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मुख़ालिफ़ इस्लाम फ़िल्म : अक़वाम-ए-मुत्तहिदा में मुस्लिम क़ाइदीन मुत्तहिद

अक़वाम-ए-मुत्तहिदा, ३० सितंबर : ( राईटर ) : अक़वाम-ए-मुत्तहिदा (UN) में मुस्लिम क़ाइदीन (लीडर) ने गुस्ताखाना हरकतों के ख़िलाफ़ मुत्तहदा (संयुक़्त) एहतिजाज ( विरोध) करते हुए आलमी इदारे पर ज़ोर दिया कि वो शान ए रिसालत में गुस्ताख़ी को जुर्म क़रा

अक़वाम-ए-मुत्तहिदा, ३० सितंबर : ( राईटर ) : अक़वाम-ए-मुत्तहिदा (UN) में मुस्लिम क़ाइदीन (लीडर) ने गुस्ताखाना हरकतों के ख़िलाफ़ मुत्तहदा (संयुक़्त) एहतिजाज ( विरोध) करते हुए आलमी इदारे पर ज़ोर दिया कि वो शान ए रिसालत में गुस्ताख़ी को जुर्म क़रार दे और ख़ातियों के ख़िलाफ़ सज़ा ए मौत तजवीज़ करे ।

मुस्लिम क़ाइदीन ( लीडर) ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि मग़रिब की इज़हार ए ख़्याल की आज़ादी को किसी की दिल आज़ारी ( दिल दुखाने) का सबब ना बनाया जाय । ये मग़रिबी दुनिया इज़हार ए ख़्याल की आज़ादी की आड़ में अपने खु़फ़ीया अज़ाइम को बरुएकार ला रही है इस से तहज़ीबी-ओ-सक़ाफ़्ती हस्सासीत को नज़रअंदाज किया जा रहा है ।

ख़ासकर मुख़ालिफ़ इस्लाम ( इस्लाम विरोधी) हरकतों के बाद मशरिक़ और मग़रिब के कल्चर में दरार और दूरी का ख़दशा ( डर) बढ़ रहा है । शान ए रिसालत में गुस्ताख़ी वाली फ़िल्म के बाद आलम इस्लाम में अमेरीका और दीगर ( अन्य) मग़रिबी ममालिक ( देशों) के ख़िलाफ़ शदीद एहतिजाज ( शख्त विरोध ) भड़क उठा है ।

कई इस्लामी मुल्कों में अमेरीकी सिफ़ारतख़ानों ( दूतावासों) पर हमले हुए हैं इस माह अफ़्ग़ानिस्तान में खूंरेज़ खुदकुश ( खून खराबे) हमले भी हुए हैं मुसलमानों के ग़म-ओ-ग़ुस्सा में इस वक़्त शिद्दत पैदा हुई जब फ़्रांस के मेम्ज़न्स ने हुजूर की शान में गुस्ताखाना कार्टूनस शाय ( प्रकाशत) किए ।

तुर्की के वज़ीर ख़ारिजा अहमद दाव व गलोफ़ ने कहा कि अब वक़्त आ गया है कि इस्लाम के ख़िलाफ़ तौहीन आमेज़ हरकतें बंद कर दी जाएं और इज़हार ख़्याल की आज़ादी के नाम पर गुस्ताखियां रोक दी जाएं । मग़रिब ने ख़ुद पर इस्लाम का जो ख़ौफ़ तारी कर लिया है इसको भी ख़त्म करना ज़रूरी है ।

उन्हों ने अक़वाम-ए-मुत्तहिदा ( संयुक़्त राष्ट्र) सलामती ( शांती) कौंसल के इजलास ( सभा) से ख़िताब किया और कहा कि बदबख्ती (बदकिस्मती) की बात ये है कि इस्लाम के ख़िलाफ़ नफ़रत ने नसल कुशी की नई शक्ल पैदा कर दी है । अब इस को ख़त्म कर दिया जाय आज़ादी का मतलब ये नहीं कि अक़वाम-ए-मुत्तहिदा में अनारकी पैदा की जाए ।

मिस्र के नौ मुंतख़ब ( नए निर्वाचित) इस्लाम पसंद सदर मुहम्मद मर्सी ने भी चहारशंबा के दिन इसी तरह के जज़बात का इज़हार किया था । उन्होंने कहा था कि मिस्र इज़हार ख़्याल की आज़ादी का एहतिराम करना है लेकिन ये किसी के ख़िलाफ़ नफ़रत फैलाने का मूजिब (वजह) नहीं होना चाहीए । अक़वाम-ए-मुत्तहिदा में तक़रीर करने वाले बेशतर (ज्यादातर) मग़रिबी मुल्कों के क़ाइदीन ( लीडरों) ने इज़हार ख़्याल की आज़ादी की मुदाफ़अत (निवारण/ बचाव) की लेकिन गुस्ताखाना हरकतों पर आलमी इमतिना आइद ( प्रतिबंध लगाने) करने मुस्लिम क़ाइदीन ( लीडर) की अपील से ख़ुद को दूर रखा ।

अक़वाम-ए-मुत्तहिदा की इमारत के बाहर मुख़ालिफ़ इस्लाम फ़िल्म के ख़िलाफ़ एहतिजाज करते हुए तक़रीबा 150 एहितजाजियों (प्रदर्शकारीयों) ने इंसाफ़ का नारा बुलंद किया और कहा कि शान ए रिसालत में गुस्ताखाना हरकतों को अक़वाम-ए-मुत्तहिदा में जुर्म क़रार दिया जाय ।

57 रुकनी तंज़ीम इस्लामी कान्फ्रेंस से ताल्लुक़ रखने वाले वुज़राए ख़ारिजा ने भी मुख़ालिफ़ इस्लाम फ़िल्म के ख़िलाफ़ एहतिजाज करते हुए इस मौज़ू ( विषय) पर तक़रीर की ।

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