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मुज़फ्फरनगर दंगा : दंगा विस्थापितों का किया जा रहा है शोषण

नई दिल्ली: एक ग़ैर सरकारी संगठन ने दावा किया कि तीन साल पहले उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर और शामली जिलों में दंगों के बाद बेघर हुए लोग जो अब शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं वो दंगों में मिले जख्मों के साथ  शरणार्थी शिविरों में भी बुनियादी सुविधाओं और रियल एस्टेट डेवलपर्स की बेईमानी से जूझ रहे हैं |
तीन साल पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक हिंसा में 60 से ज़्यादा लोग मारे गये थे | इन दंगा विस्थापितों के लिए बनी पुनर्वास कालोनियों में 40,000 से ज़्यादा लोगों के बारे में शहर स्थित गैर सरकारी संगठन की एक रिपोर्ट पेश की है |

“लिविंग अपार्ट : कम्युनल वायलेंस एंड फोर्सेड डिस्प्लेसमेंट” इन मुज़फ्फरनगर शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में बताया गया है कि दंगों के बाद बनी शरणार्थी कालोनियों में 28 मुजफ्फरनगर में, 37 शामली में हैं जिनमें 29,328 लोग रह रहे हैं|
अमन बिरादरी के हर्ष मंदर कहते हैं कि इनमें बसे ज़्यादातर लोगों को बुनियादी सविधाएं सफ़ाई, पीने के पानी की कमी जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है |
ये रिपोर्ट अमन बिरादरी और अफ़कार इण्डिया द्वारा आयोजित हर्ष मंदर, सह लेखक अकरम अख्तर चौधरी द्वारा किये गये सर्वे के आधार पर मुज़फ्फरनगर दंगों की चौथी वर्षगांठ पर कल 7 सितंबर को लखनऊ और 8 सितंबर को दिल्ली में हिंदी और इंग्लिश में जारी की जाएगी |

उन्होंने आरोप लगाया कि हम दंगों के बाद की स्थिति को समझने के लिए वहां गये और वहां की हालत को देखा जो बिलकुल नारकीय है |इस छह महीने के सर्वे में हमने देखा कि सरकार ने उनकी परेशानी को कम करने के लिए कुछ नहीं किया |चौधरी शरणार्थी कालोनियों के हालात बताते हुए कहा कि वहां “लोग मलेरिया और सांप के काटने से मर रहे हैं।”उन्होंने बताया कि हालात इतने खराब हैं कि “2015-16 में मलेरिया से छह बच्चों की जान जा चुकी है। दो बच्चों सांप के काटने से मौत हो गई है। लोगों को पीने के पानी के लिए भी बहुत संघर्ष करना पड़ रहा है |

स्थानीय बड़े किसानों और रियल एस्टेट डेवलेपर्स ने मौक़े का फ़ायदा उठाते हुए लोगों से ज़मीन का बहुत अधिक पैसा लिया | कुछ लोगों ने रियल एस्टेट डेवलेपर्स को जो पैसा दिया था उसमें भी उनके साथ धोका किया गया | मन्दर ने आरोप लगाया कि लोग दंगे के बाद वापस अपने घर नहीं लौटना चाहते थे क्यूँकि दंगे के दोषियों को बहुत ही कम और पूरी तरह दंडित नहीं किया गया |

 

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