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मुख़ालिफ़ दहशतगर्दी बैन-उल-अक़वामी निज़ाम पर अमल आवरी ( प्रक्रिया)

अक़वाम-ए-मुत्तहिदा, १२ अक्टूबर (पी टी आई) हिंदूस्तान ने बैन-उल-अक़वामी ( अंतर्राष्ट्रीय) क़ानूनी चौखटों पर रुकन ममालिक की जानिब से मूसिर ( शक़्तिशाली) अमल आवरी (प्रक्रिया और पद्धति) पर ज़ोर दिया ताकि दहशतगर्दी के ख़िलाफ़ जंग की जा सके और

अक़वाम-ए-मुत्तहिदा, १२ अक्टूबर (पी टी आई) हिंदूस्तान ने बैन-उल-अक़वामी ( अंतर्राष्ट्रीय) क़ानूनी चौखटों पर रुकन ममालिक की जानिब से मूसिर ( शक़्तिशाली) अमल आवरी (प्रक्रिया और पद्धति) पर ज़ोर दिया ताकि दहशतगर्दी के ख़िलाफ़ जंग की जा सके और दहशतगर्दों को दुनिया में किसी भी जगह महफ़ूज़ पनाहगाह हासिल ना हो सके।

अक़वाम-ए-मुत्तहिदा ( संयुक़्त राष्ट्र/ UN) की जनरल असेंबली के इजलास ( सभा) से इसका मौज़ू ( विषय) क़ानून की हुक्मरानी , क़ौमी और बैन-उल-अक़वामी सतहों ( अंतर्राष्ट्रीय स्तर) पर था, ख़िताब करते हुए अक़वाम-ए-मुत्तहिदा का दौरा करने वाले हिंदूस्तानी रुकन पार्लीमेंट धर्मेन्द्र यादव ने जो अक़वाम-ए-मुत्तहिदा के दौरा पर हैं, इस की जनरल असेंबली के इजलास ( सभा/ मीटिंग) से ख़िताब करते हुए कहा कि हिंदूस्तान दहशतगर्दी के ख़िलाफ़ जंग में इजतिमाई (सामूहिक) कार्रवाई पर ज़ोर देता है, क्योंकि ये बैन-उल-अक़वामी अमन‍ ओ‍ शांती के लिए एक ख़तरा की हैसियत से बरक़रार है।

उन्होंने कहा कि हिंदूस्तान चाहता है कि बैन-उल-अक़वामी क़ानूनी निज़ाम क़ायम किया जाय ताकि दहशतगर्दों को दुनिया के किसी भी हिस्से में महफ़ूज़ पनाह हासिल ना हो सके। वो हिन्दी में तक़रीर कर रहे थे। उन्होंने अक़वाम-ए-मुत्तहिदा के सेक्रेटरी जनरल बैन की मून की रिपोर्ट का हवाला दिया जो अक़वाम-ए-मुत्तहिदा की क़ानून की हुक्मरानी सरगर्मीयों का इस्तेहकाम ( मजबूत) और तआवुन के ज़ेर-ए-उनवान रिपोर्ट में क़ौमी ( राष्ट्रीय) और बैन-उल-अक़वामी ( अंतर्राष्ट्रीय) सतहों पर गुज़श्ता साल के दौरान क़ानून की हुक्मरानी के इस्तेहकाम की कोशिशों का जायज़ा लिया गया है।

धर्मेन्द्र यादव , अरकान-ए-पार्लीमेट के इस ग्रुप में शामिल हैं जो जनरल असेंबली के 67 वें इजलास ( सभा) के मुख़्तलिफ़ ( अलग अलग) इजतिमाआत से ख़िताब करेंगे। उन्होंने कहा कि हिंदूस्तान जम्हूरीयत , मआशी ( आर्थिक/ माली) तरक़्क़ी , पायदार तरक़्क़ी, सनफ़ी इंसाफ़ , इंसिदाद ( निवारण) ग़ुर्बत और बुनियादी आज़ादीयों को यक़ीनी बनाने बैन-उल-अक़वामी सतह पर क़ानूनसाज़ी का मुतालिबा करता है। क़ौमी ( राष्ट्रीय) सतह पर क़ानूनसाज़ अरकान को इस पर ख़ुसूसी ( खास) तवज्जा ( ध्यान) देनी चाहीए।

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