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मुस्लिम एक ही ख़ानदान के 14 अरकान का बेरहमाना क़त्ल

थाने 29 फ़रवरी: थाने में एक मुस्लिम ख़ानदान के 14 अरकान का क़त्ल करने के बाद नौजवान हसनैन अनवर ने ख़ूनय़आलूद चाक़ू के साथ फांसी लेकर ख़ुदकुशी करली।

इस दिल दहला देने वाले ग़मनाक हादसे ने सारे थाने को सोगवार बनादिया जबकि दवाख़ाना में लाई गई ख़ून में लुत‍-पुत लाशों की रिपोर्टिंग करने वाले टीवी चैनलों के रिपोर्टर्स और कैमरा मैनों में से एक कैमरा मैन मंज़र कुशी के दौरान सदमे से क़लब पर हमले के बाइस फ़ौत हो गया।

पुलिस ने बताया कि 35 साला शख़्स ने मुबय्यना तौर पर अपने वालिदैन, अहलिया और बच्चों ख़ानदान के 14 लोगें के गले काट दिए। उनमें मक़्तूल की अहलिया जबीन 28 साल, दुख़तर मबशरा 6 साल , दुख़तर अमीरा तीन माह की शीरख़वार, वालिद अनवर 55 साल, वालिदा आईशा बी 50 साल, बहन शबीना 35 साल , भांजा अनस 12 साल , भांजी सादिया 16 साल , भांजा अली हसन 5 साल, बहन बतूल 30 साल और एक बहन मारिया 28 साल, भांजा अमीर 7 साल, भांजा यूसुफ़ 4 साल , भतीजी इर्ष्या 5 माह की शेरख़ार शामिल हैं।

इन तमाम को मौत की नींद सुलाने के बाद क़ातिल ने ख़ुदकुशी करली।
इन तमाम महलोकीन की लाशें ख़ून में पड़ी हुई थीं। हसनैन अनवर की लाश उस के ख़ानदान के मकान की बालाई मंज़िल के कमरे में छत से लटकी हुई थी। उस के हाथ में चाक़ू भी थी। थाने के कसरवाड़ वाली इलाके में वाक़्ये G+1 मकान में पेश आए इस दर्दनाक वाक़िये में मक़्तूल की एक छोटी बहन बच गई जिसको ज़ख़मी हालत में दवाख़ाना में शरीक किया गया। थाने के जवाइंट कमिशनर पुलिस अश्शो तोष धमीरे ने कहा कि हसनैन अनवर ने अपनी तीन बहनों और उनके बच्चों को नवी मुंबई और मबापोल निज़द भीवनडी से घर आने की दावत दी जहां वो अक्सर इन तमाम के लिए अक्सर दावत का एहतेमाम करता था।

हसनैन एक कॉमर्स ग्रेजूएट था जो नवी मुंबई में सीए फरम से वाबस्ता हो कर इन्कम टैक्स से मुताल्लिक़ दस्तावेज़ात की तैयारी का काम अंजाम देता था। उसने अपनी बहनों और बच्चों को दावत देकर रात के खाने में नशा आवर शए मिला दी।
खाना खाने के बाद जब ये तमाम लोग सो गए तो उसने एक के बाद एक तमाम के गले काट दिए।

तक़रीबन 5 या 5 बजकर 30 मिनट अली उल-सुबह इस वाक़िये में बच जाने वाली मक़्तूल की 22 साला बहन ने मकान की खिड़की से मदद के लिए आवाज़ दी जिसके बाइस पड़ोसी जमा हो गए और खिड़की की जाली तोड़कर ज़ख़मी ख़ातून को निकाल कर दवाख़ाना में शरीक कर दिया। पुलिस को इत्तेला दी गई। मक़्तूल हसनैन ने अपनी बहन के गले के ऊपरी हिस्से को काटा था जिससे वो बच गई और मदद के लिए पुकारने लगी। बच जाने वाली ख़ातून के ससुरालवालों ने जो पड़ोस के मकान में रहते थे रोने की आवाज़ सुनकर पहूंचे और दरवाज़ा खोलने की कोशिश की लेकिन दरवाज़ा अंदर से बंद था। ससुरालवालों ने खिड़की की जाली तोड़ कर ग्रांऊड फ़्लोर से अंदर मकान में दाख़िल हुए। जहां ख़ून में लुत-पुत लाशें पड़ी हुई थीं।

14 लाशों के गले कटे हुए थे। जिनमें चंद ग्रांऊड फ़्लोर पर थीं और कुछ लाशें पहली मंज़िल पर थीं हर जगह ख़ून ही ख़ून था। ये मकान मुल्ज़िम के वालिदैन की मिल्कियत में था जहां वो पिछ्ले 10 साल से मुक़ीम थे। पुलिस ने बताया कि हसनैन की लाश इस कमरा में पंखे से लटकी हुई पाई गई।

पुलिस ओहदेदार ने कहा कि हसनैन के मोबाईल फ़ोन और लैपटॉप को ज़बत कर लिया गया है ताकि इस दर्दनाक वाक़िये की वजूहात का पता चलाया जाये।

शवाहिद से पता चलता है कि मुल्ज़िम ने मकान के तमाम दरवाज़ों को बंद कर दिया था। रात का खाना खाने के बाद जब तमाम लोग सो गए मुल्ज़िम ने एक के बाद एक हर एक का गला काट दिया। इस मकान में 3 कमरे हैं जबकि एक कमरे में वो अपनी बीवी और बच्चों के साथ पहली मंज़िल पर रहता था। उस के वालिदैन और बहनें ग्रांऊड फ़्लोर के कमरों में रहते थे इस दिलख़राश घिनाओने हादसे की वजह जायदाद का तनाज़ा समझा जा रही है लेकिन पुलिस ओहदेदार ने कहा कि इबतेदाई मरहले में क़त्ल का अव्वल मक़सद मालूम नहीं हो सका।

इस हादसे ने पड़ोसीयों को सदमे से दो-चार कर दिया। 7 महलोकीन की कसरवादावली इलाके में इजतिमाई तदफ़ीन अमल में आई जबकि 5 माह की शीरख़र को थाने के महापोली में दफ़न किया गया।

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