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मुहम्मद अली शब्बीर की इंतेख़ाबी मुहिम , मुहम्मद माजिद हुसैन तन्क़ीद का निशाना

हैदराबाद: क़ाइद अपोज़ीशन तेलंगाना क़ानूनसाज़ काउंसिल मुहम्मद अली शब्बीर ने जीएचएमसी इंतेख़ाबात की ख़ातिर अपनी बेटी से लाताल्लुक़ी का इज़हार करने पर मजलिस के साबिक़ मेयर मुहम्मद माजिद हुसैन को शदीद तन्क़ीद का निशाना बनाया और कहा कि मजलिस के क़ाइदीन दौलतमंद बन गए मगर राय दहनदे ग़रीब के ग़रीब रह गए।

कांग्रेस के उम्मीदवार मह्दीपटनम मुहम्मद ख़ालिक़ उर्फ़ इर्फ़ान की इंतेख़ाबी मुहिम चलाते हुए मुख़्तलिफ़ इलाक़ों में पदयात्रा किया। अवाम से रास्त मुलाक़ात करते हुए कांग्रेस उम्मीदवार को कामयाब बनाने की अपील की। इस मौक़े पर हलक़ा असेम्बली के इंचार्ज विनोद , सेक्रेटरीज़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी , जाबिर पटेल , मुहम्मद जावेद अहमद , तर्जुमान मिस्टर एसके अफ़ज़लुद्दीन के अलावा दूसरे मौजूद थे।

मुहम्मद अली शब्बीर ने ज़ेबा बाग़ पर अवाम से ख़िताब करते हुए कहा कि कांग्रेस की बदौलत मुहम्मद माजिद हुसैन तीन साल तक मेयर के ओहदे पर बरक़रार रहे हैं मगर अफ़सोस की बात है कि उन्होंने ग्रेटर हैदराबाद बिलख़ुसूस पुराने शहर की तरक़्क़ी के लिए कोई ठोस इक़दामात नहीं किए।

उन्होंने कहा कि जो शख़्स सिर्फ़ सियासी मुफ़ादात के लिए अपनी लख़्त-ए-जिगर (बेटी से लाताल्लुक़ी का इज़हार करता है , वो कामयाब होने के बाद राय दहिंदों का शुक्रगुज़ार कैसे रहेगा और इस से तरक़्क़ी की क्या उम्मीद रखी जा सकती है। इंतेख़ाबात के लिए बेटी से लाताल्लुक़ी का इज़हार करना दस्तूर के साथ साथ इस्लामी तालीमात की ख़िलाफ़वरज़ी है।

हक़ीर सियासी मुफ़ादात के लिए शरीयत से छेड़-छाड़ ग़ैर-मुनासिब है। अपनी बेटी से लाताल्लुक़ी का इज़हार करते हुए मजलिस के उम्मीदवार मुहम्मद माजिद हुसैन अपने नफ्स के साथ साथ मह्दीपटनम डीवीझ़न के अवाम को भी धोका दे रहे हैं जब पैदाइश सर्टीफ़िकेट वाज़िह करते हैं कि आईशा मलाला माजिद हुसैन और सईदा जुवेरिया अज़मत तीसरी दुख़तर है।

क्या साबिक़ मेयर इस हक़ीक़त को झुटला सकते हैं और क्या वो कसम खा सकते हैं कि ये उनकी बेटी नहीं है। मुहम्मद अली शब्बीर ने कहा कि मजलिस ने पुराने शहर के अलावा रियासत के मुसलमानों की तरक़्क़ी-ओ-बहबूद के लिए कुछ नहीं किया है। दूसरी हुकूमतों ने जो भी अमली इक़्दात किए मजलिस ने इस पर मोहर लगाते हुए उसकी कामयाबी का सेहरा अपने सर बाँधने की कोशिश की है।

मुसलमानों ने मजलिस पर अटूट मुहब्बत का इज़हार करते हुए उन्हें कामयाब बनाया। मजलिस के क़ाइदीन दौलतमंद बन गए मगर राय दहनदे ग़रीब के ग़रीब रह गए। जिन बलदी डीवीझ़नस पर मजलिस की नुमाइंदगी रही है वो डीवीझ़ंस में अवाम को बुनियादी सहूलतें मयस्सर नहीं है।

अवाम कई मसाइल का शिकार हैं मजलिस का मेयर स्टेंडिंग‌ कमेटी का सदर नशीन होने के बावजूद मजलिस ने अपने हलक़ों को तरक़्क़ी देने के लिए कोई इक़दामात नहीं किए। उन्होंने इस्लाम को ख़तरे में ज़ाहिर करते हुए जज़बाती नारों से मुसलमानों का इस्तिहसाल करने वाली मजलिस को इस मर्तबा शिकस्त देते हुए सेक्युलर जमात कांग्रेस को कामयाब बनाने की अपील की।

कांग्रेस तमाम मज़ाहिब और तबक़ात का एहतेराम करने वाली जमात है जो अपनी10 साला कारकर्दगी को बुनियाद बनाकर अवाम से वोट तलब कर रही है। कांग्रेस पार्टी ने मुसलमानों को4 फ़ीसद तहफ़्फुज़ात फ़राहम करते हुए उनकी ज़िंदगीयों में रोशनी लाई जबकि टीआरऐस ने मुसलमानों को12 फ़ीसद तहफ़्फुज़ात फ़राहम करने का वादा किया मगर इस पर आज तक अमलावरी नहीं की गई।

मजलिस और टीआरएस दोनों धोके बाज़ जमातें हैं उनसे होशयार रहने का अवाम से मुतालिबा किया। कांग्रेस के उम्मीदवार मिस्टर मुहम्मद इर्फ़ान ने कहा कि मजलिस बीजेपी हिंदू मुस्लिम इत्तेहाद में फूट डालते हुए सियासी फ़ायदा उठा रहे हैं। दोनों जमातों को अवामी मुफ़ादात से कोई हमदर्दी नहीं है। सिर्फ उन्हें अपने सियासी तिजारती अग़राज़-ओ-मक़ासिद अज़ीज़ है|

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