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मुहज़्ज़ब और ख़ौफ़ से पाक मुआशरे की तशकील असातिज़ा की ज़िम्मेदारी

हैदराबाद । ०६सितंबर : ( सियासत न्यूज़ ) : पहले ज़माने में एक अच्छे उस्ताद की तलाश की जाती थी। आज ज़माना बदल गया है। लोग अच्छे इदारे या स्कूल की तलाश में रहते हैं। इस में अक्सर असातिज़ा की क़ाबिलीयत को मल्हूज़ नहीं रखा जाता है। जबकिअसा

हैदराबाद । ०६सितंबर : ( सियासत न्यूज़ ) : पहले ज़माने में एक अच्छे उस्ताद की तलाश की जाती थी। आज ज़माना बदल गया है। लोग अच्छे इदारे या स्कूल की तलाश में रहते हैं। इस में अक्सर असातिज़ा की क़ाबिलीयत को मल्हूज़ नहीं रखा जाता है। जबकिअसातिज़ा ही की बदौलत एक बेखौफ तहज़ीब याफ़ता और अच्छे मुआशरे की बुनियाद पड़ सकती है।

इन ख़्यालात का इज़हार प्रोफ़ैसर सुनयना सिंह वाइस चांसलर इंग्लिश ऐंड फ़ौरन लैंग्वेजज़ यूनीवर्सिटी ने आज मौलाना आज़ाद नैशनल उर्दू यूनीवर्सिटी में मुअल्लिम औरमुआशरा के ज़ेर-ए-उनवान यौम असातिज़ा लकचर देते हुए किया। प्रोफ़ैसर मुहम्मद मियां वाइस चांसलर ने सदारत की। प्रोफ़ैसर सुनयना सिंह ने कहा कि इलम का मक़सदमुसलसल ख़ुद आ गई है।

तालीम ही से इंसान की एक शनाख़्त बनती है और इस के कल्चर और सक़ाफ़्त को भी फ़रोग़ मिलता ही। प्रोफ़ैसर मुहम्मद मियां ने अपने सदारतीख़िताब में कहा कि सही तालीम की फ़राहमी हमारी ज़िम्मेदारी ही। उन्हों ने कहा कि उस्ताद मुआशरे से पहले ही। इस की वज़ाहत करते हुए कहा कि इंसान की पहली टीचर उस की माँ होती है और माँ के बगै़र मुआशरे का कोई तसव्वुर ही नहीं ही। उन्हों ने कहा कि हमें ऐसे तालिब-ए-इल्म तैय्यार करना चाहीए जो दुनिया को अपनी मुट्ठी में रख सकें। तभी उस्ताद मुआशरे पर असरअंदाज़ हो सकेगा।

उन्हों ने स्वामी वो यक्का निंदा का क़ौल दुहराया कि तालीम इंसान की जिस्मानी ज़हनी और रुहानी क़ाबिलीयत के फ़रोग़ का नाम ही। उन्हों ने खासतौर पर जज़बातीयत पर कंट्रोल पर तवज्जा दिलाई जिस की वजह से इंसान अपनीज़ाती ज़िंदगी में बेहतरी पैदा करसकता ही। उन्हों ने असातिज़ा को तवज्जा दिलाते हुए कहा कि वो इस तरह बनीं कि शागिर्द उन्हें याद रखें। तक़रीब की इबतदा-ए-क़ारी ख़्वाजा मुदस्सर अली की तिलावत से हुआ है।

प्रोफ़ैसर मुहम्मद ज़फ़र उद्दीन एज़ाज़ी मीडीया को ऑर्डिनेटर ने ख़ैर मुक़द्दम किया और मेहमान का तआरुफ़ पेश करते हुए कहा कि प्रोफ़ैसर सुनयना सिंह ग़ैरमामूली सलाहीयतों की हामिल एक लायक़-ओ-फ़ाइक़ माहिर-ए-तालीम हैं जिन्हों ने क़ौमी-ओ-बैन-उल-अक़वामी सतह पर इज़्ज़त-ओ-एहतिराम हासिल किया ही। प्रोफ़ैसर सुनयना सिंह की शख़्सियत का तहज़ीबी रचाओ ज़बान की शगुफ़्तगी उर्दू की शीरीनी-ओ-चाशनी से उन के मिज़ाज की हम आहंगी अशआर में ख़ुसूसी दिलचस्पी हमें उन से मज़ीद क़रीब करदेती है।

स्कालर रियाज़ अलनिसा-ए-ने डाक्टर सर्वे पली राधा कृष्णन के मुताल्लिक़ मालूमात फ़राहम कीं। प्रोफ़ैसर ऐच ख़दीजा बेगम रजिस्ट्रार इंचार्ज-ओ-डीन स्कूल आफ़ एजूकेशन ऐंड ट्रेनिंग ने शुक्रिया अदा किया। असातिज़ा तलबा और दीगर स्टाफ़ मैंबरस की कसीर तादाद मौजूद थी। कसीर तादाद में असातिज़ा तलबा और स्टाफ़ मैंबरस ने शिरकत की।

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