी देखने में आरहा है कि मुस्लिम शादीयों में बियान्ड बाजा और नाच गानों का इंतेज़ाम किया जा रहा है जो इंतिहाई शर्मनाक है। उन्होंने तमाम शादी ख़ानों के मालकीयन से ख़ाहिश की के वो अपने शादी ख़ानों में बियान्ड बाजे-ओ-नाच गानों का एहतेमाम करने वालों को तक़रीब की इजाज़त ना दें।

लड़की वालों की तरफ़ से जहेज़ और घोड़े-ओ-जोड़े की रक़म के मुतालिबात के बाइस लड़की वालों को कई तरह की दुशवारीयों का सामना करना पड़ रहा है, खासतौर पर मुतवस्सित तबक़ा इस सूरते हाल से परेशान है और वालिदैन को मुतालिबात की तकमील के लिए सूद से क़र्ज़ लेना पड़ रहा है जबकि इस्लाम ने उसे हराम क़रार दिया है, किस क़दर अफ़सोस की बात है कि दावतों में सूद की रक़म से तैयार करदा खाना तनावुल कररहे हैं और इस तरह का खाना खाना भी हराम तसव्वुर किया जाएगा।

ज़ाहिद अली ख़ान ने कहा कि मुसलमानों को चाहीए कि शादी ब्याह के मुआमलात में अपनी रविष को बदलें, फ़र्सूदा रसूमात को तर्क करदें और निकाह को ज़्यादा से ज़्यादा आसान बनाने की सिम्त इक़दामात करें।

उन्होंने कहा कि सियासत-ओ-एम डी एफ़ का मक़सद यही है कि मुआशरा में एक सहतमनद इन्क़िलाब लाया जाये और शादी ब्याह के मुआमलात में बढ़ती हुई बुराईयों का ख़ातमा किया जाये।

उन्होंने उल्मा किराम से भी अपील की कि वो इस संगीन मसले को हल करने के लिए अहकामे इलहि की रोशनी में मुसलमानों की रहनुमाई करें। उन्होंने कहा कि मुस्लमान शादी को आसान बनाते हुए समाज में अपनी पहचान बनाईं। उन्होंने उम्मीद ज़ाहिर की के के दू बा दू प्रोग्राम में वालिदैन अपने लड़के-ओ-लड़कीयों के रिश्ते आसानी के साथ तए करेंगे।

आबिद सिद्दीक़ी ने कहा कि शादीयों में लड़की वालों की तरफ़ से खाने का बाईकॉट करने की तहरीक निहायत ही समर आवर नताइज बरामद कररही है।

ज़ाहिद अली ख़ान को ख़िराज-ए-तहिसीन अदा करते हुए कहा कि कश्मीर हो कि गुजरात आसाम और मुज़फ़्फ़र नगर हर जगह जहां-जहां मुसलमानों पर ज़ुलम-ओ-सितम हुए इदारा सियासत ने मज़लूमीन-ओ-मुतास्सिरीन की मदद की और उनकी बाज़ आबादकारी में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया इसी तरह मुस्लिम लड़कों-ओ-लड़कीयों के शादीयों के संगीन मसले को हल करने के लिए ज़ाहिद अली ख़ान की रहनुमाई में एम डी एफ़ का मिशन जारी है।

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