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मुक़ामी जमात की तरह ए आई यू डी एफ़ भी बीजेपी का आला-ए-कार

हैदराबाद 20 मई: मुल्क के जमहूरी निज़ाम में मुस्लिम सियासी जमातें किस हद तक मुसलमानों की नुमाइंदा साबित हो रही हैं, इस बात पर सियासी मुबस्सिरीन में तशवीश पैदा हो चुकी है। रियासत आसाम के असेंबली चुनाव के नताइज ने मुल्क भर में मुस्लिम तन्ज़ीमों और ज़िम्मेदारान मिल्लत-ए-इस्लामीया को तशवीश में मुबतेला कर दिया है क्युं कि जिस तरह कहा जा रहा था कि बिलवासता तौर पर ऑल इंडिया यूनाईटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (ए आई यू डी एफ़) भारतीय जनता पार्टी की मदद में मसरूफ़ है, ये बात हक़ीक़त साबित हुई। इन ख़दशात का इज़हार पिछ्ले कई माह से किया जाने लगा था कि कहीं ए आई यू डी एफ़ भी हैदराबाद की मुक़ामी जमात की तर्ज़ पर बीजेपी की आला कार्बन कर फ़ायदा तो नहीं पहुँचाएगी। ये ख़दशात उस वक़्त यक़ीन में तबदील हो गए जब आसाम जैसी रियासत में वोटों की तक़सीम का रास्त फ़ायदा बीजेपी को हुआ।

रियासत महाराष्ट्रा में मुक़ामी जमात की तरफ से 24 नशिस्तों पर मुक़ाबला करते हुए जो वोट हासिल किए गए थे, वो मजमूई एतेबार से महाराष्ट्रा के जुमला राय दही में एक फ़ीसद भी नहीं थे बल्के 24 नशिस्तों पर 0.93 फ़ीसद वोट मुक़ामी जमात को हासिल हुए थे। इस फ़ीसद के साथ दो नशिस्तों पर कामयाबी हासिल हुई लेकिन उन के चुनाव में हिस्सा लेने का असर सारी रियासत में बी जे पी को फ़ायदे की शक्ल में हुआ जहां वोट मज़हबी ख़ुतूत पर मुनक़सिम हो गए और सेक्युलर वोट मुख़्तलिफ़ जमातों के हिस्से में आए। ईसी तरह आसाम में हुए चुनाव में जहां बीजेपी इक़तिदार हासिल करने में कामयाब हो चुकी है। इस रियासत में वोटों की तक़सीम का जायज़ा लिया जाये तो ये बात सामने आती है कि कांग्रेस और ए आई यू डी एफ़ ने जो वोट हासिल किए हैं वो मजमूई एतेबार से 44 फ़ीसद से तजावुज़ कर चुके हैं। जबकि बीजेपी ने 29.5 फ़ीसद वोट हासिल करते हुए आसाम में इक़तिदार हासिल किया है। तफ़सीलात के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी को 30.1 फ़ीसद वोट हासिल हुए हैं।

कांग्रेस ने 31 फ़ीसद वोट हासिल किए हैं और ए आई यू डी एफ़ को 13 फ़ीसद वोट हासिल हुए हैं। आसाम गिना परिषद को 8.1 फ़ीसद वोट हासिल हुए। आसाम में असेंबलीचुनाव से पहले पैदा शूदा माहौल के दौरान ही सियासी मुबस्सिरीन ने ये ख़्याल ज़ाहिर किया था कि अगर सेक्युलर इत्तेहाद की तशकील अमल में नहीं आती है तो एसी सूरत में बीजेपी को ज़बरदस्त फ़ायदा हासिल होगा और आसाम में बदरुद्दीन अजमल की मौजूदगी पर मुक़ामी जमात ने ये कहते हुए हिस्सा लेने से इनकार किया था कि वहां अजमल भाई की क़ियादत मौजूद है। आसाम में बदरुद्दीन अजमल ने 71 नशिस्तों पर मुक़ाबिला किया था जहां उन्हें 11 नशिस्तों पर कामयाबी मिली है जबकि उन के दो इत्तेहादी अरकाने असेंबली भी मुंतख़ब होने की इत्तेलाआत मौसूल हो रही हैं। रियासत महाराष्ट्रा में हुए चुनाव के दौरान मुक़ामी जमात की तरफ से हिस्सा लिए जाने के बाद जो सूरत-ए-हाल पैदा हुई उस के नतीजे में बीजेपी को महाराष्ट्रा असेंबली में 122 नशिस्तों पर कामयाबी हासिल हुई थी जबकि शिवसेना ने 63 नशिस्तों पर कामयाबी हासिल की। इसी तरह कांग्रेस को 42 और नेशनल कांग्रेस पार्टी को 41 नशिस्तों पर कामयाबी हासिल हुई थी।

मुक़ामी जमात ने 24 नशिस्तों पर चुनाव में हिस्सा लिया था जिसके असरात रियासत के तमाम असेंबली हलक़ों पर मुरत्तिब हुए। आसाम में बदरुद्दीन अजमल ने पहली मर्तबा 2006 में 69 नशिस्तों पर मुक़ाबिला करते हुए 10 नशिस्तों पर कामयाबी हासिल की थी जबकि 2011 में 76 नशिस्तों पर मुक़ाबिला करते हुए 18 नशिस्तों पर कामयाबी दर्ज करवाई थी।

इस मर्तबा 71 नशिस्तों पर मुक़ाबिला किया गया लेकिन सिर्फ 11 नशिस्तों पर कामयाबी मुम्किन होपाई। जबकि ए आई यू डी एफ़ और बीजेपी एक दूसरे को अपने कट्टर हरीफ़ के तौर पर पेश करने की कोशिशों में मसरूफ़ थे जिसमें भारतीय जनता पार्टी को कामयाबी हासिल हुई।

मुस्लिम सियासी जमातों की पालिसीयों और हिक्मत-ए-अमली पर हक़ीक़ी हमदरदान मिल्लत हैरत और तशवीश का शिकार हो चुके हैं और वो इस बात को तस्लीम करने पर मजबूर होते जा रहे हैं कि हक़ीर फ़ायदे की ख़ातिर जमहूरी अंदाज़ में मुस्लिम वोटों की तक़सीम की मुर्तक़िब बन रही हैं।

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