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मुस्लिम फ़लसफ़ी अल-रूहवी ने लिखी थी मेडिकल एथिक्स पर पहली किताब

अस्सलाम-ओ-अलेकुम, आजकल के ज़माने में जहाँ पर ‘रेड क्रॉस सोसाइटी’ से लेकर UNESCO जैसी संस्थाएं हैं जो इंसानी बीमारियों को दूर करने की कोशिश करती रहती हैं और अक्सर मेडिकल एथिक्स की बात करती रहती हैं. ये कितना ज़ुरूरी है हम आज समझ पा रहे हैं लेकिन तक़रीबन 1100 साल पहले एक स्कॉलर ने पहली बार इस मुद्दे पर बात की थी. सिआसत हिंदी में हम आज उसी शख्स के बारे में बात करेंगे. उनका नाम है इशाक इब्न अली अल-रूहवी, रूहवी की पैदाइश 854 में हुई थी. पैदाइश के वक़्त उनका मज़हब इसाई था, वो सीरिया और तुर्की के बॉर्डर पर स्थित अल-रूहा में पैदा हुए जो आज तुर्की में है.
वो पहले स्कॉलर थे जिन्होंने मेडिकल एथिक्स पर एक किताब लिखी, उन्होंने अपनी किताब में ‘पीर रिव्यु’ के बारे में भी लिखा. उन्होंने बताया कि एक डॉक्टर को चाहिए कि वो अपने काम को ख़ुद चेक करता रहे कि वो सही कर रहा है या नहीं और साथ ही उन्होंने सरकारों को भी हिदायत दी कि अगर कोई डॉक्टर अपना काम इमानदारी से नहीं कर रहा तो उस पर कार्यवाही होनी चाहिए.
जहाँ कुछ स्कॉलर्स का ये मत रहा था कि वो जन्म से लेकर मृत्य तक इसाई ही रहे थे, आज के इतिहासकारों ने इस बात को मानने से इनकार किया है और उन्होंने बताया कि अल रूहवी एक मुसलमान थे, चूंकि उन्होंने इस्लाम की राह चलते हुए ही इस तरह की किताबें लिखी हैं ये उनके लिखने के तरीक़े से साफ़ पता चलता है.
अदब-अल-तबीब उनकी सबसे मशहूर किताब रही है. उन्होंने कई और किताबें भी लिखी हैं. उनका इंतिक़ाल 931 में हुआ.

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