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मुहाजिरीन के लिए जर्मनी में मुलाज़िमत

जर्मनी पहुंचने वाले पनाह गुज़ीन एक मख़सूस अर्से और शराइत पूरी करने के बाद मुलाज़िमत के अहल होते हैं। डी डब्लयू के इस ख़ुसूसी आर्टीकल में जर्मनी में मुहाजिरीन के लिए मुलाज़िमत के मवाक़े और इमकानात के हवाले से तफ़सीलात फ़राहम की गई हैं।

जर्मनी पहुंचने वाले पनाह गुज़ीनों के लिए दीगर मुआमलात की तरह इस मुआमले में भी फ़ौरी तौर पर ये मुम्किन नहीं कि वो यहां पहुंचते ही मुलाज़िमत शुरू कर दें। आमद के बाद तीन माह तक किसी मुलाज़िमत के लिए दरख़ास्त देना ममनू है।

बादअज़ां ये क़दम उठाया जा सकता है। इब्तिदा में मुहाजिरीन को नौकरी उसी सूरत मिल सकती है, जब जिस नौकरी के लिए उन्होंने दरख़ास्त दी हो, उस के लिए किसी जर्मन शहरी ने दरख़ास्त ना दी हो। मुल्की शहरीयों को तर्जीह दिए जाने से मुताल्लिक़ इस इक़दाम को जर्मन ज़बान में Vorrangprfung कहा जाता है।

पंद्रह माह तक जर्मनी के क़ियाम के बाद दरख़ास्त दहिंदगान को इस अमल से नहीं गुज़रना होता यानी उनके लिए मवाक़े बराबर होते हैं। ताहम उस वक़्त भी ये ज़रूरी है कि मुलाज़िमत तस्लीम करने से क़ब्ल म्यूनसिंपल इमीग्रेशन के दफ़्तर से मंज़ूरी ली जाए।

उमूमन पनाह गुज़ीन जितना ज़्यादा वक़्त जर्मनी में गुज़ारते हैं, उसी हिसाब से उनके लिए तालीम और मुलाज़िमत के मवाक़े भी बढ़ते जाते हैं। चार साल के बाद किसी तुर्क-ए-वतन पर कोई शर्त लागू नहीं होती और उनके लिए तमाम दरवाज़े खुले होते हैं। अगर पनाह गुज़ीन किसी जर्मन या ग़ैर मुल्की डिग्री के हामिल हों, तो उनके मुलाज़िमत मिलने के इमकानात मुक़ाबलतन ज़्यादा रोशन होते हैं।

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